Monday, April 19, 2021
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किसानों का विकास, बाजार का विस्तार, बेहतर विकल्प: मोदी सरकार के तीन विधेयकों की क्या होंगी खासियतें

इन नए बिलों की घोषणा आत्म निर्भर भारत अभियान के तहत घोषित आर्थिक पैकेज की तीसरी किश्त के हिस्से के रूप में की गई थी। संसद द्वारा पारित किए जाने वाले नए बिल, आवश्यक वस्तु अधिनियम में प्रस्तावित संशोधनों को प्रभावित करेंगे और देश में कृषि उत्पादों के व्यापार और विपणन पर दो नए केंद्रीय कानून लाएँगे।

देश भर में कृषि क्षेत्र के विकास में सबसे बड़ा रोड़ा हमेशा से किसानों को सही बाजार और उनकी उपज के बदले उचित दाम न मिल पाना रहा है। इसी समस्या के निदान के लिए विभिन्न राज्यों की सरकारों ने कृषि उत्पाद बाजार विनियमन अधिनियम (APMC अधिनियम) लागू किया था जिसके तहत राज्य को भूगोल और अन्य किसी प्रिंसिपल या उप बाजारों के आधार पर विभिन्न बाजारों में विभाजित किया जाता है। जब किसी विशेष क्षेत्र को बाजार क्षेत्र के रूप में घोषित कर दिया जाता है तो वह विशेष क्षेत्र बाजार समिति के अधिकार क्षेत्र में आ जाता है, इसके बाद किसी अन्य व्यक्ति या एजेंसी को स्वतंत्र रूप से थोक विपणन गतिविधियों की अनुमति नहीं दी जाती है।

शुरुआत में ऐसे बाजारों का उद्देश्य किसानों को उनकी उपज के बदले सही मूल्य दिलवाने का था। हालाँकि, साल दर साल बीतने के बाद, इस क्षेत्र में बहुत बिचौलिए सक्रिय हो गए और भ्रष्टाचार बढ़ता रहा। साल 2014 में सत्ता संभालने के साथ ही मोदी सरकार ने किसान विकास में APMC की अक्षमता को समझा और Unified National Agriculture Market की घोषणा की।

बता दें कि NAM एक अखिल भारतीय इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग पोर्टल है जो कृषि वस्तुओं के लिए एकीकृत राष्ट्रीय बाजार बनाने के लिए मौजूदा एपीएमसी और अन्य बाजार को जोड़ने का प्रयास करता है। अब इसी सुधार की प्रक्रिया को जारी रखते हुए मोदी सरकार ने नए तीन विधेयक पेश किए हैं ताकि कृषि उत्पादन के लिए सरल व्यापार को बढ़ावा मिले और मौजूदा एपीएमसी सिस्टम से वह आजाद हों, जिससे उन्हें अपनी उपज बेचने के और ज्यादा विकल्प व अवसर मिलें।

मोदी सरकार द्वारा जारी किए गए तीन बिल

मोदी सरकार ने संसद में जिन तीन बिलों को पेश किया है उनके नाम हैं:

1.कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक 2020 
2.कृषक (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक
3.आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक 2020

इससे पहले, इन नए बिलों की घोषणा आत्म निर्भर भारत अभियान के तहत घोषित आर्थिक पैकेज की तीसरी किश्त के हिस्से के रूप में की गई थी। संसद द्वारा पारित किए जाने वाले नए बिल, आवश्यक वस्तु अधिनियम में प्रस्तावित संशोधनों को प्रभावित करेंगे और देश में कृषि उत्पादों के व्यापार और विपणन पर दो नए केंद्रीय कानून लाएँगे।

इन तीन प्रस्तावित कानूनों का उद्देश्य मोदी सरकार के सपने “एक भारत और एक कृषि बाजार” को साकार करना है। इन्हें लाने के पीछे यही मंशा है कि APMC में एकाधिकार को समाप्त किया जा सके। 

1. कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक 2020 

इस विधेयक के तहत सरकार की योजना है कि एक फसल उत्पाद को लेकर ऐसा तंत्र विकसित हो जहाँ किसान मनचाहे स्थान पर फसल बेच सकें। इसके जरिए किसान अपनी फसल का सौदा सिर्फ अपने ही नहीं बल्कि दूसरे राज्य के लाइसेंसी व्यापारियों के साथ भी कर सकते हैं।

मुख्य लाभ

  • कृषि क्षेत्र में उपज खरीदने-बेचने के लिए किसानों व व्‍यापारियों को “अवसर की स्‍वतंत्रता” होगी।
  • लेन-देन की लागत में कमी आएगी
  • मंडियों के अतिरिक्‍त व्यापार क्षेत्र में फार्मगेट, शीतगृहों, वेयरहाउसों, प्रसंस्‍करण यूनिटों पर व्‍यापार के लिए अतिरिक्‍त चैनलों का सृजन होगा।
  • किसानों के साथ प्रोसेसर्स, निर्यातकों, संगठित रिटेलरों का एकीकरण होगा जिससे मध्‍स्‍थता करने वालों में कमी आएही।
  • देश में प्रतिस्‍पर्धी डिजिटल व्‍यापार का माध्‍यम रहेगा, पूरी पारदर्शिता से काम हो पाएगा।
  • अंततः किसानों द्वारा लाभकारी मूल्य प्राप्त करना ही उद्देश्य ताकि उनकी आय में सुधार हो सकें।

2. कृषक (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक

बिल में, किसानों के हितों की रक्षा के लिए पर्याप्त व्यवस्था का प्रावधान है। भुगतान सुनिश्चित करने हेतु प्रावधान है कि देय भुगतान राशि के उल्लेख सहित डिलीवरी रसीद उसी दिन किसानों को दी जाएँ। मूल्य के संबंध में व्यापारियों के साथ बातचीत करने के लिए किसानों को सशक्त बनाने हेतु प्रावधान है कि केंद्र सरकार, किसी भी केंद्रीय संगठन के माध्यम से, किसानों की उपज के लिए मूल्य जानकारी और मंडी आसूचना प्रणाली विकसित करेगी।

कोई विवाद होने पर निपटाने के लिए बोर्ड गठित किया जाएगा, जो 30 दिनों के भीतर समाधान करेगा। इस विधेयक का उद्देश्‍य ढुलाई लागत, मंडियों में उत्‍पादों की बिक्री करते समय प्रत्‍यक्ष अथवा अप्रत्‍यक्ष रूप से लिए गए विपणन शुल्‍कों का भार कम करना तथा फसलोपरांत नुकसान को कम करने में मदद करना है। किसानों को उपज की बिक्री करने के लिए पूरी स्‍वतंत्रता रहेगी।

लाभ:

  • रिसर्च एंड डेवलपमेंट (आर एंड डी) समर्थन।
  • उच्च और आधुनिक तकनीकी इनपुट।
  • अन्य स्थानीय एजेंसियों के साथ साझेदारी में मदद।
  • अनुबंधित किसानों को सभी प्रकार के कृषि उपकरणों की सुविधाजनक आपूर्ति।
  • क्रेडिट या नकद पर समय से और गुणवत्ता वाले कृषि आदानों की आपूर्ति।
  • शीघ्र वितरण/प्रत्येक व्यक्तिगत अनुबंधित किसान से परिपक्व उपज की खरीद।
  • अनुबंधित किसान को नियमित और समय पर भुगतान।
  • सही लॉजिस्टिक सिस्टम और वैश्विक विपणन मानकों का रखरखाव।

3.आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक 2020

यह विधेयक 1955 में बनाए गए आवश्यक वस्तु विधेयक के प्रावधानों में बदलाव की व्याख्या करता है। सरकार ने इसके प्रावधानों में अनाज, दलहन, तिलहन, खाद्य तेलों, प्याज और आलू को आवश्यक वस्तु की सूची से हटा दिया है। इसके पीछे तर्क है कि सरकार सामान्य अवस्था में इनके संग्रह करने और वितरण करने पर अपना नियंत्रण नहीं रखेगी। इसके जरिए फूड सप्लाई चेन को आधुनिक बनाया जाएगा साथ ही कीमतों में स्थिरता बनाए रखेगा।

जब सब्जियों की कीमतें दोगुनी हो जाएँगी या खराब न होने वाली फसल की रिटेल कीमत 50% बढ़ जाएगी तो स्टॉक लिमिट लागू होगी। लेकिन युद्ध और आपदा जनित स्थितियों में केंद्र सरकार पुनः नियंत्रण अपने हाथ में ले लेगी।

सरकार का कहना है कि अभी की व्यवस्था में आवश्यक वस्तु अधिनियम के कारण कोल्ड स्टोरेज, गोदामों, प्रोसेसिंग और एक्सपोर्ट में निवेश कम होने की वजह से किसानों को लाभ नहीं मिल पाता है। अगर फसल जल्दी सड़ने वाली है और बंपर पैदावार हुई है तो किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है।

कानूनों का महत्त्व:

  • तीनों कानून देश में अत्यधिक नियंत्रित कृषि बाजारों को खोलेंगे।
  • इन कानूनों से देश के किसान के पास अधिक विकल्प होंगे। किसानों के लिए यह बिल विपणन लागत को कम करेगा। इससे उन्हें बेहतर दाम मिलने में मदद मिलेगी। इसके अलावा उपज को अधिक बढ़ाने के लिए क्षेत्रीय किसानों को मदद होगी और उपभोक्ताओं का भी फायदा होगा।
  • अपनी किसानी और उपज को बेहतर बनाने के लिए किसानों के नई तकनीक को इस्तेमाल करने का भी मौका मिलेगा। इससे मार्केंटिंग की कीमत कम होगी और किसानों की आय में बढ़ौतरी होगी।
  • इन नए कानूनों से बड़ी बड़ी कंपनियाँ, खाद्य उत्पादन फर्म, निर्यातक आदि कृषि सेक्टर में निवेश करेंगें।
  • आवश्यक वस्तु कानून में संशोधन से माना जा रहा है कि किसानों और उपभोक्ताओं दोनों को फायदा होगा और दामों में स्थिरता आएगी।
  • बाजार में प्रतिस्पर्धा का महौल बढ़ेगी और कृषि उपज भी व्यर्थ होने से बचेगा।

गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस समेत कई विपक्षी पार्टियाँ इन कानूनों का विरोध कर रही हैं। मगर, दिलचस्प बात यह है कि यही सारे बदलाव जिन्हें मोदी सरकार हाल में लेकर आई है उन्हें लेकर कॉन्ग्रेस ने साल 2019 के अपने चुनावी मेनिफेस्टों में वादे किए थे।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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