Tuesday, May 17, 2022
Homeराजनीतिगोडसे से सावरकर के थे शारीरिक संबंध: RSS पर कॉन्ग्रेस का नया प्रोपेगेंडा

गोडसे से सावरकर के थे शारीरिक संबंध: RSS पर कॉन्ग्रेस का नया प्रोपेगेंडा

कॉन्ग्रेस द्वारा वितरित पुस्तिका में आरएसएस को "नाजी और फासीवादी" संगठन के रूप में वर्णित किया गया है। साथ ही कहा गया है कि उसने इसकी प्रेरणा हिटलर के नाजीवाद और मुसोलिनी के फासीवाद से ली है।

वामपंथी गिरोह के चंगुल में फँसकर वैचारिक दिवालिएपन की शिकार कॉन्ग्रेस के कैसे दिन आ गए हैं कि अब किसी भी हद तक जाकर झूठ और अफवाह फ़ैलाने में लग गई है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, ताजा मामला मध्य प्रदेश के भोपाल में कॉन्ग्रेस द्वारा चलाए जा रहे अखिल भारतीय कॉन्ग्रेस सेवा दल के प्रशिक्षण शिविर में कथित रूप से ‘वीर सावरकर’ नाम की पुस्तिका का वितरण किया गया है। इस पुस्तिका में बीजेपी पर निशाना साधने के लिए सावरकर को टारगेट करते हुए उनके आसपास की कई घटनाओं, सवालों और विवादों का जिक्र है।

विनायक दामोदर सावरकर और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर कॉन्ग्रेस द्वारा जारी की गई विवादित पुस्तिका में दावा किया गया है, “महात्मा गाँधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे के साथ हिंदू महासभा के सह-संस्थापक का शारीरिक संबंध था।”


साभार -India Today

रिपोर्ट के अनुसार, डोमिनिक लैपिएरे और लैरी कॉलिन्स की किताब ‘फ्रीडम एट मिडनाइट’ में उल्लेखित एक घटना का उल्लेख करते हुए, कॉन्ग्रेस द्वारा जारी बुकलेट में कहा गया है, ” ब्रह्मचर्य धारण करने से पहले, नाथूराम गोडसे के एक ही शारीरिक संबंध का ब्यौरा मिलता है। यह समलैंगिक संबंध था। उनका पार्टनर था उनका राजनैतिक गुरू वीर सावरकर।”

आरएसएस और वीर सावरकर पर कॉन्ग्रेस द्वारा जारी पुस्तिका में कॉन्ग्रेस ने हिंदू महासभा के सह-संस्थापक से संबंधित कुछ सवाल-जवाब में जिन विषयों को चुना है और जिन वाक्यांशों का जिक्र किया है वे आने वाले समय में नए विवादों को जन्म देंगे।

विवादित पुस्तिका में एक सवाल है, “क्या सावरकर ने हिंदुओं को अल्पसंख्यक महिलाओं के बलात्कार के लिए प्रोत्साहित किया?’ और प्रश्न का उत्तर, जैसा कि कॉन्ग्रेस की पुस्तिका में बताया गया है, ‘हाँ’ है।

साभार -India Today

इस पुस्तिका में दावा यह भी है कि सावरकर ने 12 साल की उम्र में एक मस्जिद पर पथराव किया था। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, कॉन्ग्रेस द्वारा वितरित पुस्तिका में आरएसएस को “नाजी और फासीवादी” संगठन के रूप में वर्णित किया गया है। साथ ही बताया गया है कि उसने इसकी प्रेरणा हिटलर के नाजीवाद और मुसोलिनी के फासीवाद से ली है।

कॉन्ग्रेस के इस प्रपंच का कारण भी आप समझ गए होंगे। यह जानबूझकर उस गिरोह को भड़काने की साजिश है जो आज NRC के विरोध के नाम पर सड़क पर है। हिंसा पर अमादा है। यह पुस्तिका भी आरएसएस और सावरकर को बदनाम करने तथा समुदाय विशेष को भड़काने की कॉन्ग्रेस के चिरपरिचित अंदाज का एक हिस्सा है।

BHU में सावरकर की फोटो उखाड़ कर पोती स्याही: वामपंथी छात्र ने कहा- ‘वाह! माँ #% दी’

‘वीर सावरकर थे भारत के महान सपूत’ – पढ़ें वो खत जिसे इंदिरा गाँधी ने खुद लिखा था

गाँधी को गोली मारने से गोडसे की देशभक्ति गायब हो जाती है? समय है इस पर खुली चर्चा का

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

ज्ञानवापी मामले में ‘हिन्दू सेना’ भी पहुँचा सुप्रीम कोर्ट, सुनवाई कर रहे दोनों जजों का ‘राम मंदिर कनेक्शन’: 1991 के एक्ट पर सवाल

ज्ञानवापी केस में सुप्रीम कोर्ट पहुँचे 'हिन्दू सेना' ने कहा कि 'Ancient Monuments' में गिने जाने वाले स्थल 1991 'वर्शिप एक्ट' के तहत नहीं आते।

मथुरा के शाही ईदगाह में साक्ष्य मिटाए जाने की आशंका, मस्जिद को तुरंत सील करने के लिए नई याचिका दायर: ज्ञानवापी का दिया हवाला

ज्ञानवापी विवादित ढाँचे में शिवलिंग मिलने के बाद अब मथुरा के शाही ईदगाह मस्जिद को लेकर नई याचिका दायर हुई है, जिसमें इसे सील करने की माँग की गई।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -

हमसे जुड़ें

295,307FansLike
186,366FollowersFollow
416,000SubscribersSubscribe