Friday, July 30, 2021
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मुंबई पुलिस ने सोशल मीडिया पर संदेशों के खिलाफ जारी किया आदेश: उद्धव सरकार की आलोचना पर भी अंकुश

असल में यह आदेश परोक्ष रूप से उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली महाराष्ट्र सरकार की सभी आलोचनाओं पर भी प्रतिबंध लगाता है, क्योंकि निषेधाज्ञा आदेश में एक खंड कहता है, "सरकारी कार्यकारियों के प्रति अविश्वास और कोविड-19 को नियंत्रित करने के लिए किए गए उनके कार्यों के विरुद्ध टिप्पणी करने वालों" के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

मुंबई पुलिस आयुक्त ने 23 मई 2020 को आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CRPC) की धारा 144 के तहत आदेश जारी किया। यह प्रतिबंधात्मक आदेश 25 मई 2020 को 12:15 बजे से लागू है और 8 जून 2020 तक जारी रहेगा।

यह आदेश लोगों को विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे व्हाट्सएप, ट्विटर, फेसबुक, टिकटॉक, इंस्टाग्राम आदि के माध्यम से किसी भी तरह के ‘ऑनलाइन नफरत’ को प्रसारित करने से रोकता है।

असल में यह आदेश परोक्ष रूप से उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली महाराष्ट्र सरकार की सभी आलोचनाओं पर भी प्रतिबंध लगाता है, क्योंकि निषेधाज्ञा आदेश में एक खंड कहता है, “सरकारी कार्यकारियों के प्रति अविश्वास और कोविड-19 को नियंत्रित करने के लिए किए गए उनके कार्यों के विरुद्ध टिप्पणी करने वालों” के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस उपायुक्त प्रणय अशोक द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि मुंबई पुलिस सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफ़ॉर्म के किसी भी ग्रुप में इस तरह की शेयर किए जाने पर उस ग्रुप के एडमिन को व्यक्तिगत रूप से ज़िम्मेदार ठहराएगी और उनके खिलाफ कार्रवाई करेगी।

मुंबई पुलिस द्वारा 23 मई 2020 को जारी आदेश
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मुंबई पुलिस द्वारा जारी आदेश में चेतावनी दी गई है कि इस आदेश का उल्लंघन करने वाला कोई भी व्यक्ति भारतीय दंड संहिता की धारा 188 के तहत दंडनीय होगा। यह खंड स्पष्ट करता है कि व्हाट्सएप समेत किसी भी सोशल मीडिया पर कोरोना वायरस से निपटने में महाराष्ट्र सरकार की आलोचना करने पर उसे आदेश के तहत जिम्मेदार ठहराया जाएगा और कार्रवाई की जाएगी।

आदेश में कहा गया कि चूँकि यह आदेश व्यक्तिगत रूप से नहीं दिया जा सकता है, इसलिए इसे पूर्व में जारी किया गया था।

ऑपइंडिया ने इसकी पुष्टि करने के लिए पुलिस उपायुक्त से संपर्क किया कि यदि आदेश उस समय से प्रामाणिक था, तो फिर यह आदेश मुंबई पुलिस की वेबसाइट पर अपलोड क्यों नहीं किया गया था। मुंबई पुलिस के प्रवक्ता, डीसीपी प्रणय अशोक ने पुष्टि की कि दिनांक 23 मई का आदेश वास्तव में प्रामाणिक था और यह एक ‘नियमित आदेश’ था, जो पारित हो गया है।

गौरतलब है कि अप्रैल में भी, मुंबई पुलिस ने इसी तरह का आदेश जारी किया था, जिसमें सोशल मीडिया पर चार प्रकार की सामग्रियों के प्रसार पर रोक लगाई गई थी:

  • जो तथ्यात्मक रुप से गलत और विकृत पाया जाए
  • जो किसी विशेष के प्रति अपमानजनक या भेदभावपूर्ण हो
  • जिसके कारण लोगों में घबराहट और भ्रम होता हो
  • जो सरकारी अधिकारियों के खिलाफ अविश्वास या कोरोनावायरस के प्रसार को रोकने के लिए उनके कृत्यों को दिखाता हो

इस संबंध में पुलिस ने 73 मामले दर्ज किए और 23 मार्च से अब तक 39 आरोपितों को गिरफ्तार किया।

यह बेहद ही गंभीर और परेशान करने वाली बात है कि महाराष्ट्र में कोरोना के आँकड़े 50000 के पार हो चुके हैं और देश के कुल मामलों में सबसे बड़ा योगदान महाराष्ट्र का ही है। ऐसी स्थिति में राज्य प्रशासन बजाय ये सोचने की कि किस तरह से कोरोना संक्रमण से निपटा जाए, कैसे इस पर लगाम लगाया जाए, वो अपना सारा प्रयास सोशल मीडिया के दोषियों को दंडित करने में लगा रही है।

विधायक आदित्य ठाकरे के लिए भी, महाराष्ट्र में महामारी का सबसे चिंताजनक पहलू कथित रूप से सोशल मीडिया पर ‘घृणा’ है। NDTV को दिए एक इंटरव्यू में, शिवसेना ने आज ‘ऑनलाइन घृणा’ के बारे में अधिक चिंता व्यक्त की है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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