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‘माँ ने कहा था- रिश्वत मत लेना, गरीबों के लिए काम करना’: सरकार के मुखिया के तौर पर 25वें वर्ष में PM मोदी का प्रवेश, CM से PM बनने तक के सफर को किया याद

2001 में गुजरात का मुख्यमंत्री बनने से लेकर 2014 में प्रधानमंत्री बनने तक के सफर को पीएम मोदी ने याद किया। उन्होंने कहा कि संकटग्रस्त गुजरात इस दौरान कृषि क्षेत्र में अग्रणी बन गया। उन्होंने एक्स पर पोस्ट करने हुए लिखा कि जनसेवा के 25वें साल में प्रवेश हुआ।

पीएम मोदी ने 2001 के शपथग्रहण की तस्वीर पोस्ट करते हुए जनसेवा के 25वें साल में प्रवेश करने पर जनता का आभार जताया है। उन्होंने एक्स पर लिखा, “2001 में आज ही के दिन, मैंने पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। देशवासियों के निरंतर आशीर्वाद से, मैं सरकार के मुखिया के रूप में अपनी सेवा के 25वें वर्ष में प्रवेश कर रहा हूँ।”

2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री बनने के दिनों को याद करते हुए उन्होने ट्वीट किया, “मेरी पार्टी ने मुझे बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में गुजरात के मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी थी। उसी साल राज्य एक भीषण भूकंप से जूझ रहा था। पिछले वर्षों में एक महाचक्रवात, लगातार सूखे और राजनीतिक अस्थिरता देखी गई थी। इन चुनौतियों ने लोगों की सेवा करने और नए जोश और आशा के साथ गुजरात के पुनर्निर्माण के संकल्प को और मज़बूत किया।”

पीएम मोदी ने कहा, “जब मैंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, तो मुझे याद है कि मेरी माँ ने मुझसे कहा था – मुझे तुम्हारे काम की ज़्यादा समझ नहीं है, लेकिन मैं बस दो चीज़ें चाहती हूँ। पहला, तुम हमेशा गरीबों के लिए काम करोगे और दूसरा, तुम कभी रिश्वत नहीं लोगे। मैंने लोगों से यह भी कहा था कि मैं जो भी करूँगा, वो नेक इरादे से करूँगा और कतार में खड़े आखिरी व्यक्ति की सेवा करने के विजन से प्रेरित रहूँगा।”

सूखाग्रस्त गुजरात बना कृषि में अग्रणी राज्य

25 साल तक मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में अपने अनुभवों को साझा करते हुए पीएम मोदी ने कहा है कि हमने मिलकर उल्लेखनीय प्रगति की है। सीएम पद की शपथ वाले दिन को भी उन्होंने याद किया और कहा कि उन्हें आज भी याद है कि जब वे मुख्यमंत्री बने थे, तब ऐसा माना जाता था कि गुजरात अब कभी आगे नहीं बढ़ पाएगा। किसानों समेत आम नागरिक बिजली और पानी की कमी की शिकायत करते थे। कृषि मंदी की चपेट में थी और औद्योगिक विकास ठप था। लेकिन सभी ने मिलकर गुजरात को सुशासन का केंद्र बनाने के लिए काम किया और सफल हुए।

उन्होंने कहा, “सूखाग्रस्त गुजरात, कृषि क्षेत्र में अग्रणी राज्य बन गया। व्यापार की संस्कृति का विस्तार मज़बूत औद्योगिक और विनिर्माण क्षमताओं में हुआ। नियमित कर्फ्यू अब अतीत की बात हो गई। सामाजिक और भौतिक बुनियादी ढाँचे को बढ़ावा मिला। इन परिणामों को प्राप्त करने के लिए लोगों के साथ मिलकर काम करना बेहद संतोषजनक रहा।”

2014 के दिनों को पीएम ने किया याद

गुजरात से निकल कर 2013 में पहली बार जब बीजेपी ने 2014 लोकसभा चुनाव के लिए प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया। उन दिनों को याद करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “देश विश्वास और शासन के संकट से जूझ रहा था। तत्कालीन यूपीए सरकार भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और नीतिगत पंगुता के सबसे बुरे रूप का पर्याय बन चुकी थी। भारत को वैश्विक व्यवस्था में एक कमज़ोर कड़ी के रूप में देखा जा रहा था। लेकिन, भारत की जनता की सूझबूझ ने हमारे गठबंधन को प्रचंड बहुमत दिलाया और यह भी सुनिश्चित किया कि हमारी पार्टी को तीन दशकों के बाद पहली बार पूर्ण बहुमत मिले।”

देश की बागडोर संभालने के 11 साल को लेकर पीएम मोदी ने कहा कि हमने इन वर्षों में कई बदलाव किए और देश को सशक्त बनाया। उन्होंने कहा, “पिछले 11 वर्षों में, हम भारत के लोगों ने मिलकर काम किया है और कई बदलाव हासिल किए हैं। हमारे अभूतपूर्व प्रयासों ने पूरे भारत के लोगों, विशेषकर हमारी नारी शक्ति, युवा शक्ति और मेहनती अन्नदाताओं को सशक्त बनाया है।”

25 करोड़ लोग गरीबी से हुए मुक्त

इन 11 सालों में देश की 25 करोड़ आबादी गरीबी की रेखा से ऊपर आई है। भारत दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में एक बन गया है। भारत उन देशों में शामिल है, जहाँ दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य सेवा और सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ हैं। हमारे किसान तरह-तरह के बदलाव लाकर यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि हमारा राष्ट्र आत्मनिर्भर बने।

उन्होंने कहा, ” हमने व्यापक सुधार किए हैं और सभी क्षेत्रों में भारत को आत्मनिर्भर बनाने की जनभावना है, जो ‘गर्व से कहो, यह स्वदेशी है’ के आह्वान में परिलक्षित होती है।”

जनता की सेवा करते-करते 25वें साल में प्रवेश पर उन्होंने जनता के उनपर विश्वास बनाए रखने के लिए आभार भी जताया। उन्होंने कहा, “मैं एक बार फिर भारत की जनता को उनके निरंतर विश्वास और स्नेह के लिए धन्यवाद देता हूँ। अपने प्रिय राष्ट्र की सेवा करना सर्वोच्च सम्मान है, एक ऐसा कर्तव्य जो मुझे कृतज्ञता और उद्देश्य से भर देता है। हमारे संविधान के मूल्यों को अपना निरंतर मार्गदर्शक मानते हुए, मैं आने वाले समय में विकसित भारत के हमारे सामूहिक स्वप्न को साकार करने के लिए और भी अधिक परिश्रम करूँगा।”

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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