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1947 में ही दे दी गई थी हिस्सेदारी, मामला खत्म हो गया: ओवैसी के बयान पर BJP का पलटवार

“उन्हें सोच समझकर बोलना चाहिए। उनको किसी ने किरायेदार नहीं कहा, लेकिन हिस्सेदारी की भाषा बोलेंगे तो हिस्सेदारी 1947 में दे दी तो मामला ख़त्म हो गया।”

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी के ‘किरायेदार नहीं हिस्सेदार’ वाले बयान की भाजपा ने कड़ी निंदा की है। भाजपा की महाराष्ट्र इकाई के प्रवक्ता माधव भंडारी ने इस बयान पर पलटवार किया है। उन्होंने ओवैसी पर निशाना साधते हुए कहा, “उन्हें सोच समझकर बोलना चाहिए। उनको किसी ने किरायेदार नहीं कहा, लेकिन हिस्सेदारी की भाषा बोलेंगे तो हिस्सेदारी 1947 में दे दी तो मामला ख़त्म हो गया।”

इससे पहले, शनिवार (1 जून) को असदुद्दीन ओवैसी के ‘किरायेदार नहीं हिस्सेदार’ वाले बयान पर  केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नक़वी ने कड़ी प्रतिक्रिया दर्ज करते हुए कहा था, “ये जो सेक्युलरिज्म के लिए सियासी सूरमा हैं, इन्होंने देश के अल्पसंख्यकों, विशेष तौर से मुस्लिमों को किरायेदार बना रखा था, हिस्सेदार नहीं बनाया था। मोदी जी ने देश के 130 करोड़ लोगों को विकास का हिस्सेदार बनाया।”

दरअसल, शुक्रवार (1 जून) को हैदराबाद में मक्का मस्जिद पर लोगों को संबोधित करते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने कहा था,“अगर कोई ये समझ रहा है कि हिन्दुस्तान के वज़ीर-ए-आज़म 300 सीट जीत कर, हिन्दुस्तान पे मनमानी करेंगे, ये नहीं हो सकेगा। वज़ीर-ए-आज़म से हम कहना चाहते हैं, संविधान का हवाला देकर, असदुद्दीन ओवैसी आपसे लड़ेगा, मज़लूमों के इंसाफ़ के लिए लड़ेगा।”

इसके अलावा, ओवैसी ने कहा था कि हिन्दुस्तान को आबाद रखना है, हम हिन्दुस्तान को आबाद रखेंगे। हम यहाँ पर बराबर के शहरी हैं, किरायेदार नहीं हैं हिस्सेदार रहेंंगे।

ख़बर के अनुसार, ओवैसी ने धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर भी कहा था, “भारत का क़ानून, संविधान हमें इजाज़त देता है कि हम अपने धर्म का पालन करें।” उन्होंने कहा, “जब भारत के प्रधानमंत्री मंदिर जा सकते हैं तो हम भी गर्व के साथ मस्जिद जा सकते हैं।” इससे पहले ओवैसी ने बाबा रामदेव के उस बयान की कड़ी निंदा की थी जिसमें उन्होंने कहा था कि देश की आबादी नियंत्रित करने के लिए तीसरे बच्चे पैदा करने वालों से वोट का अधिकार छीन लेना चाहिए। इस बयान की आलोचना करते हुए ओवैसी ने कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी से वोट का अधिकार केवल इसलिए नहीं छीन लेना चाहिए क्योंकि वो अपने माता-पिता की तीसरी संतान हैं।

अपने ट्वीट में ओवैसी ने लिखा था, “लोगों को असंवैधानिक बातें कहने से रोकने के लिए कोई क़ानून नहीं है, लेकिन रामदेव के विचारों पर अनुचित ध्यान क्यों दिया जाता है? वह अपने पेट के साथ कुछ कर सकते हैं या अपने पैरों को घुमा सकते हैं इसका मतलब यह नहीं है कि नरेंद्र मोदी अपना वोट देने का अधिकार सिर्फ़ इसलिए खो दें, क्योंकि वह तीसरी संतान हैं।”


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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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