Homeराजनीतिकोरोना वॉरियर्स के लिए सरकारी नौकरियाँ अब आसान, MBBS से लेकर नर्सिंग वालों की...

कोरोना वॉरियर्स के लिए सरकारी नौकरियाँ अब आसान, MBBS से लेकर नर्सिंग वालों की भी हो सकती है तैनाती

कोविड ड्यूटी करने वाले चिकित्साकर्मियों को सरकारी भर्ती में वरीयता के साथ-साथ वित्तीय प्रोत्साहन भी दिया जाएगा। मेडिकल और नर्सिंग पाठ्यक्रमों के पास-आउट को प्रोत्साहित करने के लिए कई कदम उठाए गए।

देश कोरोना वायरस की दूसरी लहर से जूझ रहा है। अस्पतालों में ऑक्सीजन, बेड और जरूरी दवाओं की कमी ने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। इस स्थिति से निपटने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (2 मई) को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए विशेषज्ञों के साथ ऑक्सीजन और दवाइयों की उपलब्धता की समीक्षा की।

इस दौरान पीएम मोदी ने कोविड-19 महामारी से निपटने के लिए देश में मौजूद मानव संसाधन की स्थिति की समीक्षा की और साथ ही इसे बढ़ाने के तरीकों पर विशेषज्ञों के साथ चर्चा भी की। 

बैठक में छात्रों को प्रोत्साहित करने और कोविड ड्यूटी में शामिल होने के लिए मेडिकल और नर्सिंग पाठ्यक्रमों के पास-आउट को प्रोत्साहित करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। बताया जा रहा है कि मेडिकल की पढ़ाई कर रहे एमबीबीएस के छात्रों को भी कोरोना मरीजों के इलाज के लिए तैनात किया जा सकता है।

इसके अलावा कोविड ड्यूटी करने वाले चिकित्साकर्मियों को सरकारी भर्ती में वरीयता के साथ-साथ वित्तीय प्रोत्साहन भी दिया जाएगा।

मालूम हो कि इससे पहले 16 और 23 अप्रैल को भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में ऑक्सीजन की किल्लत को दूर करने और इसका उत्पादन बढ़ाने को लेकर बैठक की थी। साथ ही अधिकारियों को कोरोना से निपटने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए थे। वहीं, बीते दिनों सेना प्रमुख और वायु सेना प्रमुख ने भी प्रधानमंत्री से मुलाकात कर उन्हें सशस्त्र बलों द्वारा कोविड-19 महामारी के खिलाफ लड़ाई में उठाए गए कदमों से अवगत कराया था।

बता दें कि रविवार (2 मई) को बीते 24 घंटे में कोरोना के 3 लाख से अधिक नए मामले दर्ज किए गए। इससे पहले शनिवार (1 मई) को 4 लाख से अधिक मामले सामने आए थे। यह अब तक एक दिन में आए सबसे अधिक कोरोना मामलों का आँकड़ा है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

Uber, ओला, Rapido… एक ही जगह का किराया बार-बार क्यों बदलता रहता है?, कैसे बचाएँ अपनी जेब के पैसे

ओला, Uber या Rapido जैसी ऐप्स का सिस्टम एक ऐसे एल्गोरिदम से चलता है जिसे सिर्फ मुनाफा और संतुलन समझ आता है। जानें कैसे स्मार्ट यूजर बनें।

सिनेमाई परदे पर यूरोप की सुलगती हकीकत है Citizen Vigilante Movie: समझें- क्यों परेशान हैं दुनिया भर के इस्लामी कट्टरपंथी और लेफ्ट लिबरल?

लिबरल और वामपंथी समीक्षक 'सिटीजन विजिलांते' फिल्म को चाहे कितनी भी कम रेटिंग क्यों न दें, इस फिल्म ने अपना काम कर दिया है।
- विज्ञापन -