Saturday, July 31, 2021
Homeराजनीतिप्रणब मुखर्जी की किताब The Presidential Memoirs में ऐसा क्या है? बेटा चाहता है...

प्रणब मुखर्जी की किताब The Presidential Memoirs में ऐसा क्या है? बेटा चाहता है न छपे, बेटी कह रहीं – छपने दो

इस किताब कॉन्ग्रेस में शायद बेचैनी! हालाँकि प्रणब मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी ने अपने भाई से बेवजह की बाधा उत्पन्न नहीं करने का अनुरोध किया है। संस्मरण को प्रकाशित करने को लेकर भाई-बहन में विरोधाभास की स्थिति हो गई है।

दिवंगत पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के बेटे अभिजीत मुखर्जी ने उनके संस्मरण ‘The Presidential Memoirs’ के प्रकाशन को लेकर आपत्ति जताई है और इस पर कुछ वक्त के लिए रोक लगाने की माँग की है। मंगलवार (दिसंबर 15, 2020) को उन्होंने पब्लिकेशन हाउस को टैग कर एक साथ कई ट्वीट करके इस किताब को पहले पढ़ने का आग्रह किया और फिर ही इसे प्रकाशित किए जाने की माँग की।

हालाँकि प्रणब मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी ने अपने भाई से बेवजह की बाधा उत्पन्न नहीं करने का अनुरोध किया है। संस्मरण को प्रकाशित करने को लेकर भाई-बहन में विरोधाभास की स्थिति हो गई है।

अभिजीत ने कहा कि जारी किए गए अंश ‘मोटिवेटिड’ थे और पूर्व राष्ट्रपति ने इनके लिए मंजूरी नहीं दी होगी। उन्होंने पब्लिकेशन ग्रुप रूपा बुक्स से इस किताब के प्रकाशन को रोकने के लिए कहा है। उन्होंने अपने ट्वीट में माँग की है कि चूँकि वो संस्मरण के लेखक (प्रणब मुखर्जी) के पुत्र हैं, ऐसे में इसे प्रकाशित किए जाने से पहले वो एक बार किताब की सामग्री को देखना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वो चाहते हैं कि किताब को प्रकाशित करने के लिए उनकी लिखित अनुमति ली जाए।

उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, “मैं, ‘The Presidential Memoirs’ के लेखक का पुत्र, आपसे आग्रह करता हूँ कि संस्मरण का प्रकाशन रोक दिया जाए, और उन हिस्सों का भी, जो पहले ही चुनिंदा मीडिया प्लेटफॉर्मों पर मेरी लिखित अनुमति के बिना घूम रहे हैं। चूँकि मेरे पिता अब नहीं रहे हैं, तो मैं उनका पुत्र होने के नाते पुस्तक के प्रकाशन से पहले उसकी फाइनल प्रति की सामग्री को पढ़ना चाहता हूँ, क्योंकि मेरा मानना है कि यदि मेरे पिता जीवित होते, तो उन्होंने भी यही किया होता।”

उन्होंने एक अन्य ट्वीट में लिखा, “इसलिए, उनका पुत्र होने के नाते मैं आपसे मेरी लिखित अनुमति के बिना इसका प्रकाशन तुरंत रोकने का अनुरोध करता हूँ, जब तक मैं इसकी सामग्री को पढ़ न लूँ। इस संदर्भ में मैंने एक विस्तृत पत्र आपको प्रेषित किया है, जो जल्द ही आपको मिल जाएगा।”

वहीं शर्मिष्ठा ने अपने भाई की बात पर आपत्ति जताते हुए कहा, “मैं, ‘The Presidential Memoirs’ के लेखक की पुत्री अपने भाई अभिजीत मुखर्जी से आग्रह करती हूँ कि वो हमारे पिता द्वारा लिखी गई आखिरी किताब के प्रकाशन में बेवजह की बाधा उत्पन्न न करें। उन्होंने बीमार पड़ने से पहले पांडुलिपि को पूरा कर लिया था।”

शर्मिष्ठा ने आगे लिखा, “अंतिम ड्राफ्ट में मेरे पिता के हाथ से लिखे नोट्स और टिप्पणियाँ हैं, जिनका सख्ती से पालन किया गया है। उनके द्वारा व्यक्त किए गए विचार उनके खुद के हैं और किसी को भी किसी सस्ते प्रचार के लिए प्रकाशित होने से रोकने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। यह हमारे दिवंगत पिता के लिए सबसे बड़ा नुकसान होगा।”

साथ ही उन्होंने एक अन्य ट्वीट में यह भी बताया कि किताब का टाइटल ‘The Presidential Years’ है, न कि ‘The Presidential Memoirs’।

बता दें कि प्रणब मुखर्जी के संस्मरणों की यह किताब जनवरी, 2021 में प्रकाशित हो रही है। उनकी किताब के कुछ अंश पिछले हफ्ते जारी किए गए थे, जिसमें सोनिया गाँधी और मनमोहन सिंह की क्षमता पर सवाल उठाए जाने का जिक्र था। इसे लेकर एक बार फिर सोनिया की क्षमता और मनमोहन सिंह के कार्यकाल पर हमले शुरू हो गए थे। हालाँकि, कॉन्ग्रेस ने इन अंशों पर बिना किताब पढ़े कोई टिप्पणी करने से मना कर दिया था, लेकिन अब उनके बेटे अभिजीत मुखर्जी ने किताब को प्रकाशित किए जाने से पहले पढ़ने की माँग की है।

प्रणब मुखर्जी ने अपने संस्मरण में लिखा है, “कॉन्ग्रेस के कुछ सदस्यों की सोच थी कि अगर 2004 में मैं प्रधानमंत्री बना होता तो 2014 में पार्टी को जो पराजय देखनी पड़ी, उसे टाला जा सकता था। यद्यपि मैं इस सोच से इत्तेफाक नहीं रखता। लेकिन, मैं ये ज़रूर मानता हूँ कि 2012 में मेरे राष्ट्रपति बनने के बाद कॉन्ग्रेस पार्टी के आलाकमान ने राजनीतिक फोकस खो दिया।” 

भारत रत्न प्रणब मुखर्जी ने 2018 में संघ के एक कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की थी। ‘संघ शिक्षा वर्ग-तृतीय’ नामक यह कार्यक्रम 7 जून 2018 को नागपुर के संघ मुख्यालय में हुआ था। प्रणब मुखर्जी के इस फैसले ने कॉन्ग्रेस को भी असहज कर दिया था। इसको लेकर कॉन्ग्रेस से मतभेद भी हुआ, लेकिन उस दिन देश के प्राचीन इतिहास से लेकर उसकी संस्कृति तक प्रणब मुखर्जी ने जो कुछ कहा, वह बीते कल में भी प्रासंगिक था और आने वाले कल में भी प्रासंगिक रहेगा।  

बता दें कि जब पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को देश के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार भारत रत्न से सम्मानित किया गया तो इस मोके पर गाँधी परिवार से किसी सदस्य ने हिस्सा नहीं लिया। इस दौरान कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी और यूपीए की चेयरपर्सन सोनिया गाँधी दिखाई नहीं दिए। राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी के अलावा पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी इस समारोह में नहीं दिखाई दिए। वहीं राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह मौजूद थे। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने प्रणब मुखर्जी को भारत के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से सम्मानित किया।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

ये नंगे, इनके हाथ अपराध में सने, फिर भी शर्म इन्हें आती नहीं… क्योंकि ये है बॉलीवुड

राज कुंद्रा या गहना वशिष्ठ तो बस नाम हैं। यहाँ किसिम किसिम के अपराध हैं। हिंदूफोबिया है। खुद के गुनाहों पर अजीब चुप्पी है।

‘द प्रिंट’ ने डाला वामपंथी सरकार की नाकामी पर पर्दा: यूपी-बिहार की तुलना में केरल-महाराष्ट्र को साबित किया कोविड प्रबंधन का ‘सुपर हीरो’

जॉन का दावा है कि केरल और महाराष्ट्र पर इसलिए सवाल उठाए जाते हैं, क्योंकि वे कोविड-19 मामलों का बेहतर तरीके से पता लगा रहे हैं।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

295,307FansLike
112,277FollowersFollow
394,000SubscribersSubscribe