Friday, October 2, 2020
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2005 में सोनिया ने सुनील दत्त की नहीं सुनी, मौत के 14 साल बाद उनका कहा ही सत्य है

जब शोर-शराबे के साथ निरुपम कॉन्ग्रेस में लाए गए थे तब सुनील दत्त केंद्र में मंत्री हुआ करते थे। वे निरुपम को ही हराकर लोकसभा पहुॅंचे थे। पर कॉन्ग्रेस नेतृत्व ने उनकी नहीं सुनी। निरुपम के पार्टी में आने के महीने भर के भीतर ही उनका निधन हो गया।

  • शस्त्र पूजा को आप तमाशा नहीं कह सकते। हमारे देश में इसकी पुरानी परंपरा रही है। दिक्कत यह है कि खड़गे जी नास्तिक हैं। लेकिन कॉन्ग्रेस में हर कोई नास्तिक नहीं।
  • सोनिया गाँधी के साथ जुड़े कुछ बड़े नेता साजिश रच रहे हैं। राहुल गाँधी के खिलाफ साजिश रची जा रही है। जो लोग राहुल गाँधी के साथ जुड़े हैं, उन्हें साजिश रचकर पार्टी में अलग-थलग किया जा रहा है।

मुंबई कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष रहे संजय निरुपम के ये हालिया बयान हैं। निरुपम उन कॉन्ग्रेस नेताओं में से हैं जिन्होंने सोनिया के दोबारा पार्टी की कमान संभालने के बाद से बगावती तेवर अपना रखे हैं।

निरुपम को कॉन्ग्रेस ने बड़े शोर-शराबे के साथ 25 अप्रैल 2005 में पार्टी में शामिल किया था। शिवसेना के मुखपत्र ‘दोपहर का सामना’ का संपादक रहा यह नेता पार्टी को उस वक्त इतना अजीज था कि सोनिया गॉंधी के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस ने सुनील दत्त की भी नहीं सुनी थी। चार बार लोकसभा के सांसद रहे अभिनेता सुनील दत्त उस वक़्त कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए वन सरकार में मंत्री थे। वे 2004 के आम चुनावों में निरुपम को पटखनी देकर ही लोकसभा में पहुॅंचे थे। उस चुनाव में निरुपम शिवसेना की तरफ से मैदान में थे।

सुनील दत्त ने 2004 में निरुपम के खिलाफ मानहानि का मुकदमा भी किया था। सो, जब उन्हें निरुपम को कॉन्ग्रेस में लाने की कोशिशों का पता चला तो उन्होंने इस पर एतराज जताया। लेकिन, उनकी सुनी नहीं गई। निरुपम के कॉन्ग्रेस में आने के महीने भर के भीतर 25 मई 2005 को सुनील दत्त का देहांत हो गया। उस समय की मीडिया रिपोर्टों में बताया गया था कि निरुपम के पार्टी में आने से वे बेहद आहत थे।

हालॉंकि बाद में उनकी बेटी प्रिया दत्त कॉन्ग्रेस की सांसद भी रहीं और आज भी पार्टी में सक्रिय हैं। लेकिन, जानकार बताते हैं कि निरुपम के कॉन्ग्रेस में आने के बाद से दत्त और गॉंधी परिवार के रिश्तों में वैसी गर्मजोशी नहीं रही थी, जैसे पहले कभी हुआ करती थी। 2009 में सुनील दत्त के बेटे संजय दत्त जब सपा के महासचिव बने तो उन्होंने इस विवाद पर खुलकर बोला था। संजय दत्त ने कहा था, “लोग दत्त साहब का काफी सम्मान करते हैं लेकिन उनके पिता ने भी कॉन्ग्रेस में काफी कुछ देखा। दत्त साहब संजय निरुपम को कॉन्ग्रेस में शामिल करने से खुश नहीं थे।” उन्होंने कहा था, ” मेरे पिता कॉन्ग्रेस के कारण मर गए। कॉन्ग्रेस ने उनकी नहीं सुनी और संजय निरुपम को पार्टी में शामिल कर लिया। जिस आदमी ने शिवसेना में रहते उन पर आरोप लगाए, उनको गाली दी उसे पार्टी में शामिल कर लिया गया। इसकी वजह से ही उनकी मौत हुई।”

समय के फेर देखिए। जब सुनील दत्त को अनसुना कर संजय निरुपम को कॉन्ग्रेस में लाया गया तब सोनिया गॉंधी पार्टी की अध्यक्ष हुआ करती थीं। सुनील दत्त के जाने के 14 साल बाद जब वही निरुपम पार्टी को आँखें दिखा रहे हैं तो सोनिया ही पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष हैं!

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अजीत झा
देसिल बयना सब जन मिट्ठा

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