मुस्लिम महिला ‘पक्षकार’ ने मुस्लिम नेता के ‘अंडरवियर कमेंट’ को ‘ढकने’ की कोशिश की, नाम है…

इतनी घटिया स्तर की महिला विरोधी बात राजनीतिक मंच से कह दी गई और आरफा उसका बचाव करने आ गई! खैर, वामपंथी प्रोपेगेंडा वेबसाइट 'द वायर' से जुड़े पत्रकारों के लिए इस तरह की ढोंग और बनावटीपन का सामने आना कोई बड़ी बात नहीं है।

एक विवादास्पद ‘पत्रकार’ हैं आरफा खानम शेरवानी। यह अक्सर ‘द वायर’ के कर्मचारियों की तरह ही फर्जी समाचारों और प्रोपेगेंडा को शेयर करने के लिए जानी जाती हैं। अब यह समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता आजम खान के बचाव में आ गई हैं। आजम खान ने अभिनेत्री से नेता बनीं जया प्रदा के खिलाफ अपमानजनक सेक्सिस्ट टिप्पणियाँ की थीं, जिसका बचाव करने के लिए आरफा खानम शेरवानी जमाने के सामने आ गईं। नाम और पहनावे से आरफा एक महिला हैं लेकिन न जाने क्या मजबूरी रही कि ‘अंडरवियर कमेंट’ का बचाव करके उन्होंने अपने ‘मर्दवादी-मनुवादी-ब्राह्मणवादी’ चेहरे को दुनिया के सामने रख दिया।

दरअसल, आजम खान के द्वारा किए गए महिला विरोधी बयान की वजह से महागठबंधन को किसी तरह का कोई राजनीतिक नुकसान ना हो, इसलिए आरफा खानम शेरवानी आजम खान के समर्थन में आ गई। उन्होंने दावा किया कि आजम खान ने जो बयान दिया था, वो जया प्रदा के लिए नहीं, बल्कि पूर्व सपा नेता अमर सिंह के खिलाफ था। लेकिन प’क्ष’कार आरफा को यह मालूम होना चाहिए कि अमर सिंह का रामपुर लोकसभा क्षेत्र से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं है।

आरफा ने अपने ट्ववीट में दावा किया कि आजम खान द्वारा दिया गया भद्दा बयान रामपुर की भाजपा उम्मीदवार जया प्रदा के खिलाफ नहीं था, यह अमर सिंह द्वारा चलाया गया ‘प्रोपेगेंडा वॉर’ था। हालाँकि आरफा ने जल्द ही अपने ट्वीट को डिलीट कर दिया क्योंकि इससे उसका ढोंग और बनावटीपन जाहिर हो रहा था।

आरफा खानम शेरवानी द्वारा डिलीट कर दी गई ट्वीट
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समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता और रामपुर निर्वाचन क्षेत्र के विधायक आज़म खान ने रामपुर से भाजपा के लोकसभा उम्मीदवार जया प्रदा के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करके अपनी रही सही इज्जत को और भी गिरा लिया। आजम खान ने अपने भाषण में जया प्रदा के खिलाफ बेहद अपमानजनक बयानों का इस्तेमाल करते हुए दावा किया कि उनके अंडरवियर का रंग खाकी था।

गौरतलब है कि आजम खान ने रामपुर में लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि उन लोगों ने 17 सालों में उनको (जया प्रदा) को नहीं पहचाना, जबकि उन्होंने केवल 17 दिन में उनकी वास्तविकता को पहचान लिया। उन्होंने कहा, “उसकी असलियत समझने में आपको 17 साल लग गए। मैं तो 17 दिन में ही पहचान गया कि इनके नीचे का जो अंडरवियर है, वो भी खाकी रंग का है। यह टिप्पणी करते हुए आजम खान ये दिखाने की कोशिश कर रहे थे कि जया प्रदा के संबंध आरएसएस से थे और जया ने जो उनके खिलाफ आरोप लगाए थे, वो भी आरएसएस की साजिश थी। आजम ने जब यह शर्मनाक टिप्पणी की थी, उस समय सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी मंच पर मौजूद थे।

ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि आजम खान ने जया प्रदा के खिलाफ इस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया है। आजम खान और उनकी पार्टियों ने पहले भी जया प्रदा के खिलाफ अपमानजनक बयानबाजी और सेक्सिस्ट बयानों का इस्तेमाल किया है। जया प्रदा ने यह भी आरोप लगाया है कि आजम खान ने पिछले दिनों उन पर एसिड हमले का प्रयास किया था और साथ ही उन्हें परेशान और बदनाम करने के लिए उनकी भद्दी तस्वीरों को भी फैलाया था।

इतनी घटिया स्तर की महिला विरोधी बात राजनीतिक मंच से कह दी गई और आरफा उसका बचाव करने आ गई! खैर, वामपंथी प्रोपेगेंडा वेबसाइट ‘द वायर’ से जुड़े पत्रकारों के लिए इस तरह की ढोंग और बनावटीपन का सामने आना कोई बड़ी बात नहीं है। द वायर को काफी लंबे समय से आधे सच और पूरे झूठ के लिए जाना जाता है। ये इस वेबसाइट की आदत बन चुकी है। द वायर, जिस पर मानहानि का मुकदमा चल रहा है, अक्सर हुर्रियत प्रेस के बयानों की तरह पढ़ने वाले आर्टिकल प्रकाशित करता है। द वायर को हाल ही में सीबीईसी द्वारा फेक न्यूज़ फैलाने के लिए लताड़ लगाई गई थी।


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