पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) ने 2026 के राज्यसभा चुनावों के लिए अपने चार उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। इन नामों में पूर्व DGP राजीव कुमार, राज्य मंत्री बाबुल सुप्रियो, सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी और अभिनेत्री कोएल मलिक शामिल हैं। राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों के चयन को लेकर ममता बनर्जी पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं।
We are pleased to announce the candidature of Babul Supriyo, Rajeev Kumar (Former DGP, West Bengal), Menaka Guruswamy and Koel Mallick for the upcoming Rajya Sabha elections.
— All India Trinamool Congress (@AITCofficial) February 27, 2026
We extend our heartfelt congratulations and best wishes to them. May they continue to uphold Trinamool’s…
यह घोषणा ऐसे समय पर हुई है, जब देश के 10 राज्यों में राज्यसभा की 37 सीटों के लिए चुनाव होने जा रहे हैं और पश्चिम बंगाल से पाँच सीटें खाली हो रही हैं। इन सीटों पर 16 मार्च 2026 को मतदान होगा और उसी दिन शाम को परिणाम घोषित किए जाएँगे। इन नामों की घोषणा ने बंगाल की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।
खासकर पूर्व DGP राजीव कुमार और वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी को लेकर राजनीतिक, प्रशासनिक और सामाजिक स्तर पर व्यापक चर्चा हो रही है। यह सिर्फ उम्मीदवारों की सूची नहीं बल्कि प्रशासन, कानून, संस्कृति और राजनीति के अलग-अलग क्षेत्रों से चेहरों को संसद भेजने की रणनीति भी मानी जा रही है।
राजीव कुमार: प्रशासन से संसद तक का विवादों भरा सफर
राजीव कुमार का नाम इस पूरी सूची में सबसे अधिक चर्चा का केंद्र है। वे 1989 बैच के IPS अधिकारी रहे हैं और 31 जनवरी 2026 को पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (DGP) पद से सेवानिवृत्त हुए। अपने लंबे करियर में उन्होंने कोलकाता पुलिस कमिश्नर, STF प्रमुख और DGP जैसे अहम पदों पर काम किया।
राजीव कुमार कई बड़े विवादों के केंद्र में भी रहे। 2013 में सामने आए शारदा चिटफंड घोटाले के दौरान वे STF प्रमुख थे और शुरुआती जाँच की जिम्मेदारी उनके पास थी। बाद में यह मामला सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर CBI को सौंप दिया गया। 2019 में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले CBI की टीम उनसे पूछताछ के लिए उनके कोलकाता स्थित आवास पर पहुँची थी।

उस दौरान राज्य पुलिस और CBI के बीच टकराव हुआ, जिसने देशभर में राजनीतिक हलचल पैदा कर दी। इसी घटनाक्रम के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता के धरनास्थल पर कई दिनों तक प्रदर्शन किया था। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचा, जहाँ राजीव कुमार की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए उन्हें जाँच में सहयोग करने का निर्देश दिया गया। इस दौरान TMC में यह माना गया कि राजीव कुमार सरकार और मुख्यमंत्री के लिए एक ढाल साबित हुए हैं।
इसके बाद उनसे शिलॉन्ग में कई दिनों तक पूछताछ की गई। इसके अलावा 2019 के आम चुनाव के दौरान चुनाव आयोग ने उन्हें कोलकाता पुलिस कमिश्नर के पद से हटा दिया था ताकि निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित किए जा सकें। बाद के वर्षों में भी उनका नाम कई संवेदनशील मामलों से जुड़ा रहा, जिनमें कानून-व्यवस्था से जुड़े बड़े संकट और राजनीतिक रूप से संवेदनशील जाँचें शामिल थीं। विपक्षी दल इसे राजनीतिक इनाम और प्रशासन के राजनीतिकरण के तौर पर देख रहे हैं।
बाबुल सुप्रियो: भाजपा से TMC तक की राजनीतिक यात्रा
बाबुल सुप्रियो का राजनीतिक सफर कई मोड़ों से होकर गुजरा है। वे 2014 और 2019 में भाजपा के टिकट पर आसनसोल से लोकसभा सांसद चुने गए थे और नरेंद्र मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री भी रहे। उन्होंने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय तथा भारी उद्योग मंत्रालय में राज्य मंत्री के रूप में काम किया।

2021 में अचानक उन्होंने भाजपा छोड़कर तृणमूल कॉन्ग्रेस का दामन थाम लिया, जिसे उस समय बंगाल की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम माना गया। इसके बाद वे बल्लीगंज विधानसभा उपचुनाव जीतकर विधायक बने और ममता सरकार में मंत्री बनाए गए।
उनका राज्यसभा के लिए चयन कई राजनीतिक संकेत देता है। एक ओर यह दिल्ली की राजनीति में उनकी वापसी मानी जा रही है, वहीं दूसरी ओर यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या उन्हें विधानसभा की सक्रिय राजनीति से हटाकर उच्च सदन में भेजने की रणनीति अपनाई गई है।
बाबुल सुप्रियो एक गायक और कलाकार के रूप में भी जाने जाते हैं और उनका जनसंपर्क काफी व्यापक रहा है। लेकिन उनके राजनीतिक रुख में आए बदलाव और अलग-अलग दलों में उनकी भूमिका को लेकर लगातार बहस होती रही है। राज्यसभा में उनकी भूमिका किस दिशा में जाएगी, इस पर सबकी निगाहें टिकी रहेंगी।
मेनका गुरुस्वामी: LGBTQ अधिकारों की मुखर समर्थक
मेनका गुरुस्वामी सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता हैं। उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी, हार्वर्ड लॉ स्कूल और नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया से शिक्षा प्राप्त की है। मेनका गुरुस्वामी LGBTQ अधिकारों की मुखर समर्थक रही हैं और अपनी पार्टनर अरुंधति काटजू के साथ सार्वजनिक रूप से अपने रिश्ते को स्वीकार कर चुकी हैं। यूँ भी उनकी छवि विवादित रही है।

भाजपा नेता अमित मालवीय ने एक्स पर लिखा, “ममता बनर्जी ने गैर-बंगाली मेनका गुरुस्वामी को राज्यसभा सीट देकर इनाम दिया है। नजारा हैरान करने वाला है। वह उस समय के कोलकाता पुलिस कमिश्नर विनीत गोयल की तरफ से एक ऐसे मामले में पेश हुई थीं जिसने बंगाल की अंतरात्मा को हिलाकर रख दिया था, वह था आरजी कर मेडिकल कॉलेज रेप और मर्डर केस।”
Mamata Banerjee has rewarded Menaka Guruswamy, a non-Bengali, with a Rajya Sabha seat. The optics are striking. She had appeared for Vineet Goyal, the then Kolkata Commissioner of Police, in a matter that has shaken Bengal’s conscience, the RG Kar Medical College rape and murder… https://t.co/UeOf187O5L
— Amit Malviya (@amitmalviya) February 28, 2026
उन्होंने आगे लिखा, “जाँच कैसे की गई, इस पर गंभीर सवाल उठाए गए। पीड़ित की पहचान उजागर होने से गुस्सा फैल गया। विरोध कर रहे जूनियर डॉक्टरों और मेडिकल बिरादरी के बड़े हिस्से ने जवाबदेही और पारदर्शिता की माँग की। सिस्टम पर से भरोसा बहुत हिल गया था।”
राज्यसभा के लिए उनका चयन इसलिए भी बड़ा माना जा रहा है क्योंकि वे संसद पहुँचने वाली पहली खुले तौर पर LGBTQ पहचान रखने वाली सदस्य बन सकती हैं।
कोएल मलिक: सिनेमा से संसद तक का सफर
कोएल मलिक बंगाली फिल्म इंडस्ट्री की जानी-मानी अभिनेत्री हैं और दिग्गज अभिनेता रंजीत मलिक की बेटी हैं। उन्होंने कई हिट फिल्मों में काम किया है और बंगाल में उनकी लोकप्रियता काफी व्यापक है। उनकी पहचान एक सफल अभिनेत्री के रूप में रही है, खासकर ‘मितिन माशी’ जैसे किरदारों से उन्होंने अलग पहचान बनाई।

राजनीति में उनका यह प्रवेश पहली बार है और इसे TMC की उस रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें पार्टी फिल्म और सांस्कृतिक जगत से जुड़े चर्चित चेहरों को संसद भेजती रही है। इस कदम से पार्टी को युवा और शहरी मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की उम्मीद हो सकती है।
हालाँकि यह भी सवाल उठता है कि क्या लोकप्रियता और पहचान के आधार पर संसद में प्रतिनिधित्व देना लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करता है या यह केवल प्रतीकात्मक राजनीति बनकर रह जाता है।
भाजपा ने लगाए ढाल बनने के बदले इनाम देने के आरोप
TMC की इस सूची को लेकर भाजपा ने आरोप लगाए हैं कि पार्टी प्रशासनिक अधिकारियों और सार्वजनिक हस्तियों को राजनीतिक इनाम दे रही है, जिससे संस्थागत निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं। बंगाल बीजेपी ने एक्स पर लिखा, “TMC के 50% उम्मीदवार गैर-बंगाली हैं। क्या ममता को बंगाली नहीं मिले? या वे उन लोगों को इनाम दे रही हैं जो उनके काले राज के गवाह हैं? यह उनकी प्रो-बंगाल छवि का पर्दाफाश है।”
Trinamool Congress couldn’t find a single political leader from within its own ranks?
— BJP West Bengal (@BJP4Bengal) February 28, 2026
Not one dedicated party worker for four Rajya Sabha seats?
Instead, nominations go to an actress, a singer (formerly with the BJP), a former police officer, and a lawyer — individuals who were… pic.twitter.com/rUDGGnVvHF
राजीव कुमार और मेनका गुरुस्वामी को लेकर सबसे ज्यादा आलोचना सामने आई है। इसे प्रशासन के राजनीतिकरण और नौकरशाही को राजनीतिक लाभ देने के उदाहरण के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं, मेनका गुरुस्वामी के चयन को सामाजिक समावेशन के साथ-साथ राजनीतिक प्रतीकवाद का कदम माना जा रहा है।
देशभर में 10 राज्यों की 37 सीटों के लिए चुनाव हो रहे हैं। इनमें महाराष्ट्र, ओडिशा, तमिलनाडु, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और तेलंगाना भी शामिल हैं। चुनाव आयोग ने 26 फरवरी 2026 को नोटिफिकेशन जारी किया, 5 मार्च तक नामांकन, 6 मार्च को स्क्रूटनी, 9 मार्च तक नाम वापसी और 16 मार्च को मतदान की प्रक्रिया तय की है। राज्यसभा चुनाव आमतौर पर कम चर्चा में रहते हैं लेकिन इस बार बंगाल में उम्मीदवारों की सूची और राजनीतिक पृष्ठभूमि के चलते इन चुनावों पर राष्ट्रीय स्तर पर नजर बनी हुई है।


