Wednesday, August 4, 2021
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बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले टीएमसी में घमासान, अब विधायक शीलभद्र दत्ता ने छोड़ी पार्टी

24 परगना जिले के बैरकपुर से विधायक शीलभद्र दत्ता पहले कई बार प्रशांत किशोर को लेकर असहमति दर्ज करा चुके हैं। उनका कहना था कि पीके की कार्यप्रणाली मार्केटिंग कंपनी जैसी है और इस तरह के वातावरण में काम करना बेहद मुश्किल है। उनके मुताबिक़ यह न तो संगठन के लिए बेहतर है और न ही जनता पर पड़ने वाले पार्टी के प्रभाव के लिए।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी) का भीतरी घमासान चरम पर है। इसी कड़ी में आज (18 दिसंबर 2020) पार्टी को एक और बड़ा झटका लगा। टीएमसी के एक और विधायक शीलभद्र दत्ता ने पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया। शीलभद्र दत्ता 24 परगना जिले के बैरकपुर क्षेत्र से विधायक हैं। शीलभद्र दत्ता ने अपना इस्तीफ़ा पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी को सौंपा है।  

टीएमसी के लिए पिछले कुछ ही दिनों में यह लगातार तीसरा बड़ा झटका है। इसके पहले पश्चिम बंगाल की सरकार में परिवहन मंत्री रहे टीएमसी के दिग्गज नेता शुभेंदु अधिकारी ने भी विधायक पद से इस्तीफ़ा दिया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ वह जल्द ही भाजपा में शामिल हो सकते हैं। यह आगामी पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव को मद्देनज़र रखते हुए ममता बनर्जी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। 

गौरतलब है कि 24 परगना जिले के बैरकपुर से विधायक शीलभद्र दत्ता पहले कई बार प्रशांत किशोर को लेकर असहमति दर्ज करा चुके हैं। उनका कहना था कि पीके की कार्यप्रणाली मार्केटिंग कंपनी जैसी है और इस तरह के वातावरण में काम करना बेहद मुश्किल है। उनके मुताबिक़ यह न तो संगठन के लिए बेहतर है और न ही जनता पर पड़ने वाले पार्टी के प्रभाव के लिए। 

शीलभद्र दत्ता ने यह भी कहा, “मैं वर्तमान परिदृश्य के हिसाब से खुद को पार्टी में अनफिट पाता हूँ। लेकिन मैं विधायक पद से इस्तीफ़ा नहीं दूँगा, विधायक पद से इस्तीफ़ा क्यों दूँ? मैंने लोगों का वोट जीता है अगर मैं चला जाता हूँ (इस्तीफ़ा दे देता हूँ) तो वह कहाँ जाएँगे।” दत्ता पार्टी के आंतरिक नेतृत्व में मौजूद अव्यवस्थाओं को लेकर भी शुरू से मुखर रहे हैं।

पश्चिम बंगाल की ममता सरकार में इस्तीफ़ों की सूची महज़ यहीं ख़त्म नहीं होती है। पश्चिम बंगाल के पांडवेश्वर से तृणमूल कॉन्ग्रेस के विधायक जितेंद्र तिवारी ने गुरुवार (दिसंबर 17, 2020) को आसनसोल नगर निगम के बोर्ड ऑफ एडमिनिस्ट्रेटर के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया था। ऐसे कयास लग रहे हैं कि वे 19 दिसंबर को बीजेपी में शामिल हो सकते हैं। इससे पहले तिवारी ने राज्य की ममता सरकार को चेताते हुए आरोप लगाया था कि विकास के लिए आसनसोल को मिले पैसे राजनीति की वजह से रोके जा रहे हैं। 

टीएमसी के अहम नेताओं के इस्तीफ़े से स्पष्ट है कि आगामी विधानसभा चुनावों में ममता सरकार की परेशानियाँ बढ़ सकती हैं। इसी कड़ी में ममता बनर्जी ने पार्टी के भीतर मचे सियासी घमासान को लेकर आज (18 दिसंबर 2020) पार्टी नेताओं की आपात बैठक बुलाई है। इसी बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शनिवार (19 दिसंबर 2020) को पश्चिम बंगाल दौरे पर पहुँच रहे हैं। यह दौरा प्रदेश में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों को मद्देनज़र रखते हुए बेहद अहम माना जा रहा है।     

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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