Friday, April 16, 2021
Home राजनीति कभी वामपंथी गुंडों की पिटाई के बाद व्हीलचेयर पर संसद लाई गईं ममता बनर्जी...

कभी वामपंथी गुंडों की पिटाई के बाद व्हीलचेयर पर संसद लाई गईं ममता बनर्जी काँप रहीं थी, आज कर रहीं- चड्डा, नड्डा, फड्डा…

"मुझे वो दृश्य जस का तस याद है। मेरी आँखों में वो दृश्य बसा हुआ है। मैं राज्यसभा की दीर्घा में बैठी हुई थी। इसी सदन में नरसिंह राव की सरकार के ख़िलाफ़ अविश्वास पर मतदान हो रहा था। एक व्हीलचेयर के ऊपर ममता बनर्जी को लाया गया। यहीं बैठी हुई थीं वो। चोटों से आए बुखार के कारण काँप रहीं थीं।"

पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा का लंबा इतिहास रहा है। हिंसा के लिए कुख्यात वामपंथी दलों ने इस ‘संस्कृति’ को पाला-पोसा और अब राज्य की सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) इसे बढ़ावा दे रही है। अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले TMC के गुंडों पर लगातार बीजेपी कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने के आरोप लग रहे हैं। गुरुवार (10 दिसंबर 2020) को बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा के काफिले पर हमला हुआ। इसके अगले दिन ABVP के जुलूस को निशाना बनाया गया।  

हाल ही में नड्डा ने बताया था कि तृणमूल कॉन्ग्रेस की राजनीतिक हिंसा के कारण भाजपा के 130 कार्यकर्ता अपनी जान गँवा चुके हैं, जिनमें से 100 कार्यकर्ताओं का तर्पण उन्होंने स्वयं किया है।

बावजूद इन सबके, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी राजनीतिक हिंसा को लेकर गंभीर नहीं दिखतीं। उलटा उन्होंने राज्य के डीजीपी और मुख्य सचिव को नहीं भेजने की बात कह केंद्र से टकराव का रास्ता अख्तियार कर लिया है। नड्डा के काफिले पर हमले के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दोनों शीर्ष अधिकारियों को तलब किया था

वैसे केंद्र से टकराव लेना, संघीय ढॉंचे को चुनौती देना ममता के लिए नई बात नहीं है। सत्ता में आने के बाद से ही वह लगातार ऐसा करती रही हैं। लेकिन राजनीतिक हिंसा की तो वह किसी दौर में खुद पीड़ित रह चुकी हैं। लोकसभा में एक भाषण के दौरान दिवंगत सुषमा स्वराज ने भी उनके साथ वामपंथी गुंडों के द्वारा की गई हिंसा का जिक्र किया था।

ममता बनर्जी पर दिया गया बयान वीडियो के 17 मिनट से लेकर 18 मिनट 30 सेकंड के स्लॉट पर सुना जा सकता है।

सुषमा स्वराज ने 1996 में संयुक्त मोर्चा सरकार की विश्वास प्रस्ताव पर बहस के दौरान कहा था:

“मुझे वो दृश्य जस का तस याद है। मेरी आखों में वो दृश्य बसा हुआ है। मैं राज्यसभा की दीर्घा में बैठी हुई थी। इसी सदन में नरसिंह राव की सरकार के ख़िलाफ़ अविश्वास पर मतदान हो रहा था। एक व्हीलचेयर के ऊपर ममता बनर्जी को लाया गया। यहीं बैठी हुई थीं वो। चोटों से आए बुखार के कारण काँप रहीं थीं। बराबर में बैठी दो सांसद महिलाओं ने उन्हें लाल कंबल ओढ़ाया था। वहाँ बैठी हुई मैं कम्युनिस्टों की हिंसक प्रवृत्ति को कोस रही थी। मुझे मालूम है कि ममता बनर्जी के विरोध के स्वर मुखर होते हैं। लेकिन हम उनके विरोध के अधिकार को मान्यता देते हैं। हम उनके विरोध के अधिकार को स्वीकृति देते हैं। आप उनकी आवाज को कैद करने के लिए उन पर हमला नहीं करते, इसलिए पूछना चाहती हूँ आज कि इस सदन में बैठ कर सीपीएम के साथ बैठकर मतदान करेंगी और पश्चिम बंगाल में उनकी विरोध की राजनीति करेंगी। यह कैसी साँझ है, यह कैसा गठबंधन है।”

राजनीतिक हिंसा की शिकार हो चुकी ममता आज उसी सीपीएम के स्थान पर जब खुद बंगाल पर विराजमान हैं तो उनसे इस घटना पर दो शब्द नहीं निकल रहे। वह हमले की निंदा करने की बजाय उसी पार्टी पर इल्जाम मढ़ रही हैं जिसके नेताओं पर पत्थरबाजी हुई। उनकी असंवेदनशीलता देख भाजपा नेता समेत सब हैरान हैं कि वो एक हमले को नेताओं की नौटंकी बता रही हैं। उनके शब्द पढ़िए:

“उनके (बीजेपी) पास कोई और काम नहीं है। अकसर गृह मंत्री यहाँ होते हैं, बाकी समय उनके चड्डा, नड्डा, फड्डा, भड्डा यहाँ होते हैं। जब उनके पास कोई दर्शक नहीं होता है, तो वे अपने कार्यकर्ताओं को नौटंकी करने के लिए कहते हैं।”

याद दिला दें कि ये पहली दफा नहीं है जब ममता बनर्जी हिंसा का या किसी आरोपित का बचाव कर रही हैं। इससे पहले शारदा चिट फंड घोटाले में फँसे पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार के लिए ममता बनर्जी ने सड़क पर उतर कर रेल रोको प्रदर्शन कर दिया था।

इसके अलावा CAA/NRC के खिलाफ़ भी ममता ने केंद्र के ख़िलाफ़ अपना जहर उगला था। हाल में जब बंगाल में तूफान आया तब भी केंद्र को नेगेटिव दिखाने के लिए उन्होंने मीडिया में झूठ कह दिया था। कोरोना महामारी के बीच भी उनका रवैया केंद्र सरकार की ओर आक्रमक था। 

कुल मिलाकर हर स्थिति में ममता बनर्जी की राजनीति फिलहाल इसी जमीन पर टिकी है कि वह राज्य के हित में काम करने की बजाय केंद्र सरकार का विरोध करें और प्रदेश में बढ़ रही राजनीतिक हिंसा को नदरअंदाज करती रहें।

आज उनके इसी बर्ताव पर प्रदेश राज्यपाल ने साफ तौर पर कह दिया है कि ममता बनर्जी को संविधान का पालन करना होगा। वह अपने रास्ते से नहीं भटक सकती हैं। राज्य में कानून और व्यवस्था की स्थिति लंबे समय से लगातार बिगड़ रही है। राज्यपाल ने कहा,

“भारत के संविधान की रक्षा करना मेरी जिम्मेदारी है। यदि मुख्यमंत्री अपने रास्ते से भटकेंगी तो मेरा रोल शुरू हो जाएगा। ”

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

द प्रिंट की ‘ज्योति’ में केमिकल लोचा ही नहीं, हिसाब-किताब में भी कमजोर: अल्पज्ञान पर पहले भी करा चुकी हैं फजीहत

रेमेडिसविर पर 'ज्ञान' बघार फजीहत कराने वाली ज्योति मल्होत्रा मिलियन के फेर में भी पड़ चुकी हैं। उनके इस 'ज्ञान' के बचाव में द प्रिंट हास्यास्पद सफाई भी दे चुका है।

सुशांत सिंह राजपूत पर फेक न्यूज के लिए AajTak को ऑन एयर माँगनी पड़ेगी माफी, ₹1 लाख जुर्माना भी: NBSA ने खारिज की समीक्षा...

AajTak से 23 अप्रैल को शाम के 8 बजे बड़े-बड़े अक्षरों में लिख कर और बोल कर Live माफी माँगने को कहा गया है।

‘आरोग्य सेतु’ डाउनलोड करने की शर्त पर उमर खालिद को जमानत, पर जेल से बाहर ​नहीं निकल पाएगा दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों का...

दिल्ली दंगों से जुड़े एक मामले में उमर खालिद को जमानत मिल गई है। लेकिन फिलहाल वह जेल से बाहर नहीं निकल पाएगा। जाने क्यों?

कोरोना से जंग में मुकेश अंबानी ने गुजरात की रिफाइनरी का खोला दरवाजा, फ्री में महाराष्ट्र को दे रहे ऑक्सीजन

मुकेश अंबानी ने अपनी रिफाइनरी की ऑक्सीजन की सप्लाई अस्पतालों को मुफ्त में शुरू की है। महाराष्ट्र को 100 टन ऑक्सीजन की सप्लाई की जाएगी।

‘अब या तो गुस्ताख रहेंगे या हम, क्योंकि ये गर्दन नबी की अजमत के लिए है’: तहरीक फरोग-ए-इस्लाम की लिस्ट, नरसिंहानंद को बताया ‘वहशी’

मौलवियों ने कहा कि 'जेल भरो आंदोलन' के दौरान लाठी-गोलियाँ चलेंगी, लेकिन हिंदुस्तान की जेलें भर जाएंगी, क्योंकि सवाल नबी की अजमत का है।

चीन के लिए बैटिंग या 4200 करोड़ रुपए पर ध्यान: CM ठाकरे क्यों चाहते हैं कोरोना घोषित हो प्राकृतिक आपदा?

COVID19 यदि प्राकृतिक आपदा घोषित हो जाए तो स्टेट डिज़ैस्टर रिलीफ़ फंड में इकट्ठा हुए क़रीब 4200 करोड़ रुपए को खर्च करने का रास्ता खुल जाएगा।

प्रचलित ख़बरें

बेटी के साथ रेप का बदला? पीड़ित पिता ने एक ही परिवार के 6 लोगों की लाश बिछा दी, 6 महीने के बच्चे को...

मृतकों के परिवार के जिस व्यक्ति पर रेप का आरोप है वह फरार है। पुलिस ने हत्या के आरोपित को हिरासत में ले लिया है।

‘अब या तो गुस्ताख रहेंगे या हम, क्योंकि ये गर्दन नबी की अजमत के लिए है’: तहरीक फरोग-ए-इस्लाम की लिस्ट, नरसिंहानंद को बताया ‘वहशी’

मौलवियों ने कहा कि 'जेल भरो आंदोलन' के दौरान लाठी-गोलियाँ चलेंगी, लेकिन हिंदुस्तान की जेलें भर जाएंगी, क्योंकि सवाल नबी की अजमत का है।

छबड़ा में मुस्लिम भीड़ के सामने पुलिस भी थी बेबस: अब चारों ओर तबाही का मंजर, बिजली-पानी भी ठप

हिन्दुओं की दुकानों को निशाना बनाया गया। आँसू गैस के गोले दागे जाने पर हिंसक भीड़ ने पुलिस को ही दौड़ा-दौड़ा कर पीटा।

चीन के लिए बैटिंग या 4200 करोड़ रुपए पर ध्यान: CM ठाकरे क्यों चाहते हैं कोरोना घोषित हो प्राकृतिक आपदा?

COVID19 यदि प्राकृतिक आपदा घोषित हो जाए तो स्टेट डिज़ैस्टर रिलीफ़ फंड में इकट्ठा हुए क़रीब 4200 करोड़ रुपए को खर्च करने का रास्ता खुल जाएगा।

…स्कर्ट वाली का रेप हो जाता: कंपनी ने Pak कर्मचारी को निकाला, कोर्ट ने कहा – ‘मूर्ख है, बर्खास्त मत करो, रख लो’

इंग्लैंड में एक पाकिस्तानी कर्मचारी ने सहकर्मी के साथ बातचीत में कहा कि अगर यह पाकिस्तान होता तो स्कर्ट वाली लड़कियों का रेप हो जाता।

‘कल के कायर आज के मुस्लिम’: यति नरसिंहानंद को गाली देती भीड़ को हिन्दुओं ने ऐसे दिया जवाब

यमुनानगर में माइक लेकर भड़काऊ बयानबाजी करती भीड़ को पीछे हटना पड़ा। जानिए हिन्दू कार्यकर्ताओं ने कैसे किया प्रतिकार?
- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

292,985FansLike
82,212FollowersFollow
394,000SubscribersSubscribe