Wednesday, January 27, 2021
Home राजनीति कभी वामपंथी गुंडों की पिटाई के बाद व्हीलचेयर पर संसद लाई गईं ममता बनर्जी...

कभी वामपंथी गुंडों की पिटाई के बाद व्हीलचेयर पर संसद लाई गईं ममता बनर्जी काँप रहीं थी, आज कर रहीं- चड्डा, नड्डा, फड्डा…

"मुझे वो दृश्य जस का तस याद है। मेरी आँखों में वो दृश्य बसा हुआ है। मैं राज्यसभा की दीर्घा में बैठी हुई थी। इसी सदन में नरसिंह राव की सरकार के ख़िलाफ़ अविश्वास पर मतदान हो रहा था। एक व्हीलचेयर के ऊपर ममता बनर्जी को लाया गया। यहीं बैठी हुई थीं वो। चोटों से आए बुखार के कारण काँप रहीं थीं।"

पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा का लंबा इतिहास रहा है। हिंसा के लिए कुख्यात वामपंथी दलों ने इस ‘संस्कृति’ को पाला-पोसा और अब राज्य की सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) इसे बढ़ावा दे रही है। अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले TMC के गुंडों पर लगातार बीजेपी कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने के आरोप लग रहे हैं। गुरुवार (10 दिसंबर 2020) को बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा के काफिले पर हमला हुआ। इसके अगले दिन ABVP के जुलूस को निशाना बनाया गया।  

हाल ही में नड्डा ने बताया था कि तृणमूल कॉन्ग्रेस की राजनीतिक हिंसा के कारण भाजपा के 130 कार्यकर्ता अपनी जान गँवा चुके हैं, जिनमें से 100 कार्यकर्ताओं का तर्पण उन्होंने स्वयं किया है।

बावजूद इन सबके, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी राजनीतिक हिंसा को लेकर गंभीर नहीं दिखतीं। उलटा उन्होंने राज्य के डीजीपी और मुख्य सचिव को नहीं भेजने की बात कह केंद्र से टकराव का रास्ता अख्तियार कर लिया है। नड्डा के काफिले पर हमले के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दोनों शीर्ष अधिकारियों को तलब किया था

वैसे केंद्र से टकराव लेना, संघीय ढॉंचे को चुनौती देना ममता के लिए नई बात नहीं है। सत्ता में आने के बाद से ही वह लगातार ऐसा करती रही हैं। लेकिन राजनीतिक हिंसा की तो वह किसी दौर में खुद पीड़ित रह चुकी हैं। लोकसभा में एक भाषण के दौरान दिवंगत सुषमा स्वराज ने भी उनके साथ वामपंथी गुंडों के द्वारा की गई हिंसा का जिक्र किया था।

ममता बनर्जी पर दिया गया बयान वीडियो के 17 मिनट से लेकर 18 मिनट 30 सेकंड के स्लॉट पर सुना जा सकता है।

सुषमा स्वराज ने 1996 में संयुक्त मोर्चा सरकार की विश्वास प्रस्ताव पर बहस के दौरान कहा था:

“मुझे वो दृश्य जस का तस याद है। मेरी आखों में वो दृश्य बसा हुआ है। मैं राज्यसभा की दीर्घा में बैठी हुई थी। इसी सदन में नरसिंह राव की सरकार के ख़िलाफ़ अविश्वास पर मतदान हो रहा था। एक व्हीलचेयर के ऊपर ममता बनर्जी को लाया गया। यहीं बैठी हुई थीं वो। चोटों से आए बुखार के कारण काँप रहीं थीं। बराबर में बैठी दो सांसद महिलाओं ने उन्हें लाल कंबल ओढ़ाया था। वहाँ बैठी हुई मैं कम्युनिस्टों की हिंसक प्रवृत्ति को कोस रही थी। मुझे मालूम है कि ममता बनर्जी के विरोध के स्वर मुखर होते हैं। लेकिन हम उनके विरोध के अधिकार को मान्यता देते हैं। हम उनके विरोध के अधिकार को स्वीकृति देते हैं। आप उनकी आवाज को कैद करने के लिए उन पर हमला नहीं करते, इसलिए पूछना चाहती हूँ आज कि इस सदन में बैठ कर सीपीएम के साथ बैठकर मतदान करेंगी और पश्चिम बंगाल में उनकी विरोध की राजनीति करेंगी। यह कैसी साँझ है, यह कैसा गठबंधन है।”

राजनीतिक हिंसा की शिकार हो चुकी ममता आज उसी सीपीएम के स्थान पर जब खुद बंगाल पर विराजमान हैं तो उनसे इस घटना पर दो शब्द नहीं निकल रहे। वह हमले की निंदा करने की बजाय उसी पार्टी पर इल्जाम मढ़ रही हैं जिसके नेताओं पर पत्थरबाजी हुई। उनकी असंवेदनशीलता देख भाजपा नेता समेत सब हैरान हैं कि वो एक हमले को नेताओं की नौटंकी बता रही हैं। उनके शब्द पढ़िए:

“उनके (बीजेपी) पास कोई और काम नहीं है। अकसर गृह मंत्री यहाँ होते हैं, बाकी समय उनके चड्डा, नड्डा, फड्डा, भड्डा यहाँ होते हैं। जब उनके पास कोई दर्शक नहीं होता है, तो वे अपने कार्यकर्ताओं को नौटंकी करने के लिए कहते हैं।”

याद दिला दें कि ये पहली दफा नहीं है जब ममता बनर्जी हिंसा का या किसी आरोपित का बचाव कर रही हैं। इससे पहले शारदा चिट फंड घोटाले में फँसे पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार के लिए ममता बनर्जी ने सड़क पर उतर कर रेल रोको प्रदर्शन कर दिया था।

इसके अलावा CAA/NRC के खिलाफ़ भी ममता ने केंद्र के ख़िलाफ़ अपना जहर उगला था। हाल में जब बंगाल में तूफान आया तब भी केंद्र को नेगेटिव दिखाने के लिए उन्होंने मीडिया में झूठ कह दिया था। कोरोना महामारी के बीच भी उनका रवैया केंद्र सरकार की ओर आक्रमक था। 

कुल मिलाकर हर स्थिति में ममता बनर्जी की राजनीति फिलहाल इसी जमीन पर टिकी है कि वह राज्य के हित में काम करने की बजाय केंद्र सरकार का विरोध करें और प्रदेश में बढ़ रही राजनीतिक हिंसा को नदरअंदाज करती रहें।

आज उनके इसी बर्ताव पर प्रदेश राज्यपाल ने साफ तौर पर कह दिया है कि ममता बनर्जी को संविधान का पालन करना होगा। वह अपने रास्ते से नहीं भटक सकती हैं। राज्य में कानून और व्यवस्था की स्थिति लंबे समय से लगातार बिगड़ रही है। राज्यपाल ने कहा,

“भारत के संविधान की रक्षा करना मेरी जिम्मेदारी है। यदि मुख्यमंत्री अपने रास्ते से भटकेंगी तो मेरा रोल शुरू हो जाएगा। ”

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

 

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

Video: किसानों के हमले में दीवार से एक-एक कर गिरते रहे पुलिसकर्मी, 109 घायल

वीडियो में देखा जा सकता है कि भीड़ द्वारा किए गए हमले से पुलिसकर्मी एक-एक कर लाल किले की दीवार से नीचे गिरते जा रहे हैं।

बिहारी-गुजराती-तमिल-कश्मीरी किसान हो तो डूब मरो… क्योंकि किसान सिर्फ पंजाबी-खालिस्तानी होते हैं, वही अन्नदाता हैं

वास्तविकता ये है कि आप इतने दिनों से एक ऐसी भीड़ के जमावड़े को किसान का आंदोलन कहते रहे। जिसकी परिभाषा वामपंथी मीडिया गिरोह और विपक्षियों ने गढ़ी और जिसका पूरा ड्राफ्ट एक साल पहले हुए शाहीन बाग मॉडल के आधार पर तैयार हुआ।

जर्मनी, आयरलैंड, स्पेन आदि में भी हो चुकी हैं ट्रैक्टर रैलियाँ, लेकिन दिल्ली वाला दंगा कहीं नहीं हुआ

दिल्ली में जो आज हुआ, स्पेन, आयरलैंड, और जर्मनी के किसानों ने वो नहीं किया, हालाँकि वो भी अन्नदाता ही थे और वो भी सरकार के खिलाफ अपनी माँग रख रहे थे।

किसानों के आंदोलन में खालिस्तानी कड़े और नारे का क्या काम?

सवाल उठता है कि जो लोग इसे पवित्र निशान साहिब बोल रहे हैं, वो ये बताएँ कि ये नारा और कड़ा किसका है? यह भी बताएँ कि एक किसान आंदोलन में मजहबी झंडा कहाँ से आया? उसे कैसे डिफेंड किया जाए कि तिरंगा फेंक कर मजहबी झंडा लगा दिया गया?

कैपिटल हिल के लिए छाती पीटने वाले दिल्ली के ‘दंगाइयों’ के लिए पीट रहे ताली: ट्रम्प की आलोचना करने वाले करेंगे राहुल-प्रियंका की निंदा?

कैपिटल हिल वाले अगर दंगाई थे तो दिल्ली के उपद्रवी संत कैसे हुए? ट्रम्प की आलोचना हो रही थी तो राहुल-प्रियंका की निंदा क्यों नहीं? ये दोहरा रवैया अपनाने वाले आज भी फेक न्यूज़ फैलाने में लगे हैं।

वीडियो: जब दंगाई को किसी ने लाल किला पर तिरंगा लगाने दिया, और उसने फेंक दिया!

लाल किले पर एक आदमी सिखों का झंडा चढ़ाने खम्बे पर चढ़ा। जब एक आदमी ने उसकी ओर तिरंगा बढ़ाया तो उसने बेहद अपमानजनक तरीके से तिरंगे को दूर फेंक दिया।

प्रचलित ख़बरें

दिल्ली में ‘किसानों’ ने किया कश्मीर वाला हाल: तलवार ले पुलिस को खदेड़ा, जगह-जगह तोड़फोड़, पुलिस वैन पर पथराव

दिल्ली में प्रदर्शनकारी पुलिस के वज्र वाहन पर चढ़ गए और वहाँ जम कर तोड़-फोड़ मचाई। 'किसानों' द्वारा तलवारें भी भाँजी गईं।

महिला पुलिस कॉन्स्टेबल को जबरन घेर कर कोने में ले गए ‘अन्नदाता’, किया दुर्व्यवहार: एक अन्य जवान हुआ बेहोश

महिला पुलिस को किसान प्रदर्शनकारी चारों ओर से घेरे हुए थे। कोने में ले जाकर महिला कॉन्स्टेबल के साथ दुर्व्यवहार किया गया।

दलित लड़की की हत्या, गुप्तांग पर प्रहार, नग्न लाश… माँ-बाप-भाई ने ही मुआवजा के लिए रची साजिश: UP पुलिस ने खोली पोल

बाराबंकी में दलित युवती की मौत के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया। पुलिस ने बताया कि पिता, माँ और भाई ने ही मिल कर युवती की हत्या कर दी।

तेज रफ्तार ट्रैक्टर से मरा ‘किसान’, राजदीप ने कहा- पुलिस की गोली से हुई मौत, फिर ट्वीट किया डिलीट

राजदीप सरदेसाई ने तिरंगे में लिपटी मृतक की लाश की तस्वीर अपने ट्विटर अकाउंट से शेयर करते हुए लिखा कि इसकी मौत पुलिस की गोली से हुई है।

हिंदुओं को धमकी देने वाले के अब्बा, मोदी को 420 कहने वाले मौलाना और कॉन्ग्रेस नेता: ‘लोकतंत्र की हत्या’ गैंग के मुँह पर 3...

पद्म पुरस्कारों में 3 नाम ऐसे हैं, जो ध्यान खींच रहे- मौलाना वहीदुद्दीन खान (पद्म विभूषण), तरुण गोगोई (पद्म भूषण) और कल्बे सादिक (पद्म भूषण)।

रस्सी से लाल किला का गेट तोड़ा, जहाँ से देश के PM देते हैं भाषण, वहाँ से लहरा रहे पीला-काला झंडा

किसान लाल किले तक घुस चुके हैं और उन्होंने वहाँ झंडा भी फहरा दिया है। प्रदर्शनकारी किसानों ने लाल किले के फाटक पर रस्सियाँ बाँधकर इसे गिराने की कोशिश भी कीं।
- विज्ञापन -

 

लालकिला में देर तक सहमें छिपे रहे 250 बच्चे, हिंसा के दौरान 109 पुलिसकर्मी घायल; 55 LNJP अस्पताल में भर्ती

दिल्ली में किसान ट्रैक्टर रैली का सबसे बुरा प्रभाव पुलिसकर्मियों पर पड़ा है। किसानों द्वारा की गई इस हिंसा में 109 पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं, जिनमें से 1 की हालात गंभीर बताई जा रही है।

Video: किसानों के हमले में दीवार से एक-एक कर गिरते रहे पुलिसकर्मी, 109 घायल

वीडियो में देखा जा सकता है कि भीड़ द्वारा किए गए हमले से पुलिसकर्मी एक-एक कर लाल किले की दीवार से नीचे गिरते जा रहे हैं।

बिहारी-गुजराती-तमिल-कश्मीरी किसान हो तो डूब मरो… क्योंकि किसान सिर्फ पंजाबी-खालिस्तानी होते हैं, वही अन्नदाता हैं

वास्तविकता ये है कि आप इतने दिनों से एक ऐसी भीड़ के जमावड़े को किसान का आंदोलन कहते रहे। जिसकी परिभाषा वामपंथी मीडिया गिरोह और विपक्षियों ने गढ़ी और जिसका पूरा ड्राफ्ट एक साल पहले हुए शाहीन बाग मॉडल के आधार पर तैयार हुआ।

जर्मनी, आयरलैंड, स्पेन आदि में भी हो चुकी हैं ट्रैक्टर रैलियाँ, लेकिन दिल्ली वाला दंगा कहीं नहीं हुआ

दिल्ली में जो आज हुआ, स्पेन, आयरलैंड, और जर्मनी के किसानों ने वो नहीं किया, हालाँकि वो भी अन्नदाता ही थे और वो भी सरकार के खिलाफ अपनी माँग रख रहे थे।

किसानों के आंदोलन में खालिस्तानी कड़े और नारे का क्या काम?

सवाल उठता है कि जो लोग इसे पवित्र निशान साहिब बोल रहे हैं, वो ये बताएँ कि ये नारा और कड़ा किसका है? यह भी बताएँ कि एक किसान आंदोलन में मजहबी झंडा कहाँ से आया? उसे कैसे डिफेंड किया जाए कि तिरंगा फेंक कर मजहबी झंडा लगा दिया गया?

‘RSS नक्सलियों से भी ज्यादा खतरनाक, संघ समर्थक पैर छूकर गोली मार देते हैं’: कॉन्ग्रेसी सांसद और CM भूपेश बघेल का ज्ञान

कॉन्ग्रेस के सीएम भूपेश ने कहा कि आरएसएस के समर्थक पैर छूकर गोली मार देते हैं। महात्मा गाँधी की हत्या कैसे किया गया था? पहले पैर छुए फिर उनके सीने में गोली मारी।

कैपिटल हिल के लिए छाती पीटने वाले दिल्ली के ‘दंगाइयों’ के लिए पीट रहे ताली: ट्रम्प की आलोचना करने वाले करेंगे राहुल-प्रियंका की निंदा?

कैपिटल हिल वाले अगर दंगाई थे तो दिल्ली के उपद्रवी संत कैसे हुए? ट्रम्प की आलोचना हो रही थी तो राहुल-प्रियंका की निंदा क्यों नहीं? ये दोहरा रवैया अपनाने वाले आज भी फेक न्यूज़ फैलाने में लगे हैं।

‘लाल किले पर लहरा रहा खालिस्तान का झंडा- ऐतिहासिक पल’: ऑल पाकिस्तान मुस्लिम लीग ने मनाया ‘ब्लैक डे’

गणतंत्र दिवस पर लाल किले पर 'खालिस्तानी झंडा' फहराने को लेकर ऑल पाकिस्तान मुस्लिम लीग (APML) काफी खुश है। पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ द्वारा स्थापित पाकिस्तानी राजनीतिक पार्टी ने इसे 'ऐतिहासिक क्षण' बताया है।

वीडियो: जब दंगाई को किसी ने लाल किला पर तिरंगा लगाने दिया, और उसने फेंक दिया!

लाल किले पर एक आदमी सिखों का झंडा चढ़ाने खम्बे पर चढ़ा। जब एक आदमी ने उसकी ओर तिरंगा बढ़ाया तो उसने बेहद अपमानजनक तरीके से तिरंगे को दूर फेंक दिया।

देशी-विदेशी शराब से लदी मिली प्रदर्शनकारी किसानों की ट्रैक्टर: दिल्ली पुलिस ने किया सीज, देखें तस्वीरें

पुलिस ने शराब से भरे एक ट्रैक्टर को सीज किया है। सामने आए फोटो में देखा जा सकता है कि पूरा ट्रैक्टर शराब से भरा हुआ है। यानी कि शराब के नशे में ट्रैक्टरों को चलाया जा रहा है।

हमसे जुड़ें

272,571FansLike
80,695FollowersFollow
386,000SubscribersSubscribe