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पुरखे बताते थे महिलाओं की चड्डी का रंग, कहते थे- ग्रामीण-गरीब महिला आकर्षक नहीं होती; आज ‘सपोले’ बता रहे सपा सबसे बड़ी महिला हितैषी: अखिलेश यादव गैंग से दोगले भी लजाए

मुलायम और अखिलेश दोनों ने 'कोटा के भीतर कोटा' को बहाना बनाया, लेकिन असल में इनकी मंशा महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को सीमित रखने की रही।

लोकसभा में समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने शुक्रवार (16 अप्रैल 2026) को कहा कि समाजवादी पार्टी महिलाओं का सबसे अधिक सम्मान करने वाली पार्टी है। उन्होंने दावा किया कि सपा महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और हक की सबसे बड़ी हितैषी रही है। लेकिन जैसे ही यह दावा सदन में गूँजा, सत्ता पक्ष की बेंचों से हंसी की लहर उठी। ये बयान उन्होंने उस समय दिया, जब संसद में नारी शक्ति वंदन (संसोधन) अधिनियम 2026 पर चर्चा चल रही थी। महिला आरक्षण से जुड़ा ये बिल लोकसभा में गिर गया, क्योंकि सपा, डीएमके, कॉन्ग्रेस जैसी पार्टियों ने इसका खुला विरोध किया।

बहरहाल, धर्मेंद्र यादव ने जब सपा को सबसे बड़ी महिला हितैषी पार्टी बताया, उसके तुरंत बाद सोशल मीडिया पर पुरानी खबरें, न्यायालय के फैसले और उन दिनों की रिपोर्ट्स वायरल हो गईं। लोग पूछने लगे कि क्या सचमुच सपा महिलाओं की हितैषी है? या फिर यह सिर्फ एक राजनैतिक चेहरा है, जिसके पीछे 2012 से 2017 तक अखिलेश यादव की सरकार में उत्तर प्रदेश की महिलाओं की जो दर्दनाक हालत थी, वह आज भी काले धब्बे की तरह सपा के चेहरे पर चिपकी हुई है।

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (एनसीआरबी) और ह्यूमन राइट्स कमीशन की रिपोर्ट्स इस सवाल का जवाब साफ-साफ देती हैं। 2012-2017 के दौरान उत्तर प्रदेश में महिला अपराधों का आँकड़ा चौंकाने वाला रहा। साल 2012 में राज्य में बलात्कार के 1963 मामले दर्ज हुए थे। 2013 में यह संख्या अचानक बढ़कर 3050 हो गई, यानी महज एक साल में 55 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी। कुल महिला अपराध (क्राइम अगेंस्ट वुमेन) 2013 में 32,546 रहे।

साल 2014 में यह संख्या 38,467 तक पहुँच गई। इसके बाद तो 2016 और 2017 में यूपी पूरे देश में महिला अपराधों में सबसे ऊपर रहा। साल 2017 में अकेले यूपी में 56,011 मामले दर्ज हुए, जो पूरे देश के कुल महिला अपराधों का बड़ा हिस्सा था। एनसीआरबी के मुताबिक, उस दौरान यूपी न सिर्फ कुल संख्या में टॉप पर था, बल्कि बलात्कार, अपहरण, दहेज हत्या और छेड़छाड़ जैसे मामलों में भी अग्रणी रहा।

इटावा की घटना है जंगलराज की गवाह

ये आँकड़े सिर्फ कागज पर नहीं थे। ये असल जिंदगियों के टूटने की कहानियाँ थीं। अखिलेश यादव के गृह जिले इटावा में यादवों का आतंक ऐसा था कि बच्चियाँ और महिलाएँ अकेले घर से बाहर निकलने से काँपती थीं। गाँवों में दबंगों का राज था। पुलिस निष्क्रिय थी। न्याय की उम्मीद खत्म हो चुकी थी।

इसी दरमियान 11 मई 2014 को इटावा के सिविल लाइन थाना क्षेत्र के गौरापुरा गाँव में 15 साल की नाबालिग लड़की के साथ हुई घटना ने पूरे प्रदेश को शर्मसार कर दिया। मुख्य आरोपित सनी यादव (शादीशुदा) ने पीड़िता के घर घुसकर उसके साथ दुष्कर्म किया। लड़की ने रोते-रोते अपनी माँ को बताया। पीड़िता की माँ ने तुरंत थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने सनी यादव को गिरफ्तार कर लिया। लेकिन यहीं से दबाव शुरू हुआ।

आरोपित के परिवार ने पीड़िता की माँ पर केस वापस लेने का भारी दबाव बनाया। धमकियाँ दी गईं कि अगर जुबान खोली तो बेटी जैसा हाल किया जाएगा। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। हालाँकि इसके बाद जब वो शौच के लिए खेत में गईं, तो उन्हें खेत में ही घेर लिया गया। आरोपित के पिता बसंतलाल यादव और उसके साथियों ने उसे निर्वस्त्र कर दिया। धारदार हथियारों से लहूलुहान कर दिया। महिला को गंभीर हालत में अस्पताल पहुँचाया गया।

उस समय अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे और इटावा उनका पैतृक जिला। फिर भी दबंगों का साहस ऐसा था कि किसी की परवाह नहीं की। पीड़िता की माँ की चीखें आज भी यूपी की महिलाओं के मन में गूंजती हैं, क्या वो राज्य की सरकार थी या सपा का जंगलराज था?

मुलायम सिंह यादव के बयानों को भूले तो नहीं?

इसी तरह की घटनाएँ सपा शासन में आम थीं। लेकिन सपा के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के बयानों ने महिलाओं के घावों पर नमक छिड़क दिया। अप्रैल 2014 में बदायूँ में दो बहनों के साथ गैंगरेप और हत्या के बाद मुलायम ने मुरादाबाद में कहा, “लड़कियाँ पहले दोस्ती करती हैं। फिर लड़के-लड़की में मतभेद हो जाता है। वे इसे रेप का नाम दे देती हैं। लड़कों से गलती हो जाती है। क्या रेप केस में फाँसी दी जाएगी? लड़के हैं, नादानी में रेप हो जाता है।”

यह बयान पूरे देश में आग की तरह फैला। महिलाएँ सड़कों पर उतर आईं। लेकिन मुलायम ने पीछे हटने की बजाय और विवादित बयान दिए। अगस्त 2015 में उन्होंने कहा, “एक महिला से चार लोग रेप नहीं कर सकते। रेप तो एक ही आदमी करता है, लेकिन एफआईआर में चार लोगों के नाम लिख दिए जाते हैं, जो गलत है। यूपी में तो केवल दो फीसदी रेप होते हैं।” यही नहीं, जुलाई 2014 में उन्होंने कहा, “21 करोड़ की आबादी की तुलना में यूपी में कम रेप होते हैं।” और फिर नवंबर 2014 में बाराबंकी में उन्होंने कहा, “गाँव की गरीब महिलाएँ ज्यादा आकर्षक नहीं होतीं।” उनके कहने का मतलब था कि गाँव की महिलाओं से कौन रेप करेगा?

आजम खान ने बताया था जयप्रदा की चड्ढी का रंग

मुलायम के साथी सपा के वरिष्ठ नेता आजम खान भी महिलाओं के अपमान में आगे रहे हैं। जयाप्रदा (तत्कालीन सपा सहयोगी) के बारे में उन्होंने कहा, “उनकी (जयाप्रदा की) चड्डी का रंग खाकी है।” यह टिप्पणी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता में दी गई, लेकिन महिलाओं की गरिमा को तार-तार कर गई।

यही नहीं, इससे पहले साल 2010 में महिला आरक्षण बिल पर मुलायम ने कहा था कि यह बिल नौजवानों को संसद में सीटी बजाने के लिए उकसाएगा। उन्होंने दावा किया कि बिल से सिर्फ बड़े घर की और शहर की लड़कियाँ फायदा उठाएँगी, गाँव की गरीब महिलाएँ तो आकर्षक नहीं होतीं। सपा ने 2010 में बिल का तीखा विरोध किया और सदन में हंगामा किया।

अखिलेश यादव ने भी बाद में ‘कोटा के भीतर कोटा’ की माँग करते हुए बिल का विरोध किया। उन्होंने कहा कि ओबीसी, दलित और मुस्लिम महिलाओं के लिए अलग आरक्षण नहीं तो बिल अधूरा है। सपा की यह रणनीति महिलाओं की 33 प्रतिशत भागीदारी को सुनिश्चित नहीं होने देने में अहम रही।

गायत्री प्रसाद प्रजापति केस में कोर्ट ने लगाई थी फटकार, उम्रकैद की सजा

सपा सरकार में मंत्रियों और विधायकों के खिलाफ भी गंभीर मामले सामने आए। गायत्री प्रसाद प्रजापति सपा सरकार में खनन मंत्री थे। 2017 में चित्रकूट की एक महिला ने शिकायत की कि प्रजापति ने अपने सरकारी आवास पर उसे और उसकी नाबालिग बेटी के साथ गैंगरेप किया। वीडियो बनाया और धमकाया। पुलिस ने कुछ नहीं किया।

पीड़िता ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। 2021 में लखनऊ की स्पेशल कोर्ट ने प्रजापति समेत दो अन्य को उम्रकैद की सजा सुनाई। कोर्ट ने कहा कि आरोपित ने सरकारी पद का दुरुपयोग कर नाबालिग की गरिमा लूटी। पीड़िता की बेटी की आँखों में आज भी वह रात घूमती होगी, जब उसके घर का माहौल ही उसे सबसे बड़ा खतरा बन गया। वह सोचती होगी कि क्या मंत्री का पद इतना ताकतवर था कि न्याय भी चुप रह गया?

पूर्व विधायक विजय मिश्रा पर 93 केस, रेप केस में सजा

सपा के पूर्व विधायक विजय मिश्रा पर 93 आपराधिक मामले दर्ज हैं। 2023 में भदोही की स्पेशल कोर्ट ने उन्हें 2014 के बलात्कार मामले में 15 साल की सजा सुनाई। पीड़िता एक गायिका थीं। मिश्रा ने उन्हें कार्यक्रम के बहाने बुलाया और बार-बार बलात्कार किया। कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराया। आज वे आगरा सेंट्रल जेल में बंद हैं। इन मामलों ने सपा की ‘महिला हितैषी’ छवि को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया।

अपने अतीत को सुधारे समाजवादी पार्टी

आज जब सपा के सांसद लोकसभा में महिलाओं का सम्मान करने का दावा करते हैं, तो पुरानी घटनाएँ और न्यायालय के फैसले उनकी पोल खोल देते हैं। सपा का इतिहास महिला आरक्षण का विरोध, विवादित बयानों और अपराधियों को संरक्षण देने का रहा है। 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित न हो पाने में सपा की भूमिका अहम रही। मुलायम और अखिलेश दोनों ने ‘कोटा के भीतर कोटा’ को बहाना बनाया, लेकिन असल में इनकी मंशा महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को सीमित रखने की रही।

ये घटनाएँ सिर्फ आँकड़े नहीं, बल्कि उन माँ-बेटियों की चीखें हैं, जिन्हें सपा शासन ने कभी सुरक्षा नहीं दी। आज भी जब कोई सपा नेता महिलाओं का सम्मान करने का दावा करता है, तो इटावा की पीड़िता माँ-बेटी, चित्रकूट की नाबालिग और भदोही की गायिका की याद आ जाती है। सपा को अगर वाकई महिलाओं का सम्मान करना है, तो पहले अपने इतिहास का सामना करे।

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श्रवण शुक्ल
श्रवण शुक्ल
I am Shravan Kumar Shukla, known as ePatrakaar, a multimedia journalist deeply passionate about digital media. I’ve been actively engaged in journalism, working across diverse platforms including agencies, news channels, and print publications. My understanding of social media strengthens my ability to thrive in the digital space. Above all, ground reporting is closest to my heart and remains my preferred way of working. explore ground reporting digital journalism trends more personal tone.

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