Homeविविध विषयअन्य80 लाख किसानों को डायरेक्ट लाभ, BT कॉटन बीजों के बिक्री मूल्य में कटौती

80 लाख किसानों को डायरेक्ट लाभ, BT कॉटन बीजों के बिक्री मूल्य में कटौती

नए अधिकतम बिक्री मूल्य (MSP) में प्रति वर्ष ₹20 प्रति पैकेट (रॉयल्टी) के रूप में शामिल है, जबकि पिछले वर्ष ₹39 प्रति पैकेट था। इसका मतलब है कि किसानों को 2018 सीज़न की तुलना में इस साल ₹10 प्रति पैकेट कम भुगतान करना होगा।

केंद्र सरकार ने बीटी कपास के बीजों के अधिकतम बिक्री मूल्य में कटौती की है। इससे देश भर में लगभग 80 लाख कपास किसानों को लाभ मिलने की संभावना है। शुक्रवार (मार्च 8, 2019) को कृषि मंत्रालय द्वारा अधिसूचित किया गया कि नए मूल्य के तहत 450 ग्राम वाले पैकेट के दाम घटाकर ₹730 रुपए (₹20 रॉयल्टी समेत) कर दिया गया है। 2018-19 में बीटी कपास बीजों का अधिकतम बिक्री मूल्य ₹740 था, जिसमें ₹39 का रॉयल्टी शुल्क शामिल था।

नए अधिकतम बिक्री मूल्य (MSP) में प्रति वर्ष ₹20 प्रति पैकेट (रॉयल्टी) के रूप में शामिल है, जबकि पिछले वर्ष ₹39 प्रति पैकेट था। इसका मतलब है कि किसानों को 2018 सीज़न की तुलना में इस साल ₹10 प्रति पैकेट कम भुगतान करना होगा। साथ ही घरेलू बीज कंपनियों को बड़ा लाभ होगा क्योंकि उन्हें डेवलपर को ट्रेट शुल्क के रूप में प्रति पैकेट ₹19 कम देने होंगे।

बीटी कपास बीज के MSP को कम करने के क़दम के तहत स्वदेशी जागरण मंच (SJM) सहित कई संगठनों ने माँग की थी कि ट्रेट शुल्क को पूरी तरह से हटा दिया जाए ताकि किसानों को उच्च क़ीमतों का ‘अनावश्यक बोझ’ न उठाना पड़े।

SJM के सह-संयोजक अश्वनी महाजन ने 1 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर बीटी कपास के बीजों के MSP में ट्रेट शुल्क हटाने के लिए हस्तक्षेप करने की माँग की थी। कुछ रिपोर्टों का हवाला देते हुए उन्होंने तर्क दिया कि चूंकि बीटी ट्रेट कपास के पौधों को पिंक बोलवर्म (कीट) से बचाने का काम नहीं करता इसलिए ऐसी फीस वसूलने का कोई मतलब नहीं बनता।

महाजन ने आरोप लगाया कि कृषि मंत्रालय ने न तो ट्रेट मूल्य निकाला और न ही उन डेवलपर के ख़िलाफ़ कोई दंडात्मक कार्रवाई ही की, जो किसानें से धन तो इकट्ठा कर लेते हैं लेकिन कोई काम नहीं करते।

मध्यम या बड़े कपास किसानों के पास चिंता के अलग-अलग कारण हैं। कपास की कुल उत्पादन लागत में बीज की लागत ज़्यादा नहीं होती है। ख़बर के अनुसार महाराष्ट्र में यवतमाल ज़िले के कपास किसान विजय नीवाल ने बताया कि रॉयल्टी में कटौती के क़दम से प्रौद्योगिकी डेवलपर्स का मनोबल गिर सकता है और अगर वे अगले कुछ वर्षों में पुराने हो जाते हैं, तो फिर वे नई किस्मों के साथ बाहर नहीं आते।

बता दें कि इससे पहले केंद्र द्वारा दिसंबर 2015 में गठित एक पैनल द्वारा कपास बीज मूल्य नियंत्रण आदेश के तहत बीटी कपास बीजों के दाम पहली बार 2016-17 में घटाए गए थे। पैनल ने 830-1,030 रुपए के पुराने दाम घटाकर प्रति पैकेट 800 रुपए कर दिए थे। इसी तरह प्रति पैकेट 163 रुपए ट्रेट वैल्यू को लगभग 70 प्रतिशत घटाकर 49 रुपए कर दिया गया था। यह कदम मई 2016 में जारी प्रारूप दिशा-निर्देशों के बाद उठाया गया था, जिसमें ट्रेट वैल्यू को बीज के बिक्री मूल्य के 10 प्रतिशत पर सीमित कर दिया गया था और इसके बाद समय-समय पर इसे कम किया गया।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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