साल 2026 की शुरुआत में बिहार के पुलिस महानिदेशक (DGP) विनय कुमार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने बताया कि राज्य में हत्या, डकैती, बैंक लूट, दंगे जैसे बड़े अपराध कम हुए हैं। 2024 के मुकाबले 2025 में हत्या के मामलों में करीब 8.3% की कमी आने की बात कही।
आँकड़ों के अनुसार 2025 में बिहार में हत्या के कुल 2556 मामले दर्ज हुए। यानी, औसतन 7 हत्या रोज हुई। ऐसे में आप पूछ सकते हैं कि फिर भरत तिवारी या बंटी यादव की हत्या पर ही इतनी बात क्यों हो रही?
इसका जवाब आँकड़े नहीं देते। यह बिहार पुलिस के काम करने के तरीके में छिपा है। जब पटना रेलवे स्टेशन जैसी व्यस्त जगह पर किसी व्यक्ति के साथ मारपीट हो, उसका अपहरण कर लिया जाए, CCTV फुटेज में हमलावरों के चेहरे दिखे, फिर भी 5 दिन बाद उस व्यक्ति की मौका-ए-वारदात से 60 किमी दूर आधी गली हुई बॉडी मिले और इस बीच पुलिस केवल ‘तलाश रहे हैं’ जैसा रूटीन जवाब ही देती रही, तो यह आम लोगों के भीतर सुरक्षित होने के विश्वास को गहरे तक हिला देता है। विशेषकर, खतरे का यह संकेत उस राज्य के लिए और भी भयावह है, जिसने करीब ढाई दशक का जंगलराज भोगा हो।
क्या है बंटी यादव का मामला?
33 साल का बंटी यादव पटना के न्यू करबिगहिया इलाके का रहने वाला था। छोटी सी दुकान चलाकर अपने परिवार का गुजारा करता था। 6-7 जुलाई की दरमियानी रात उसे पटना रेलवे स्टेशन के बाहर से अगवा किया गया। उस समय वह एक दुकान में सामान खरीद रहा था। 11 जुलाई को मोकामा से सटे अथमलगोला थाना क्षेत्र के सूर्यपुरा गाँव में एक खेत में उसकी क्षत-विक्षत लाश मिली। पटना रेलवे स्टेशन से यह जगह करीब 60 किलोमीटर दूर है।
बंटी यादव का अपहरण होने से शव मिलने तक क्या-क्या हुआ?
वायरल सीसीटीवी फुटेज में कुछ लोग दुकान में घुसते हैं और पीछे से बंटी का कॉलर पकड़ते हैं। उसके साथ मारपीट करते हैं। उसे घसीटकर ले जाते हैं। इसके बाद उसे जबरन एक ऑटो में बिठाया जाता है। 11 जुलाई को शव मिलने के बाद बाढ़ के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी रामकृष्णा ने बताया कि हाथ में पहने कड़े से परिजनों ने बंटी यादव की पहचान की। उसको अगवा किए जाने की शिकायत पटना के कोतवाली थाना में दर्ज कराई गई थी। उन्होंने बताया कि चार-पाँच दिन होने के कारण शव डिकम्पोज होना शुरू हो चुका था।
आज दिनांक 11.07.2026 की संध्या में #अथमलगोला थानांतर्गत एक व्यक्ति का शव मिलने की सूचना प्राप्त हुई।
— Patna Police (@PatnaPolice24x7) July 11, 2026
प्राप्त सूचना के आलोक में पुलिस द्वारा त्वरित घटनास्थल पर पहुंचा गया।
शव की पहचान के क्रम में ज्ञात हुआ कि मृतक के अपहरण के संबंध में पूर्व से कोतवाली थाना, पटना में एक कांड… pic.twitter.com/BnimqXaphK
खबरों में पोस्टमार्टम रिपोर्ट के हवाले से बताया गया है कि बंटी के शरीर पर 100 से अधिक चोट के निशान थे। कई हिस्सों पर डंडे और रॉड से पिटाई के कारण काले निशान पड़ गए थे। अपहरण के करीब 14 से 18 घंटे बाद उसकी मौत हुई थी।
यानी, हत्या से पहले उसे करीब 18 घंटे तक टॉर्चर किया गया। मौत होने तक बुरी तरह पीटा गया। आँख-नाक कूच दिया गया। बायाँ हाथ ठीक था। दाहिने हाथ की केवल हड्डियाँ बची थी। दाएँ हाथ पर टैटू था। पहचान न हो सके इसलिए नुकीले चीज से गोदकर उसे हटा दिया गया था। फिर सड़क से सटे सूर्यपुरा गाँव के एक खेत में शव को गाड़ दिया गया।
दैनिक भास्कर ने पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर अजय कुमार सिंह के हवाले से बताया है कि बंटी के शरीर में गोली या छर्रे नहीं मिले हैं। ईंट-पत्थर जैसी भारी चीजों से पीट-पीटकर उसकी हत्या की गई होगी। डॉक्टर सिंह ने यह भी बताया है कि बॉडी गलनी शुरू हो चुकी थी, इसके कारण कुछ चोटें किस तरह के हथियार से आईं हैं, इसकी पुष्टि नहीं की जा सकती।
क्यों की गई बंटी यादव की हत्या?
पीड़ित परिजनों के अनुसार बंटी यादव ने न्यू करबिगहिया इलाके में सेक्स रैकेट चलाने का विरोध किया था। कथित तौर पर यह सेक्स रैकेट रवीश कुमार उर्फ बिसिया चला रहा था। रवीश पर कई मामले दर्ज हैं और कुछ महीने पहले ही वह जेल से बाहर निकला था।
रिपोर्ट के अनुसार अपहरण की घटना से करीब 15 दिन पहले रवीश से बंटी का विवाद हुआ था। इस दौरान रवीश ने उसे धमकी भी दी थी। दावा किया जा रहा है कि इस विवाद के कारण अगवा कर उसे मार डाला गया।
हालाँकि इन दावों में कितनी सत्यता है यह पुलिस की जाँच और अदालत के अंतिम निष्कर्षों के बाद ही सत्यापित हो पाएगा। शव मिलने के बाद डीएसपी रामकृष्णा ने देह व्यापार का विरोध करने के कारण बंटी की हत्या किए जाने के सवाल पर कहा कि दूसरे थाना क्षेत्र से मामला जुड़ा होने के कारण उनके लिए इस पर कमेंट करना उचित नहीं होगा। घटना के सभी पहलुओं की गहन जाँच की जा रही है।
किन लोगों ने की बंटी यादव की हत्या?
अब तक सामने आई जानकारी के अनुसार किचर किन्नर के कहने पर रवीश ने बंटी की हत्या की पूरी प्लानिंग की। किचर के तीन साथियों को 15 जून को गिरफ्तार किया गया था। उसे संदेह था कि बंटी यादव की मुखबिरी पर इनलोगों की गिरफ्तारी हुई। उल्लेखनीय है कि रवीश के सेक्स रैकेट को चलाने में किन्नर सहयोग कर रहे थे।
6 जुलाई की रात बंटी को कॉल कर पटना रेलवे स्टेशन के पास बुलाया गया। बंटी पर हमला करने से पहले रवीश और उसके साथियों ने किचर के घर शराब पार्टी की। इसके बाद ये लोग बंटी के पास पहुँचे और मारपीट करते हुए उसे दुकान से उठा लिया।
7 जुलाई को बंटी के परिजनों ने नामजद एफआईआर करवाई। रितेश, रवीश के भाई बजरंगी और ऑटो ड्राइवर रोहित को गिरफ्तार कर लिया गया है। रवीश, किचर किन्नर, अजीतपाल एवं अन्य फरार हैं। पुलिस इन्हें जल्द गिरफ्तार करने का दावा कर रही है।

बंटी यादव की लाश कहाँ मिली?
अथमलगोला इलाके के फोरलेन से सटे सूर्यपुरा गाँव के खेत में बंटी यादव की लाश मिली। राम नाम का युवक खेत में भैंस चरा रहा था। उसकी नजर शव पर पड़ी। बॉडी को गड्ढा कर गाड़ दिया गया था। उसके ऊपर बालू और पत्ते डाल दिए गए थे। बारिश होने के कारण बालू और पत्ते हट गए और शव दिखने लगा। राम ने गाँव पहुँच लोगों को इसकी सूचना दी। इसके बाद पुलिस को जानकारी दी गई।
बिहार पुलिस पर क्यों उठ रहे सवाल?
बंटी यादव के परिजनों का कहना है कि अगवा करने की शिकायत के बाद भी पुलिस ने कुछ नहीं किया। दैनिक भास्कर को बंटी के भाई मुकुल ने बताया है कि डेड बॉडी खोजने का काम उनलोगों ने खुद किया। जो लोग अब तक गिरफ्तार हुए हैं, उन्हें भी पकड़कर पुलिस को देने का दावा भी उन्होंने किया। उनका कहना है कि पुलिस केवल इतना कहती रही कि हम तलाश कर रहे हैं, जबकि रवीश और उसके साथियों का आपराधिक रिकॉर्ड रहा है।
- बंटी का जहाँ से अपहरण हुआ, वहाँ का सीसीटीवी वायरल है। इसमें उसके साथ मारपीट करने वालों का चेहरा भी दिख रहा है। लेकिन इनमें से एक को भी अपहरण की शिकायत मिलने के बाद पुलिस नहीं पकड़ सकी।
- अपहरण के बाद बंटी को पहले ऑटो में बिठाया गया। फिर भूतनाथ रोड पर दूसरी गाड़ी में शिफ्ट किया गया। पुलिस इस गाड़ी की पहचान तक न कर सकी।
- रवीश के साथ बंटी के विवाद, बंटी को धमकी देने की बात, बंटी के अपहरण के बाद भी पुलिस रवीश का पता नहीं लगा सकी।
- अपहरण की जगह से करीब 60 किमी दूर बंटी का शव मिला। इस दौरान कई थाना क्षेत्रों और टोल प्लाजा से वह गाड़ी गुजरी जिसमें बंटी को ले जाया गया, पर कहीं कोई कार्रवाई नहीं हुई।
पटना में अपहरण के 6 दिन बाद युवक की लाश मिली: बिहार पुलिस ने 80 CCTV खंगाला, लेकिन ढ़ूंढ नहीं पाई, अपहरण का भी CCTV फुटेज था#BiharNews #HindiNews #BiharPolice #Patna https://t.co/wV7UI0rqbh pic.twitter.com/cjT67rCvwi
— Dainik Bhaskar (@DainikBhaskar) July 12, 2026
क्यों सामान्य घटना नहीं है अगवा कर बंटी यादव की हत्या करना?
पटना बिहार की राजधानी है। पटना रेलवे स्टेशन देश के बड़े रेलवे स्टेशनों में से एक है। इसके मुख्य द्वार के पास ही महावीर मंदिर है। इसी इलाके से बंटी यादव को अगवा किया गया।
वहीं करबिगहिया इस रेलवे स्टेशन का पिछला भाग है। यहीं से ट्रेनों से उतरने वाले यात्री बस स्टैंड के लिए जाते हैं। यानी यह ऐसा इलाका है, जहाँ हर समय आवाजाही बनी रहती है। जाहिर है यहाँ पुलिस का पूरा तंत्र सक्रिय रहता होगा। ऐसी जगह से किसी को अगवा किया जाए, वह घटना सीसीटीवी में दर्ज हो फिर भी पुलिस कुछ न कर पाए तो यह सामान्य बात नहीं है।
बंटी का शव मिलने के बाद स्थानीय लोगों ने भी यह बात उठाई है। उनका कहना है कि जब यहाँ के लोग सुरक्षित नहीं हैं तो बाहर से आने वाले यात्री कैसे सुरक्षित रह सकते हैं। साथ ही ऐसी जगह पर सेक्स रैकेट का चलना भी पुलिस पर सवाल उठाते हैं। बिहार के चर्चित यूट्यूबर और जनसुराज के नेता मनीष कश्यप भी अपने एक रिपोर्ट में इस इलाके में अवैध धंधों की बात मुखरता से उठाई है।
ऑपइंडिया की बात
बंटी यादव की हत्या और भरत तिवारी का एनकाउंटर, दोनों एक जैसे मामले नहीं हैं। एक में पुलिस अपनी निष्क्रियता से सवालों के घेरे में है तो दूसरे में सरेंडर करने के बावजूद एनकाउंटर करने के आरोपों से घिरी है।
फिर भी दोनों मामले एक ही जैसे खतरे का संकेत देते हैं। यह बताते हैं कि केवल अपराध की संख्या कम होने का नंबर सामने रखकर, पुलिस यह नहीं कह सकती कि उसकी पूरी प्रक्रिया चुस्त-दुरुस्त है। उसे बार-बार यह दिखाना होगा कि कि जब भी कोई नागरिक संकट में होगा तो पुलिस अपराधियों से कहीं अधिक तेजी से काम करेगी। वैसे भी कानून-व्यवस्था का असली पैमाना अपराध का ग्राफ नहीं, नागरिकों के भीतर सुरक्षित होने का विश्वास होता है।
यदि यह विश्वास टूटता है, तो केवल आँकड़ों से लोगों को सुरक्षा का एहसास नहीं दिलाया जा सकता।


