Saturday, June 22, 2024
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अब ये बेगम है तुम्हारी…इसे मारना मत: अब्दुल ने 55 साल के बुजुर्ग को बेची 9 साल की बेटी, जवाब मिला- पैसे दिए हैं जो मन होगा वो करूँगा

परवाना ने शुरू-शुरू में तो कोशिश की कि वो अपने माता-पिता का दिमाग बदल दे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उसका टीचर बनने का सपना तब टूट गया, जब उसका खरीददार कुर्बान उसके घर पहुँचा और पैसे देकर उसे बुर्का पहनाकर ले गया।

अफगानिस्तान में कई परिवारों की हालत इतनी बदतर है कि उन्हें दो वक्त की रोटी जुटाने के लिए बेटियाँ बेचनी पड़ रही हैं। अब्दुल मलिक का परिवार भी उन्हीं लोगों में शामिल है जिन्होंने अपनी 9 साल की बेटी परवाना मलिक का सौदा एक 55 साल के कुर्बान नामक बुजुर्ग से कर दिया और जब सफेद दाढ़ी-बाल वाला कुर्बान उसे अपने साथ बुर्का पहनाकर ले जाने लगा तो अब्दुल बस यही कह पाया – ‘इसे मारना पीटना मत…ये तुम्हारी दुल्हन है।’

सीएनएन को परवाना ने बताया, “मेरे अब्बू ने मुझे इसलिए बेचा क्योंकि हमारे पास खाने को रोटी, चावल और आटा नहीं था। इसलिए उन्होंने मुझे बूढ़े आदमी को बेचा।” वहीं परवाना के अब्बू कहते हैं, “मुझे बहुत ज्यादा दुख है कि मैंने अपनी बेटी को बेचा। मुझे रातों में नींद तक नहीं आती।”

अब्दुल ने बताया कि उन्होंने कई जगह काम ढूँढा और रिश्तेदारों से उधारी ली। इतना ही नहीं, दोनों शौहर-बीवी ने कैंप के बाहर भीख भी माँगी लेकिन कुछ काम नहीं आया, अंत में जाकर बेटी बेचनी पड़ी क्योंकि बाकी लोग भूख से बेहाल थे।

अब्दुल अपनी मजबूरी बताते हुए कहते हैं, “हमारे पास और कोई रास्ता नहीं था। हमारा 8 लोगों का परिवार है। मुझे बाकी लोगों को जिंदा रखने के लिए उसे बेचना ही पड़ा।” बता दें कि परवाना का परिवार अफगान के डिस्प्लेसमेंट कैंप में बडघीस में पिछले 4 साल से रहता है। बहुत शिद्दत के बाद उनको केवल 2 पाउंड मिल पाते हैं। मगर परवाना को बेचने के बाद उन्हें 2 लाख अफगानी मिले। इससे उनका परिवार कुछ माह और गुजार सकेगा।

खबर बताती है कि परवाना ने शुरू-शुरू में तो कोशिश की कि वो अपने माता-पिता का दिमाग बदल दे लेकिन ऐसा नहीं हुआ और उसका टीचर बनने का सपना तब टूट गया जब उसका खरीददार कुर्बान उसके घर पहुँचा और पैसे देकर उसे बुर्का पहनाकर ले गया। अब्दुल बस कुर्बान से ये कह पाया,”ये तुम्हारी दुल्हन है। इसका ख्याल रखना। तुम इसके लिए जिम्मेदार हो। इसे प्लीज मारना मत।” 

परवाना ने दरवाजे पर पैर अड़ा कर खुद को छुड़वाने की नाकाम कोशिशें की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। उसे कार में बैठाया गया और ले जाया गया। अब्दुल के पिता ने बताया कि जब उन्होंने कुर्बान के आगे दरख्वास्त की कि वो उनकी बच्ची को मारें न तो कुर्बान ने जवाब दिया, “मैंने इसके पैसे दिए हैं। मेरा जो मन है वो करूँगा। इससे तुम्हारा मतलब नहीं है।” बता दें कि सिर्फ अफगानिस्तान के हालातों के कारण सिर्फ परवाना ही नहीं बल्कि उसकी 12 साल की बहन भी कुछ माह पहले बेची गई थी। वहीं इनके अलावा 10 साल की लड़की का सौदा उसके परिवारवालों ने अपना कर्जा चुकाने के लिए किया था।  

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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