Sunday, October 17, 2021
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जिस चीनी राजदूत के कारण भारत के खिलाफ उगला जहर, अब उसी के ‘धोखे’ से परेशान हुए PM ओली: नेपाल का संकट गहराया

नेपाल में कम्युनिस्ट पार्टी टूट के कगार पर। वहाँ के प्रधानमंत्री द्वारा संसद को भंग किए जाने की सिफारिश के बाद सरकार पर भी संकट के बादल। इन परिस्थितियों में चीन की राजदूत होउ यांकी फिर से सक्रिय...

नेपाल की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी टूट के कगार पर है और वहाँ के प्रधानमंत्री द्वारा संसद को भंग किए जाने की सिफारिश के बाद सरकार पर भी संकट के बादल छाए हुए हैं। इन परिस्थितियों में काठमांडू में चीन की राजदूत होउ यांकी फिर से सक्रिय हो गई हैं। ‘शीतल निवास’ में होउ यांकी ने मंगलवार (दिसंबर 22, 2020) को नेपाल की राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी से मुलाकात कर के ताजा स्थिति पर चर्चा की। उधर पीएम ओली परेशान हो गए!

ये बैठक लगभग 1 घंटे तक चली। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने संसद को भंग करने की सिफारिश राष्ट्रपति भंडारी को भेज दी थी, जिस पर उन्होंने हस्ताक्षर भी कर दिया है। चीन कम्युनिस्ट पार्टी को टूटने से बचाना चाहता है, लेकिन कहा जा रहा है कि मौजूदा संकट भी उसके ही अत्यधिक हस्तक्षेप का नतीजा है। केपी शर्मा ओली की कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (मार्क्सिस्ट-लेनिनिस्ट) और पुष्प कमल दहल प्रचंड के कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट) के विलय के बाद ‘नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (NCP)’ का गठन हुआ था।

नेपाल: जिस होउ यांकी से थी नजदीकी, अब उसी से नाराज हैं PM ओली?

अभी इसके गठन को 3 साल भी पूरे नहीं हुए हैं। पिछले कुछ महीनों में प्रचंड ने आरोप लगाया है कि ओली ने सत्ता को साझा करने के समझौते का उल्लंघन किया है। होउ यांकी ने इस साल कई मौकों पर दोनों पक्षों में समझौते करा कर स्थिति को शांत किया, लेकिन अब मामला हाथ से निकलता जा रहा है। चीन का कहना है कि वो सिर्फ NCP में टूट के खिलाफ है, प्रधानमंत्री बदलने के विरुद्ध नहीं है।

मंगलवार को भी चीनी राजदूत की नेपाली राष्ट्रपति के साथ बैठक के विषय में किसी प्रकार का आधिकारिक बयान नहीं दिया गया। चीन की तरफ से तो कहा जा रहा है कि ये कोविड वैक्सीन की सप्लाई के सम्बन्ध में था, लेकिन लोग इसे शक की नजर से देख रहे हैं। चीनी दूतावास के प्रवक्ता झांग सी ने कहा था कि चीन नहीं चाहता कि नेपाल की सत्ताधारी पार्टी में टूट हो और नेपाल के नेताओं से गहरे रिश्ते रखने वाला चीन चाहता है कि सभी एकजुट होकर निदान निकालें।

फ़िलहाल नेपाल में 4 पूर्व व वर्तमान प्रधानमंत्रियों के बीच खींचतान चल रही है। ओली और प्रचंड के अलावा माधव कुमार नेपाल और झलनाथ खनाल भी बैठकों में हिस्सा ले रहे हैं। ये सभी NCP पर अपनी पकड़ बना कर रखना चाहते हैं। प्रचंड के गुट का पार्टी की स्टैंडिंग कमिटी और सेंट्रल कमिटी पर कब्ज़ा है और वो माधव को फिर से नेपाल का प्रधानमंत्री बनाना चाहते हैं। माधव फ़िलहाल पार्टी के सह-अध्यक्ष हैं।

वहीं पीएम ओली का मत है कि उनके बिना पार्टी की जो भी बैठकें हो रही हैं, उन्हें वैधता नहीं दी जा सकती है। उन्होंने एक बैठक बुला कर सेंट्रल कमिटी में अपने गुट के नेताओं को भी घुसाया। नवंबर में होउ यानि और ओली की बैठक से कोई निष्कर्ष नहीं निकल पाए थे। ओली कह रहे हैं कि वो बिना किसी बाहरी शक्ति के हस्तक्षेप के चुनौतियों से निपट लेंगे। लेकिन, चीन अपना नियंत्रण किसी भी हाल में कम नहीं करना चाहता।

इसी साल जुलाई में नेपाल में भारतीय समाचार चैनलों के लिए सिग्नल बंद कर दिए गए थे। यह कदम कुछ भारतीय टीवी चैनलों द्वारा नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और चीनी दूत नेपाल होउ यांकी के बारे में ‘अपमानजनक’ रिपोर्ट के प्रसारण के बाद आया था। नेपाल सरकार ने कहा था कि नेपाल के नेताओं के चरित्र हनन में लिप्त कुछ चैनलों के कारण यह फैसला लिया गया था। अब इसी होउ यांकी से ओली खुश नहीं हैं।

 

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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