पाकिस्तान का अफगानिस्तान में हमले को लेकर बयान
हमले को लेकर पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय ने कहा है कि सीमा पार 7 पाकिस्तानी तालिबान यानी टीटीपी के ठिकानों को निशाना बनाया गया। पाकिस्तान का कहना है कि यहाँ इस्लामिक स्टेट खोरासान यानी आईएसकेपी के लोग भी मौजूद थे। पाकिस्तान टीटीपी को हाल में हुए इस्लामाबाद की इमान बारगाह, बाजौर और बन्नू में हुए आत्मघाती हमलों का जिम्मेदार बताता रहा है।
रमजान में पाकिस्तानी स्टाइक पर अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने कहा है कि सही समय आने पर वो इसका जवाब देंगे। अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि ये राष्ट्रीय संप्रभुता, इंटरनेशनल कानून, अच्छे पड़ोसी के सिद्धांतों और इस्लामिक मूल्यों का उल्लंघन है।
स्ट्राइक रिहायशी इलाकों में किया गया और लोगों के घरों को निशाना बनाया गया। मंत्रालय ने कहा कि ये हमले पूर्वी अफगान प्रांतों नांगरहार और पक्तिका के इलाकों में हुआ। इसमें एक मदरसे को भी निशाना बनाया गया।
रक्षा मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान में जो हमले हुए, जिसमें आम लोगों और धार्मिक केंद्रों को निशाना बनाया गया, वह पाकिस्तानी सेना की खुफिया और सुरक्षा नाकामियों का सबूत हैं। उन्होंने कहा कि बार-बार होने वाले हमले पाकिस्तानी जनरल की नाकामियों को ही दर्शाते हैं, जो खुद के घर को सुरक्षित नहीं कर पा रहे।
पाकिस्तान ने दावा किया है कि उसके पास इस्लामाबाद में हुए हमलों को लेकर ‘पक्के सबूत’ हैं। ये हमला अफगानिस्तान की शह पर टीटीपी ने करवाया है। पाकिस्तान के मुताबिक, हमले की जिम्मेदारी भी टीटीपी और आईएसकेपी ने ली थी।
पाकिस्तान को जवाब देने की तैयारी कर रहा अफगानिस्तान
नंगरहार के एक सीनियर पुलिस अधिकारी सैयद तैयब हमाद ने अफगान सरकारी टेलीविज़न पर बताया कि मारे गए 18 लोगों में औरतें और बच्चे भी शामिल हैं। सरकारी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रविवार सुबह भी पीड़ितों की लाशें मलबे के नीचे से निकाली जा रही थीं।
अफगानिस्तान फिलहाल हमले में हुए नुकसान का आकलन कर रहा है। इसके बाद तालिबानी नेतृत्व ने संकेत दिए हैं कि जवाबी कार्रवाई की जाएगी। तालिबान का साफ मानना है कि पाकिस्तान ने अफगानी सीमा का उल्लंघन किया है और अफगानिस्तान को जवाबी कार्रवाई करने का अधिकार है। सही समय आने पर हमला किया जाएगा।
आगे की रणनीति पर लगातार काबूल और कांधार में तालिबानी आलाधिकारी चर्चा कर रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, तालिबान का मानना है कि पाकिस्तानी हमलों पर तुरंत में कुछ भी करना जल्दीबाजी होगी, लेकिन अफगानिस्तान जरूर बदला लेगा।
पाकिस्तान का दावा है कि ये एयरस्ट्राइक पाकिस्तान में एक महीने से चल रहे जानलेवा हमलों के बाद हुए हैं। हाल ही में पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिम में हिस्से में एक लेफ्टिनेंट कर्नल समेत दो फौजियों की हत्या की गई थी।
इस महीने की शुरुआत में, पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में एक शिया मस्जिद में हुए सुसाइड ब्लास्ट में दर्जनों लोग मारे गए थे।
पाकिस्तान के इन्फॉर्मेशन मिनिस्ट्री ने रविवार (22 फरवरी 2026) को कहा कि देश के पास ‘पक्के सबूत’ हैं कि फरवरी के हमले टीटीपी ने अपने अफगानिस्तान में मौजूद नेता और हैंडलर्स के कहने पर किए थे।
पिछले साल 7-8 अक्टूबर की रात पाकिस्तान ने ओकरजई क्षेत्र में कार्रवाई की थी। इस दौरान पाकिस्तान ने 19 विद्रोहियों को मार गिराने का दावा किया। इसके बाद अफगानिस्तान ने डूरंड लाइन पार कर पाकिस्तान में घुसकर चौकियों पर हमला किया था। पाकिस्तानी एयरस्टारइक के खिलाफ टीटीपी ने पाकिस्तान की कई सैन्य चौकियों पर कब्जा कर लिया था। पाकिस्तानी फौजी चौकियों पर तालिबान लड़ाकों के कब्जे के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल भी हुए थे।
डूरंड रेखा और अफगानिस्तान- पाकिस्तान विवाद
डूरंड रेखा अफ़ग़निस्तान और पाकिस्तान के बीच लगभग 2,600 किलोमीटर लंबी सीमा है जो 1893 में ब्रिटिश भारत और अफ़ग़ानिस्तान के बीच स्थापित की गई थी। अंग्रेजों के बनाए इस सीमा रेखा को अफगानिस्तान नहीं मानता है। इस सीमा रेखा के एक ओर अफगानिस्तान के 12 प्रांत हैं जबकि दूसरी ओर पाकिस्तान के खैबर पखतूनख्वा, बलूचिस्तान और गिलगित-बाल्टिस्तान। दोनों देशों के लोग इस खुली सीमा के आर-पार आते जाते हैं और परंपरागत रूप से जुड़े हुए हैं।
धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक तौर पर काफी समानताएँ हैं। यही वजह है कि खैबर पखतूनख्वा, बलूचिस्तान और गिलगित जैसे इलाकों में पाकिस्तानी फौज के खिलाफ लोग विद्रोह कर रहे हैं। यहाँ पाकिस्तानी फौज का जुर्म सुर्खियों में भी रहा है। महिलाओं- बच्चों के साथ अमानवीय हरकत, पुरुषों का लगातार गायब होने को लेकर लोग पाकिस्तान के फौज को जिम्मेदार मानते हैं।
अफगानिस्तान के लिए यह एक संवेदनशील मामला है। यहाँ कोई भी शासन में आ जाए, वह डूरंड रेखा को नहीं मानेगा, क्योंकि ये भावनाओं से जुड़ा है। अफगानिस्तान ने पश्तून प्रभाव वाले क्षेत्र खैबर पख्तूनख्वाह को पश्तूनिस्तान बनाने का भी समर्थन किया है।
पाकिस्तान ने जब पख्तूनख्वाह सीमा पर वीजा और पासपोर्ट अनिवार्य कर दिया, तो पख्तूनों ने जबरदस्त प्रदर्शन किया।
ब्रिटिश विदेश सचिव सर मोर्टिमर डूरंड ने 1893 में अफगानिस्तान और भारत के बीच सीमा की स्थापना की थी और पख्तून प्रांत को अलग कर दिया था। दोनों देशों के बीच फैली हुई लंबी डूरंड रेखा पख्तून जनजातीय क्षेत्रों से होकर गुजरती है और उन्हें दो अलग-अलग मुल्कों में विभाजित करती है। पाकिस्तान बनने के बाद डूरंड रेखा उसे विरासत में मिली, लेकिन इस पर कोई औपचारिक समझौता या मान्यता नहीं है।
पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग (एचआरसीपी) के उपाध्यक्ष काशिफ पानेजई के मुताबिक, सीमा पर जो इलाका बँटा हुआ है, वह सिर्फ जमीन का टुकड़ा नहीं है, वह उनका घर है। उन्होंने कहा, “डूरंड रेखा कई गाँवों को आधे में विभाजित करती है और कई लोगों को उनके कृषि वाली भूमि से विभाजित करती है। यह जनजातियों और अन्य समूहों को बीच से बाँटता है।”
डूरंड रेखा के बावजूद कई इलाके ऐसे भी हैं, जहाँ पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच की रेखा अस्पष्ट है। ये दुर्गम और सुलेमान पर्वत श्रृंखला वाला इलाका है। ओरकजई, स्पिन बोल्डक से गजनी तक कई क्षेत्र ऐसे हैं। इसको लेकर भी दोनों देशों में तनाव रहता है।


