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बांग्लादेश में तलवार के दम पर हिंदुओं का हो रहा धर्मांतरण: ISKCON के एक और संत ने उठाई यूनुस सरकार के खिलाफ आवाज, महिलाओं में कट्टरपंथी ‘जमात’ का डर बसा

इन्हीं में से एक चटगाँव के मेथोरपट्टी में रहने वालीं सुमी के बेटे अमन दास हैं। उन्हें 27 नवंबर की रात सेना के जवान घर से पकड़कर ले गए थे और उसे आज तक नहीं छोड़ा है। सुमी कहती हैं, "हम कोतवाली जाते हैं तो बच्चों से मिलने नहीं दिया जाता। आज 15 दिन हो गए।" न्याय नहीं मिलने की आशंका देखते हुए सुमी कहती हैं, "पुलिस हमें गोली मार दे। हम परेशान हो गए हैं।"

कोलकाता इस्कॉन के एक संत राधारमण दास का कहना है कि बांग्लादेश में लोगों को तलवार की नोक पर मुस्लिम बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जो लोग इसके लिए तैयार नहीं हो रहे हैं, उन्हें धमकाया जा रहा है। उन्होंने बांग्लादेश में वर्तमान में सत्ता में मौजूद कट्टरपंथियों पर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया है। बता दें कि बांग्लादेश में ISKCON के एक संत चिन्मय दास को गिरफ्तार किया गया है।

राधारमण दास ने इंडिया टुडे से कहा, “हमें रिपोर्ट मिली है कि बांग्लादेश में धर्म परिवर्तन के लिए लोगों धमकाया जा रहा है। धर्म बदलने से इनकार करने पर उन्हें धमकाया जा रहा है और तलवारें दिखाई जा रही हैं।” उन्होंने एक लड़की के बारे में भी बताया, जो धमकी और उत्पीड़न से तंग आकर बांग्लादेश से भारत भाग आई थी। वह लड़की नदी पार करके भारत में घुस आई थी।

दास ने बताया, “एक लड़की नदी पार करके भारत भाग आई। उसे और उसके परिवार को धमकाया गया था। हम उसे भारत सरकार से नागरिकता देने और उसके परिवार को सुरक्षा प्रदान करने का आग्रह करेंगे।” उन्होंने आगे कहा, “चिन्मय दास की अदालती कार्रवाई में जानबूझकर देरी की जा रही है।” बता दें कि चिन्मय दास को 25 नवंबर को गिरफ्तार किया गया था। इस मामले की सुनवाई 2 जनवरी को होगी।

बांग्लादेश की सरकार ने चिन्मय दास पर बांग्लादेश का झंडा जलाने का आरोप लगाते हुए देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया है। इतना ही नहीं, बांग्लादेश के अधिकारियों ने इस्कॉन के कई बैंक खातों को सीज कर दिया है और उसके पदाधिकारियों को निशाना बनाया है। अगस्त में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ नरसंहार की घटनाएँ लगातार आ रही हैं।

जारी है पुलिस का प्रताड़ना

बांग्लादेश में पुलिस का प्रताड़ना जारी है। वहाँ हाल ही में चटगाँव में हिंदुओं पर किए हमले को कई चिह्न आज भी दिख रहे हैं। भास्कर की ग्राउंड रिपोर्ट में कहा गया है कि कई मंदिरों में आज भी भगवान की प्रतिमा टूटी हुई नजर आ रही है। वहीं, दंगा फैलाने का आरोप लगाकर कई हिंदू युवकों को पुलिस टाँगकर थाने ले गई, जो आज तक घर नहीं लौटे।

इन्हीं में से एक चटगाँव के मेथोरपट्टी में रहने वालीं सुमी के बेटे अमन दास हैं। उन्हें 27 नवंबर की रात सेना के जवान घर से पकड़कर ले गए थे और उसे आज तक नहीं छोड़ा है। सुमी कहती हैं, “हम कोतवाली जाते हैं तो बच्चों से मिलने नहीं दिया जाता। आज 15 दिन हो गए।” न्याय नहीं मिलने की आशंका देखते हुए सुमी कहती हैं, “पुलिस हमें गोली मार दे। हम परेशान हो गए हैं।”

एक अन्य हिंदू महिला रेशमा कहती हैं कि अब घर से बाहर निकलने से डर लगता है। वो कहती हैं, “हमें डर लगता है कि जमात (बांग्लादेश का कट्टरपंथी संगठन) के लोग घर में ना घुस जाएँ। हमारे बच्चों पर हमला न कर दें। सरकार भी हमारी कोई मदद नही कर रही।” वहीं, आसमां नाम की एक हिंदू महिला कहती है, “हमारे लोग जहाँ जाते हैं, उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाता है।”

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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