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हम पाकिस्तान से तो बात कर सकते हैं, लेकिन ‘टेररिस्तान’ से नहीं, जिहाद नीति नहीं हो सकता: विदेश मंत्री

"हमारे ऊपर मुंबई हमला हुआ। मुंबई कश्मीर का हिस्सा नहीं है। तो अगर पाकिस्तानी जिहादी उन राज्यों और क्षेत्रों पर हमला कर सकते हैं, जो कश्मीर से बहुत दूर हैं, तो हमें यह मानना होगा ही कि यह समस्या (महज़ कश्मीर से) ज़्यादा बड़ी है।"

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पाकिस्तान से वार्ता करने के बारे में कहा कि हिंदुस्तान को पाकिस्तान से बात करने में वैसे तो कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान से ‘टेररिस्तान’ बन चुका है। उन्होंने पाकिस्तान पर कश्मीर में जिहाद का बाकायदा ‘उद्योग’ स्थापित करने का आरोप भी लगाया। “हिंदुस्तान को पाकिस्तान से बात करने में कोई समस्या नहीं है। लेकिन हमें ‘टेररिस्तान’ से बात करने में समस्या है। और उन्हें (बात करने के लिए) पाकिस्तान होना पड़ेगा, टेररिस्तान नहीं।”

‘आतंक की फैक्ट्री केवल कश्मीर नहीं, पूरे हिंदुस्तान के लिए’

प्रधानमंत्री मोदी के अमेरिका दौरे पर न्यूयॉर्क में बात करते हुए जयशंकर ने कहा कि पाकिस्तान की 370 के मुद्दे पर जो प्रतिक्रिया आई, वह इसीलिए थी कि उसने जिहाद का पूरा उद्योग खड़ा किया था कश्मीर मुद्दे के जवाब में। वह यही नहीं रुके, उन्होंने कहा कि उनके हिसाब से तो इसका निशाना केवल कश्मीर ही नहीं, पूरा हिंदुस्तान है।

उन्होंने हर बात पर कश्मीर को घसीटने के लिए भी पाकिस्तान को लताड़ा। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है हिंदुस्तान-पाकिस्तान बाकी हर बात पर सहमत हैं, उनके बीच बाकी के रिश्ते बहुत अच्छे हैं, और केवल कश्मीर ही दोनों के अच्छे संबंधों के बीच आता है। “हमारे ऊपर मुंबई हमला हुआ। मुंबई कश्मीर का हिस्सा नहीं है। तो अगर पाकिस्तानी जिहादी उन राज्यों और क्षेत्रों पर हमला कर सकते हैं, जो कश्मीर से बहुत दूर हैं, तो हमें यह मानना होगा ही कि यह समस्या (महज़ कश्मीर से) ज़्यादा बड़ी है।”

‘जिहाद आपकी नीति नहीं हो सकता’

जयशंकर से पूछा गया कि पाकिस्तान की जिहाद से लड़ने की बातों के बारे में उनकी क्या प्रतिक्रिया है, तो उन्होंने दोटूक पाकिस्तान पर खुद ही जिहाद को अपनी सरकारी नीति बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मुद्दा महज़ कश्मीर नहीं, उससे बड़ा है। “पाकिस्तान को यह मानना होगा कि उन्होंने जो मॉडल अपने लिए बनाया है (जिहाद का), वह काम नहीं कर रहा है। आज की तारीख में आप जिहाद को सरकारी तंत्र की वैधता-प्राप्त नीति नहीं बना सकते। यह मुद्दे की जड़ है।”

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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