भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच लंबे समय से चल रहा FTA समझौते पर बातचीत अब अंतिम दौर की ओर बढ़ चुकी है। दोनों पक्षों की 14वीं वार्ता 6 से 10 अक्टूबर तक ब्रसेल्स में होगी। इस समझौते को दोनों देश संतुलित और परस्पर लाभकारी बताकर आगे बढ़ा रहे हैं। यूरोपीय कमीशन की प्रेसीडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने पीएम मोदी के जन्मदिन पर न सिर्फ उन्हें बधाई दी, साथ ही उन्होंने ये भी बताया कि इस साल के आखिर तक दोनों पक्षों में FTA समझौता पूरा हो जाएगा।
Now is the time to double down on partnerships rooted in shared interests and guided by common values.
— Ursula von der Leyen (@vonderleyen) September 17, 2025
With our new EU–India strategy, we are taking our relationship to the next level.
And we are committed to finalising our trade agreement by end of the year.
पीएम मोदी ने भी उर्सुला वॉन डेर लेयेन की शुभकामनाओं को लिए शुक्रिया कहा। साथ ही कहा कि भारत और यूरोपीय यूनियन मिलकर आगे का रास्ता तय करेंगे।
Always a pleasure to speak to President Ursula von der Leyen. Thank you for your warm birthday greetings. Delighted to know about the 'New Strategic EU-India Agenda' adopted today. India is ready to take the India-EU relationship to the next level. It is our shared commitment,…
— Narendra Modi (@narendramodi) September 17, 2025
कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल ने भरोसा जताया है कि भले ही हर मुद्दे पर सहमति न बने, लेकिन नतीजा एक बेहतरीन समझौता होगा। इससे पहले 13वाँ दौर भारत में हुआ था, जिसमें यूरोपीय संघ के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया था। यूरोप की माँग मुख्य रूप से ऑटोमोबाइल क्षेत्र में शुल्क रियायतों की है। भारत इस समय आयातित गाड़ियों पर 100 प्रतिशत से अधिक टैक्स लगाता है।
ब्रिटेन के साथ हुए हालिया समझौते में भारत ने ऑटो कंपनियों को कुछ रियायतें दी थीं, अब EU भी वैसा ही चाहता है। फॉक्सवैगन और मर्सिडीज-बेंज जैसी कंपनियाँ पहले से भारत में मौजूद हैं और रियायतों के बाद उन्हें और बड़ा अवसर मिलेगा। यूरोपीय संघ का मानना है कि यह साझेदारी केवल व्यापार तक सीमित नहीं है।
बड़े पैमाने पर निवेश आएगा और भारत में हजारों नई नौकरियाँ पैदा होंगी। इसके लिए EU ने हाल ही में नया रणनीतिक एजेंडा भी पेश किया है। इसमें पाँच बड़े लक्ष्य तय किए गए हैं, व्यापार और निवेश को बढ़ाना, प्रतिभा व कौशल विकास, सप्लाई चेन की सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और रक्षा सहयोग।
खास बात यह है कि इस साल के अंत तक FTA को अंतिम रूप देने की घोषणा भी की गई है। रणनीति में सुरक्षा और रक्षा को विशेष जगह मिली है। हिंद महासागर और इंडो-पैसिफिक में समुद्री सुरक्षा, साइबर डिफेंस, आतंकवाद-रोधी सहयोग और रक्षा उद्योग में तकनीकी साझेदारी इसके अहम हिस्से हैं।
सूचना सुरक्षा पर भी नई बातचीत शुरू होगी। बदलते वैश्विक हालात में EU चीन जैसी अर्थव्यवस्थाओं पर निर्भरता कम करना चाहता है और भारत इसमें भरोसेमंद साथी माना जा रहा है।
इसी बीच अमेरिका का रवैया भी बदला है। पहले जहाँ वह भारत के साथ व्यापार और रणनीतिक मुद्दों पर सख्ती दिखा रहा था, वहीं अब वह भी नरमी बरत रहा है। इंडो-पैसिफिक में चीन का दबदबा और बदलते भू-राजनीतिक हालात ने अमेरिका को मजबूर किया है कि वह भारत को मजबूत सहयोगी माने।


