श्रीलंका में चक्रवात दितवाह इतिहास की सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदा बनकर आया। श्रीलंकाई राष्ट्रपति अनुर कुमार दिसानायके ने इसे ‘सबसे चुनौतीपूर्ण विपदा’ घोषित किया। डिजास्टर मैनेजमेंट सेंटर (डीएमसी) के अनुसार, 25 जिलों में 1.55 मिलियन लोग प्रभावित हुए, जिसमें 2,33,000 लोग 1,441 आश्रय स्थलों में विस्थापित हैं।
565 घर पूरी तरह नष्ट हो गए और 20,271 आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए, जबकि केलानी नदी के किनारे बाढ़ ने कोलंबो जैसे शहरों तक को जलमग्न कर दिया। श्रीलंका की पहाड़ियों में भूस्खलन और पूर्वी राज्यों में बाढ़ के कारण बुनियादी ढाँचा ध्वस्त हो गया है। सड़कें, पुल और बिजली आपूर्ति बाधित रही।
यूएन ICEF ने 2,75,000 बच्चों को प्रभावित बताया, जबकि डब्ल्यूएफपी ने राहत कार्यों का परेशानी आने की बात कही। मौसम सुधरने के बावजूद, अलग-थलग समुदायों तक पहुँचना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
दुनिया भर से राहत का आया वादा, भारत ने सबसे पहले पहुँचाई मदद
राहत कार्यों में डीएमसी और नेशनल डिजास्टर रिलीफ सर्विस सेंटर समन्वय कर रहे हैं, जिसमें खोज-बचाव, भोजन वितरण और चिकित्सा सहायता शामिल है। श्रीलंका की मदद करने के लिए यूके, चीन और अन्य देशों ने सहायता का वादा किया, लेकिन भारत ने सबसे तेज और बड़े पैमाने पर योगदान दिया।
भारत ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए ऑपरेशन सागर बंधु शुरू किया। इसके तहत 28 नवंबर 2025 से 53 टन राहत सामग्री, NDRF की 80 सदस्यीय टीमें, IAF हेलीकॉप्टर और सेना कंटिंजेंट भेजे। आईएएफ ने 5.5 टन राहत पैकेट्स गिराए, दर्जनों को आपदा से निकाला और मंडारम नुवारा में 2,000 किलोग्राम आपूर्ति पहुँचाई।

NDRF ने पुत्तलम में 800 लोगों की मदद की, जिसमें गर्भवती महिलाएँ और घायल शामिल थे। आईएनएस सुकन्या ने त्रिंकोमाली में आपूर्ति पहुँचाई, जबकि 2,000 से अधिक भारतीय नागरिकों को भी सुरक्षित निकाला गया।

भारतीय उच्चायुक्त संतोष झा ने सेडावट्टा में एनडीआरएफ कार्यों की समीक्षा की, जहाँ 6-10 फीट पानी में घर-घर खोज चल रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रीलंकाई राष्ट्रपति अनुर कुमार दिसानायके से बात की। कुल मिलाकर ‘नेबरहुड फर्स्ट’ और ‘विजन महासागर’ नीति के तहत भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने 10 टन राहत आपूर्ति की पुष्टि की।
श्रीलंकाई मीडिया में भारत की मदद की प्रशंसा
भारत से मदद मिलने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से बातचीत कर श्रीलंका के राष्ट्रपति दिसानायके ने कहा कि भारत की त्वरित मदद ने राहत और बचाव कार्यों को मजबूती दी और श्रीलंकाई लोगों तक तेजी से मदद पहुँचाने में अहम भूमिका निभाई।
उन्होंने विशेष रूप से ‘रेस्क्यू टीमों और राहत सामग्री की तेज तैनाती’ की सराहना की और कहा कि श्रीलंका की जनता भारत की समय पर और प्रभावी प्रतिक्रिया की प्रशंसा कर रही है।

पीएमओ और श्रीलंका सरकार की आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियों के मुताबिक, राष्ट्रपति ने यह भी रेखांकित किया कि भारत ने सिर्फ शुरुआती आपातकाल में ही नहीं, बल्कि पुनर्वास और पुनर्निर्माण के अगले चरणों में भी साथ देने का आश्वासन दिया है, जिसे कोलंबो अत्यंत सकारात्मक संकेत मान रहा है।
श्रीलंकाई दैनिक अखबार डेली मिरर ने भारत की चिकित्सा टीम को जाफेला क्षेत्र में जीवनरक्षक बताया, जहां बाढ़ प्रभावित इलाके में बिना बिजली के पाँच दिनों बाद आरोग्य मैत्री टीम ने इलाज शुरू किया।
इसी अखबार ने ऑपरेशन सागर बंधु के तहत भारत द्वारा 53 टन राहत सामग्री भेजने का उल्लेख किया, जिसमें एनडीआरएफ और वायुसेना की भूमिका प्रमुख रही। डेली न्यूज ने लगातार रिपोर्ट्स में भारत की खोज-बचाव और चिकित्सा सहायता जैसे जाफेला में मेडिकल कैंप और साइक्लोन दितवाह से प्रभावित क्षेत्रों में सहयोग की सराहना की।

श्रीलंका के विशेष वर्ग जैसे सेलेब्रिटीज और क्रिकेटर्स के साथ आम लोगों ने भी सोशल मीडिया के जरिए भारत और यहाँ से भेजी गई मदद की सराहना की। रेडिट पर एक यूजर ने लिखा, “दितवाह चक्रवात में प्रभावित लोगों और इाकों में मदद पहुँचाने के लिए भारत और यहाँ के लोगों का दिल से आभार। आप सच्चे दोस्त हैं।”


पाकिस्तान की आलोचना और एक्सपायर्ड सामान
पाकिस्तान ने दावा किया कि भारत ने श्रीलंका के लिए उसकी सहायता विमान को एयरस्पेस न देकर रोका, लेकिन भारत ने इसे खारिज कर तुरंत मंजूरी देने की बात कही। विदेश कार्यालय ने एक्स पर कहा कि सी-130 विमान 60 घंटे से अधिक इंतजार कर रहा और भारत की आंशिक मंजूरी से काम नहीं हो पा रहा था।
पाकिस्तानी उच्चायोग ने भारत पर ‘शेनानिगन्स’ का आरोप लगाया, जबकि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने राहत अभियान का आदेश दिया। भारत ने इस दावे को ‘हास्यास्पद’ बताकर खारिज किया। तथ्यों के साथ इस बात को सिद्ध कर दिया कि एयरस्पेस के लिए माँगी गई मंजूरी महज 4 घंटे में ही दे दी गई थी।
Our response to media queries regarding a statement by Pakistan on overflight clearance⬇️
— Randhir Jaiswal (@MEAIndia) December 2, 2025
? https://t.co/RyOD1UDR1o pic.twitter.com/2JO7RhVqfi
हालाँकि इस पर मीडिया ने रिपोर्ट किया कि भारत ने पाकिस्तानी उड़ान के लिए देरी से एयरस्पेस खोला। उसने लिखा कि पाकिस्तान ने समुद्री मार्ग से 200 टन सहायता भेजी, लेकिन हवाई अभियान में देरी हुई।
पाकिस्तान के नापाक इरादों के बाद उसकी खिल्ली खुद तब उड़ गई जब श्रीलंका को भेजी गई राहत सामग्री में एक्सपायर्ड दवाएँ और खाद्य सामग्री मिली। इनकी एक्सपायरी डेट अक्टूबर 2024 अंकित थी।
इससे जुड़ी फोटो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई और पाकिस्तान को कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा। नेटिजनंस ने ‘Have Some Shame’ जैसे हैशटैग ट्रेंड कर पाकिस्तान को आड़े हाथों लिया। श्रीलंका ने भी इस पर असंतोष जताया।
Yesterday Pakistan cried that India was blocking its relief for Sri Lanka. Today we learn the ‘relief’ was expired junk, solely meant for PR. Colombo has conveyed its displeasure to Islamabad.
— Riccha Dwivedi (@RicchaDwivedi) December 2, 2025
A disaster of a country trying to provide relief. "South Asian" solidarity and all. pic.twitter.com/04C5P5loSz
कुल मिलाकर अगर कहा जाए तो आपदा में जहाँ एक ओर भारत ने आगे बढ़कर श्रीलंका की न केवल मदद की, बल्कि ये भी साबित किया कि वह एक बेहतर पड़ोसी देश की भूमिका निभाने में कभी पीछे नहीं रहेगा।
वहीं दूसरी ओर, पाकिस्तान ने इस संकट के समय में भी अपनी असलियत दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। भारत की बेइज्जती करने की कोशिश में पाकिस्तान को इस बार भी मुँह की खानी पड़ी जब खुद के भेजे गए राहत सामग्री की एक्सपायरी सामने आई। इसके साथ ही दुनिया को ये बी पता चला कि पाकिस्तान वहीं हाथी है जिसके खाने के दाँत अलग और दिखाने के दाँत अलग हैं जिससे आगाह रहने की आवश्यकता है।


