Thursday, April 2, 2026
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भारत-ओमान के बीच CEPA व्यापार समझौता, टैरिफ हटने से ट्रेड को मिलेगी मजबूती: समझें- ऐसी साझेदारियों से देश को कैसे मजबूत बना रही मोदी सरकार

पीएम मोदी ने ओमान की रणनीतिक स्थिति को खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी), पूर्वी यूरोप, मध्य एशिया और अफ्रीका के लिए द्वार बताया। भारत-ओमान के बीच CEPA समझौता भारत की नींव को मजबूत करने वाला है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओमान यात्रा ने भारत और ओमान के बीच सदियों पुराने रिश्तों को नई ऊँचाई दी है। गुरुवार (18 दिसंबर 2025) को मस्कट में ऐतिहासिक समझौते के तहत भारत और ओमान ने व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए) पर हस्ताक्षर किए।

भारत-ओमान के बीच CEPA समझौता न केवल दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देगा, बल्कि भारत की वैश्विक आर्थिक रणनीति को मजबूत बनाएगा। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे ‘हमारे साझा भविष्य का ब्लूप्रिंट’ करार दिया, जो आने वाले दशकों तक दोनों देशों के संबंधों को आकार देगा।

यह समझौता ओमान का दूसरे देश के साथ दूसरा मुक्त व्यापार समझौता है और लगभग 20 वर्षों बाद उनका पहला ऐसा समझौता है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि इससे वस्त्र, खाद्य प्रसंस्करण, ऑटोमोबाइल, रत्न-आभूषण, कृषि रसायन, नवीकरणीय ऊर्जा और ऑटो पार्ट्स जैसे क्षेत्रों में अपार संभावनाएँ खुलेंगी।

भारत-ओमान व्यापार वर्तमान में लगभग 10.5 अरब डॉलर (949.0 अरब रुपए) का है, जिसमें भारत का निर्यात 4.1 अरब डॉलर (370.6 अरब रुपए) और आयात 6.6 अरब डॉलर (596.5 अरब रुपए) है। ऊर्जा और उर्वरक आयात प्रमुख हैं, लेकिन यह समझौता निर्यात को बढ़ाकर व्यापार संतुलन सुधारने में मदद करेगा। ओमान के वाणिज्य मंत्री कैस अल यूसुफ ने बताया कि भारत ओमान का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन चुका है और भारतीय निवेश 5 अरब डॉलर (451.9 अरब रुपए) से अधिक हो गया है।

पीएम मोदी की यह यात्रा दोनों देशों के 70 वर्षों के राजनयिक संबंधों की वर्षगाँठ पर हुई, जो भारत की जी-20 अध्यक्षता के दौरान ओमान को विशेष अतिथि बनाने के फैसले को और मजबूत करती है। आइए, इस समझौते को विस्तार से समझते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी की ओमान यात्रा और समझौते पर हस्ताक्षर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 18 दिसंबर 2025 को मस्कट पहुँचे, जहाँ ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक ने उनका स्वागत किया। यह यात्रा भारत की तीन देशों की यात्रा का आखिरी चरण है और सीईपीए पर हस्ताक्षर का मुख्य आकर्षण रहा। हस्ताक्षर समारोह में प्रधानमंत्री मोदी और सुल्तान के अलावा वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल तथा ओमानी समकक्ष कैस अल यूसुफ मौजूद रहे।

पीएम मोदी ने मस्कट बिजनेस समिट में कहा, “यह समझौता हमें 21वीं सदी में नई ऊर्जा और विश्वास देगा।” उन्होंने ऐतिहासिक समुद्री संबंधों का जिक्र किया, जैसे लोथल बंदरगाह के माध्यम से हुए व्यापार के बारे में। पीएम मोदी ने ओमान की रणनीतिक स्थिति को खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी), पूर्वी यूरोप, मध्य एशिया और अफ्रीका के लिए द्वार बताया। उनकी इस यात्रा के दौरान पॉवर, इन्फ्रा जैसे सहयोग के चार स्तंभों पर चर्चा हुई।

भारतीय कंपनियों ने ओमान के सोहर और सलाला मुक्त व्यापार क्षेत्रों में 7.5 अरब डॉलर (677.8 अरब रुपए) से अधिक निवेश किया है, जो 6,000 से ज्यादा संयुक्त उद्यमों का आधार है।

यह समझौता नवंबर 2023 में शुरू हुई वार्ताओं का परिणाम है और कुछ महीनों में लागू होगा। इससे पहले कैबिनेट ने 12 दिसंबर को इसे मंजूरी दी थी। ओमान ने पाँच वर्षीय मल्टीपल एंट्री ‘इंडिया बिजनेस कार्ड’ वीजा जारी करने का वादा किया है, जो निवेश वाली कंपनियों के अधिकारियों के लिए 15 दिनों में मिलेगा। तेल-गैस और बंदरगाह परियोजनाओं के लिए वर्क परमिट 10 दिनों में जारी होंगे।

भारत-ओमान सीईपीए (CEPA) समझौता क्या है?

भारत-ओमान के बीच सीईपीए यानी व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता एक व्यापार समझौता (Trade Agreement) है, जो वस्तुओं, सेवाओं और निवेश को कवर करता है। यह सीमा शुल्क, गैर-शुल्क बाधाओं को कम या समाप्त करता है, जिससे व्यापार आसान होता है। ओमान में वर्तमान में कुछ उत्पादों पर 100 प्रतिशत तक शुल्क है, जो भारत के औद्योगिक निर्यात को प्रभावित करता है। यह समझौता 95 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर बिना किसी चार्ज के लेन-देन को तय करेगा।

भारत और ओमान के बीच यह समझौता बौद्धिक संपदा, सरकारी खरीद, डिजिटल व्यापार, मूल नियम, सीमा शुल्क सहयोग, स्वच्छता और पादप संगरोध उपाय, तकनीकी व्यापार बाधाएँ, विवाद निपटान और छोटे-मध्यम उद्यमों के समर्थन जैसे मुद्दों को शामिल करता है। भारत दवाओं के लिए तेज मँजूरी चाहता है, जो यूएसएफडीए या यूके एमएचआरए जैसी एजेंसियों से पास हो चुकी हों। ओमान के लिए यह 20 वर्षों बाद पहला ऐसा समझौता है, जो उनकी अर्थव्यवस्था को विविधीकृत करेगा।

भारत -ओमान के बीच CEPA समझौता, प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो साभार: AI Grok)

सीईपीए वैश्विक आर्थिक पुनर्संरचना के समय आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती और व्यापार विविधीकरण को बढ़ावा देगा। ओमान का बाजार छोटा है (जनसंख्या 50 लाख, जीडीपी 115 अरब डॉलर (10,393.7 अरब रुपए)), लेकिन इसकी भौगोलिक स्थिति इसे महत्वपूर्ण बनाती है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) के अनुसार, यह भारतीय निर्यात की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाएगा।

CEPA से भारत को क्या फायदा होगा

यह समझौता भारत को कई स्तरों पर फायदा पहुँचाएगा। सबसे पहले तो इससे भारत के एक्सपोर्ट में बढ़ोतरी होगी। इसमें भारत पेट्रोलियम, मशीनरी, चावल, लोहा-इस्पात जैसे उत्पादों का एक्सपोर्ट बढ़ा पाएगा। CPEA की वजह से इन पर लगने वाला भारी टैक्स खत्म होगा, जिसके भारत का एक्सपोर्ट 404 अरब डॉलर तक पहुँच जाएगा। इसके साथ ही कपड़े, जूते, ऑटोमोबाइल, रत्न-आभूषण, नवीकरणीय ऊर्जा और ऑटो पार्ट्स के क्षेत्र में भी नए रास्ते खुलेंगे।

निवेश में होगा फायदा: भारतीय कंपनियाँ ओमान के ग्रीन इस्पात, ग्रीन अमोनिया, एल्यूमीनियम और लॉजिस्टिक्स में निवेश बढ़ा सकेंगी। साल 2020 से भारत का ओमान में निवेश तीन गुना होकर 5 अरब डॉलर पहुँचा चुका है। भारत में भी ओमान का निवेश बढ़ेगा, जो भारत के लिए भी अत्यंत लाभकारी साबित होगा।

सर्विस सेक्टर में फायदा: भारत-ओमान समझौते से सर्विस सेक्टर को भी फायदा होगा। इसके साथ ही स्वास्थ्य, शिक्षा में सहयोग बढ़ेगा।

ऊर्जा सुरक्षा: ओमान से कच्चा तेल, एलएनजी और उर्वरक सस्ते मिलेंगे, जो भारत की कृषि, रसायन, सीमेंट और बिजली क्षेत्रों के लिए जरूरी हैं।

रोजगार: ईपीसी ठेकेदारों के लिए तेज वीजा से हजारों नौकरियाँ पैदा होंगी। जीटीआरआई के अनुसार, गुणवत्ता सुधार से निर्यात स्थायी रूप से बढ़ेगा। कुल मिलाकर यह व्यापार घाटे को कम कर 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने में मदद करेगा।

भारत ने किन अन्य देशों के साथ ऐसे समझौते किए हैं?

भारत ने 2025 तक 14 मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) और 6 अधिमान्य व्यापार समझौते (पीटीए) साइन किए हैं। ये किसानों, व्यापारियों और निर्यातकों के लिए फलदायी साबित हो रहे हैं। भारत के लिए सबसे पहले अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली NDA सरकार ने श्रीलंका के साथ इस तरह का समझौता किया था।

हालाँकि बीते कुछ समय में मोदी सरकार ने कई बड़े देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (मुक्त व्यापार समझौता) किए हैं। इनमें मॉरीशस (2021) के साथ समझौते ने भऊारत के लिए अफ्रीका के लिए द्वार खोल दिए। फिर पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत और यूएई के बीच 2022 में CEPA समझौता हुई, जिसके तहत UAE ने 90 प्रतिशत भारतीय निर्यात पर टैक्स बेहद कम कर दिया और आज दोनों देशों के बीच व्यापार पहले के मुकाबले कई गुना बढ़ चुका है।

पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच 2022 में ही ईसीटीए समझौता हुआ, जिसके बाद से भारत के ऑस्ट्रलिया को होने वाले एक्सपोर्ट पर टैक्स काफी कम हो गया।

यहीं नहीं, भारत ने ईएफटीए टीईपीए (2024, 2025 से प्रभावी) के तहत स्विट्जरलैंड, नॉर्वे आदि के साथ ऐसे ही समझौते किए हैं, तो यूके के साथ इसी साल हुए सीईटीए समझौते ने भारत के एक्सपोर्ट की 90 प्रतिशत चीजों पर से टैक्स बेहद कम या लगभग खत्म कर दिया। इन समझौते से भारत के न सिर्फ विदेश संबंध मजबूत हुए, बल्कि भारत के उत्पादन के लिए बड़े बाजार भी मिले हैं।

किन देशों के साथ समझौते पाइपलाइन में हैं?

2025 में भारत 10 से अधिक एफटीए पर तेजी से काम कर रहा है। यूरोपीय संघ के साथ एफटीए वार्ता 2022 से फिर शुरू हुई, जिसके 14 दौर पूरे हो चुके हैं। इसी माह यानी दिसंबर 2025 तक भारत और ईयू के बीच व्यापार समझौता हो जाने की उम्मीद है, जिसके बाद दोनों पक्षों में 250 अरब डॉलर तक व्यापार बढ़ जाएगा।

भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौता (बीटीए) चल रहा है, जिसमें खाद्य उत्पादों पर शुल्क छूट शामिल। अभी फ्री ट्रेड एग्रीमेंट व अन्य चीजों पर बातचीत हो रही है।

भारत इस समय पेरू, चिली, न्यूजीलैंड, इजराइल के साथ दिसंबर 2025 में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट जैसे समझौते को पूरा करने पर जोर लगा रहा है, जिसके कम से कम 4 चरण पूरे हो चुके हैं। इसी क्रम में कतर के साथ भी समझौते पर बातचीत हो रही है, तो यूएई के साथ समझौते को विस्तार भी दिया जा रहा है। भारत और कनाडा के बीच FTA थम सी गई थी, लेकिन कनाडा में सरकार बदलने के बाद फिर से इस दिशा में तेजी से काम हो रहा है।

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल की मानें तो मौजूदा समय में भारत कम से कम 50 देशों के साथ ऐसे समझौतों को लेकर बातचीत कर रहा है, जो भारतीय उत्पादों के लिए वैश्विक बाजार के दरवाजे को और बड़ा खोल देगा। ये समझौते 2026 तक भारत को वैश्विक व्यापार में मजबूत बनाएँगे।

वैश्विक मंचों पर भारत की ताकत बढ़ाने में योगदान

भारत और ओमान के बीच यह समझौता भारत की वैश्विक ताकत को कई गुना बढ़ाएगा। अमेरिका के टैरिफ और यूरोपीय संघ के कार्बन टैक्स के बीच खाड़ी में मजबूत उपस्थिति सुनिश्चित करेगा। ओमान के माध्यम से जीसीसी, अफ्रीका और मध्य एशिया तक पहुँच बढ़ेगी, जो भारत को ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा देगी।

रणनीतिक रूप से ये समझौता बेहद महत्वपूर्ण है। इसके बल पर भारत मिडिल ईस्ट में अपनी पैठ बढ़ाता नजर आ रहा है। नरेंद्र मोदी की अगुवाई में भारत जिन व्यापार समझौतों को अंजाम दे रहा है, वो समझौते विकसित भारत 2047 के विजन को पूरा करने में महत्वपूर्ण कड़ी साबित होंगे, क्योंकि ऐसे समझौतों से न सिर्फ भारत की जीडीपी वृद्धि 7-8 प्रतिशत तक रहेगी, बल्कि यह जी-20 जैसे मंचों पर भारत की नेतृत्व भूमिका को मजबूत करेगा।

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श्रवण शुक्ल
श्रवण शुक्ल
I am Shravan Kumar Shukla, known as ePatrakaar, a multimedia journalist deeply passionate about digital media. I’ve been actively engaged in journalism, working across diverse platforms including agencies, news channels, and print publications. My understanding of social media strengthens my ability to thrive in the digital space. Above all, ground reporting is closest to my heart and remains my preferred way of working. explore ground reporting digital journalism trends more personal tone.

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