Tuesday, April 14, 2026
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जिस कट्टर वामपंथी गुट का चार्ली किर्क की हत्या में आया नाम, उसे राष्ट्रपति ट्रंप ने ‘आतंकी संगठन’ घोषित किया: जानिए Antifa के बारे में सब कुछ

एंटीफा शब्द का प्रयोग उन लोगों के एक व्यापक समूह को परिभाषित करने के लिए किया जाता है जिनकी राजनीतिक मान्यताएँ अति-वामपंथी और उग्र होती हैं। अमेरिका में इस समूह का कोई आधिकारिक नेता या मुख्यालय नहीं है। हाल ही में ट्रंप के करीबी चार्ली किर्क की हत्या के बाद इस ग्रुप पर लगाम कसा गया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एंटीफा (Antifa) को आतंकी संगठन घोषित कर दिया है। ट्रंप ने इसे खतरनाक और अति वामपंथी, एंटी-फासिस्ट आंदोलन बताया। कुछ दिनों पहले यूटा वैली यूनिवर्सिटी परिसर के एक कार्यक्रम में ट्रंप के समर्थक और करीबी चार्ली किर्क की हत्या कर दी गई थी। उसकी हत्या का आरोपित टायलर रॉबिन्सन का संबंध एंटीफा से माना जा रहा है।

बुधवार (17 सितंबर 2025) को राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर इस कदम की घोषणा की। उन्होंने लिखा, ” मुझे अमेरिका के लोगों को ये बताते हुए खुशी हो रही है कि मैं एंटीफा को आतंकी संगठन घोषित कर रहा हूँ। यह एक बीमार, खतरनाक, कट्टर अति वामपंथी और एक बड़ा आतंकी संगठन है।”

ट्रंप ने आगे लिखा, “मैं यह भी दृढ़ता से अनुशंसा करता हूँ कि एंटीफा को आर्थिक मदद करने वालों की कानूनी रूप से गहनता से जाँच की जाए। इस मामले पर ध्यान देने के लिए धन्यवाद!”

अभी ये साफ नहीं है कि राष्ट्रपति ट्रंप एंटीफा पर रोक किस तरह लगाएँगे, क्योंकि इस संगठन का न ही कोई नेतृत्वकर्ता है और न ही संरचना है। ऐसे में किसे टारगेट किया जाएगा, इसके बारे में साफ नहीं किया गया है।

क्या है एंटीफा

एंटीफा शब्द एंटी-फ़ासीस्ट से बना है। अमेरिका में फासीवाद विरोधी, उग्रवादी, अति वामपंथी लोगों को एंटीफा कहा जाता है। इनका कोई आधिकारिक नेता नहीं होता है और संगठन भी काफी ढीला-ढाला होता है। ये अमेरिका में रंगभेद, नव-नाजी, नव-फासीवाद और श्वेत वर्चस्व के खिलाफ हैं। संगठन के लोग दक्षिणपंथी नेताओं और विचारधारा के कट्टर आलोचक होते हैं।

एंटीफा के समर्थक इसे एक आंदोलन मानते हैं। ये लोग अपनी रणनीति और सिद्धांत आपस में शेयर करते हैं। इसका कोई ऑफिस और आधिकारिक लीडर नहीं होता है, इसलिए ये पता लगाना बेहद मुश्किल है कि ये लोग कहाँ रहते हैं और क्या करते हैं। हालाँकि ये शांतिपूर्ण प्रदर्शन करते हैं।

एंटीफा से जुड़े लोग जिस झंडे का इस्तेमाल करते हैं वह 1917 की रूसी क्रांति के लाल झंडे और 19वीं शताब्दी के अराजकतावादियों के काले झंडे को मिलाकर बनाया गया है। संगठन के लोग दक्षिणपंथी सभाओं और रैलियों का विरोध करते हैं और अक्सर ऐसी सभाओं को रोकने की कोशिश करते हैं। ये लोग एक-दूसरे से सोशल मीडिया, मैसेजिंग सेवाओं, एन्क्रिप्टेड पीयर टू पीयर नेटवर्क और सिग्नल से जुड़े रहते हैं। अमेरिका के कुछ राज्यों में हालाँकि ऐसे लोग मिलकर नियमित बैठकें करते हैं।

एंटीफा को अमेरिका का आतंकी संगठन घोषित किया गया है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने इसे इस्लामिक स्टेट और अलकायदा जैसे विदेशी आतंकी संगठनों की सूची में शामिल नहीं करेगा।

चार्ली किर्क की हत्या

10 सितंबर 2025 को राष्ट्रपति ट्रंप के समर्थक चार्ली किर्क की हत्या यूटा वैली यूनिवर्सिटी में एक कार्यक्रम के दौरान कर दी गई थी। उनके गर्दन में एक गोली मारी गई थी। राष्ट्रपति ट्रंप ने किर्क की हत्या पर दुख जताते हुए हत्यारों को किसी भी हाल में नहीं छोड़ने की बात कही थी।

व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने सीएनएन को बताया, “यह उन कई कदमों में से एक है जो राष्ट्रपति राजनीतिक हिंसा को बढ़ावा देने वाले वामपंथी संगठनों से निपटने के लिए उठा रहे हैं।”

हालाँकि राष्ट्रपति ट्रंप औपचारिक राजकीय यात्रा पर विदेश में हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर एंटीफा को आतंकी संगठन घोषित करने की जानकारी दी। ट्रंप ने रूढ़िवादी कार्यकर्ता चार्ली किर्क की हत्या के बाद ओवल ऑफिस से सोमवार (15 सितंबर 2025) को इस कदम के संकेत दे दिए थे।

ट्रंप ने ओवल ऑफिस में कहा, “एंटीफा बहुत बुरा है।” उन्होंने बिना कोई सबूत या विवरण दिए कहा, “हमारे पास कुछ बहुत ही कट्टरपंथी समूह हैं, और वे हत्या करके बच निकलते हैं।” उन्होंने आगे कहा, “उन्हें जेल में डाल दिया जाना चाहिए, वे इस देश के साथ जो कर रहे हैं वह वास्तव में विध्वंसकारी है।”

किर्क की हत्या के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने भी कहा था कि वे हिंसा भड़काने के एक समन्वित वामपंथी प्रयास के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। हालाँकि कुछ डेमोक्रेट्स ने इस कदम का विरोध किया है। इनका आरोप है कि ट्रंप असहमति या विरोधी विचारों पर नकेल कसने का बहाना बना रहे हैं।

ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में एंटीफा पर लगाम कसने की कोशिश की थी। ट्रंप समर्थक जॉज फ्लॉयड की हत्या के बाद वे एंटीफा को एक आतंकवादी संगठन घोषित करना चाहते थे। उन्होंने तत्कालीन अटॉर्नी जनरल विलियम बार ने कहा था कि इसकी गतिविधियाँ ‘घरेलू आतंकवाद’ को बढ़ाती हैं। उस वक्त एफबीआई के डायरेक्टर क्रिस्टोफर ने अपनी गवाही के दौरान कहा था कि एंटीफा एक संगठन नहीं, बल्कि एक विचारधारा है। इसकी कोई संरचना नहीं है। जबकि किसी संगठन को आतंकी घोषित करने के लिए संरचना का होना जरूरी है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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