Tuesday, March 31, 2026
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सऊदी अरब में करोड़ों मजदूरों की ‘गुलामी की जंजीर’ टूटी, खत्म हुआ 50 साल पुराना कफाला सिस्टम: जानें कामगारों को क्या मिलेगा फायदा?

1950 के दशक में शुरू हुआ कफाला सिस्टम में मजदूरों की जिंदगी मालिक के हाथ में होती थी। मालिक की मर्जी के बिना मजदूर ना तो नौकरी बदल सकते थे, ना देश छोड़ सकते थे और ना ही बुरे बर्ताव के खिलाफ आवाज उठा सकते थे।

सऊदी अरब ने 50 साल से चले आ रहे कफाला सिस्टम को आधिकारिक तौर पर खत्म कर दिया है। अरबी में कफाला का मतलब ‘संरक्षण’ होता है। इस कानून ने खाड़ी देशों में काम करने वाले लाखों विदेशी मजदूरों की जिंदगी को पूरी तरह से कंट्रोल किया हुआ था। यह सिस्टम तय करता था कि मजदूर नौकरी बदल सकते हैं या नहीं, देश छोड़ सकते हैं या नहीं, और अपने साथ हो रहे बुरे बर्ताव के खिलाफ आवाज उठा सकते हैं या नहीं। आलोचक इस व्यवस्था को ‘आधुनिक गुलामी’ जैसा बताते थे। सऊदी अरब में करीब 1 करोड़ 30 लाख विदेशी मजदूर काम करते हैं, जिनके लिए यह ऐतिहासिक बदलाव है।

कफाला सिस्टम क्या था?

कफाला सिस्टम एक कानूनी ढाँचा था जो खाड़ी देशों में विदेशी मजदूरों की नौकरी और रहने के नियमों को तय करता था। इसकी शुरुआत 1950 के दशक में हुई थी। तेल से अमीर बने देशों को सस्ते मजदूरों की जरूरत थी, लेकिन वे उन्हें देश की नागरिकता या हमेशा रहने का हक नहीं देना चाहते थे। इस सिस्टम में विदेशी मजदूर का कानूनी दर्जा पूरी तरह से उसके मालिक या ‘कफील’ से जुड़ा होता था।

मालिक ही मजदूर का वीजा, देश में रहने का अधिकार, नौकरी बदलने का अधिकार और यहाँ तक कि देश छोड़ने का अधिकार भी कंट्रोल करता था। मालिक की मंजूरी के बिना मजदूर न तो नौकरी बदल सकता था, न देश छोड़ सकता था और न ही बुरे बर्ताव पर कानूनी मदद ले सकता था। इस सिस्टम से मालिक बहुत ताकतवर हो गए थे। वे मजदूरों के पासपोर्ट जब्त कर लेते थे, सैलरी रोक लेते थे और उन्हें देश से निकालने की धमकी देते थे। मजदूरों के पास इसका विरोध करने का कोई रास्ता नहीं था।

सऊदी अरब ने अब यह क्यों बदला?

कफाला को खत्म करने का फैसला क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के ‘विजन 2030’ का हिस्सा है। सऊदी अरब अपनी अर्थव्यवस्था को तेल पर निर्भरता से हटाकर आधुनिक बनाना चाहता है और विदेशी निवेश को आकर्षित करना चाहता है। मानवाधिकार समूहों के बढ़ते दबाव और अंतर्राष्ट्रीय आलोचना के कारण भी यह बदलाव जरूरी था। उदाहरण के लिए, कतर ने भी 2022 फीफा विश्व कप से पहले अपने कानून में कुछ बदलाव किए थे।

नए सिस्टम में क्या-क्या बदला?

कफाला को हटाकर अब अनुबंध-आधारित (Contract-Based) नौकरी का सिस्टम लाया गया है। मजदूर अब अपने मौजूदा मालिक की मंजूरी के बिना ही नई नौकरी कर सकते हैं। उन्हें अब देश छोड़ने के लिए मालिक के ‘एग्जिट वीजा’ या सहमति की जरूरत नहीं होगी। मजदूरों को अब लेबर कोर्ट और शिकायत दर्ज करने के बेहतर तरीके मिलेंगे। सरकार का कहना है कि इससे काम करने वालों का शोषण कम होगा और सऊदी अरब की छवि सुधरेगी।

जिंदगी में कितना बदलाव आएगा?

यह कानून में एक बड़ी सफलता है, लेकिन जानकारों का कहना है कि सिर्फ कानून बदलने से रातों-रात दुर्व्यवहार खत्म नहीं होगा। मानवाधिकार समूहों का कहना है कि कई मालिक अभी भी नौकरी बदलने या देश छोड़ने के लिए मजदूरों की सहमति माँगते हैं। घरेलू कामगारों जैसे सबसे कमजोर लोगों को नए नियमों का बराबर फायदा शायद न मिले।

कई देशों में भर्ती के दौरान होने वाले शोषण (जैसे ज़्यादा फीस लेना) को सऊदी कानून में अभी भी ठीक से नहीं निपटा गया है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि कानून बदलना तो पहला कदम है, लेकिन जमीन पर हकीकत बदलने में अभी बहुत समय लगेगा।

यह सिस्टम इतना विवादित क्यों था?

दशकों से कफाला दुनिया के सबसे ज़्यादा आलोचित श्रम कानूनों में से एक बन गया था। मानवाधिकार समूह और अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने कहा कि यह सिस्टम जबरदस्ती काम कराने और मानव तस्करी को बढ़ावा देता है। मजदूर बिना इजाजत नौकरी छोड़ने पर गिरफ्तारी या देश से निकाले जाने का जोखिम उठाते थे। इसलिए, वे बुरे हालात में भी काम करते रहने को मजबूर थे।

यह समस्या खासकर घरेलू काम, निर्माण और खेती से जुड़े मजदूरों में ज़्यादा थी। सऊदी अरब में 1 करोड़ 34 लाख प्रवासी मजदूर हैं, जो वहाँ की आबादी का लगभग 42% हैं। इनमें लाखों लोग भारत, बांग्लादेश और फिलीपींस से हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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