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तालिबान ने गुरुद्वारे पर किया हमला, सीसीटीवी कैमरे तोड़े; 3 मुस्लिम गार्ड्स समेत कई लोगों को बनाया बंदी

काबुल का करता परवन गुरुद्वारा वही स्थान है, जहाँ सिखों के गुरु नानक देव जी आए थे। यह गुरुद्वारा तालिबानी शासन आने के बाद सिखों और हिंदुओं के लिए पनाहगाह बना था। उस दौरान तालिबान ने इन लोगों को भरोसा दिलाया था कि यहाँ के लोगों की सुरक्षा की जाएगी।

अफगानिस्तान के काबुल में स्थित ‘करता परवन गुरुद्वारे’ पर तालिबान ने मंगलवार (5 अक्टूबर 2021) दोपहर को हमला बोल दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हथियार बंद तालिबानियों ने यहाँ गार्ड्स समेत कई लोगों को बंदी बना लिया। उन्होंने परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरे को भी तोड़ डाला। इसके बाद वे वहाँ से चले गए।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, आज दोपहर को 15-16 हथियारबंद अज्ञात लोग गुरुद्वारे के अंदर दाखिल हुए। इन लोगों ने तीन मुस्लिम गार्ड्स के हाथ-पैर बाँध उन्हें बंदी बना लिया। साथ ही गुरुद्वारे से बाहर जाते हुए सीसीटीवी भी तोड़ दिए। स्थानीय प्रशासन को इसके बारे में सूचित कर दिया गया है। मामले की जाँच की जा रही है। इससे पहले इंडिया वर्ल्ड फोरम के अध्यक्ष पुनीत सिंह चंडोक ने बताया कि हथियारबंद तालिबानी अधिकारी गुरुद्वारे में दाखिल हुए थे।

उनका कहना है कि तालिबानियों ने हमारे पवित्र स्थान का अपमान किया है और उसे नुकसान भी पहुँचाया है। उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्रालय से इस मामले में दखल देने की अपील की है। उन्होंने माँग की है कि देश में हिंदू और सिखों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

काबुल का करता परवन गुरुद्वारा वही स्थान है, जहाँ सिखों के गुरु नानक देव जी आए थे। यह गुरुद्वारा तालिबानी शासन आने के बाद सिखों और हिंदुओं के लिए पनाहगाह बना था। उस दौरान तालिबान ने इन लोगों को भरोसा दिलाया था कि यहाँ के लोगों की सुरक्षा की जाएगी।

गौरतलब है कि तालिबान के अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज होने के बाद से वहाँ के स्थानीय निवासी डर के साये में जीने को मजबूर हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 220 से अधिक अफगान महिला जज तालिबानियों की सजा के भय से अभी भी खुफिया जगहों पर छिपी हुई हैं। उनका कसूर केवल इतना है कि वह महिलाओं के अधिकारों के लिए लड़ी। ये उन लोगों की रक्षक रही हैं, जो देश में हाशिए पर थे और न्याय चाहते थे।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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