Homeरिपोर्टअंतरराष्ट्रीय'अरब की औरतें मोटी' वाली रिपोर्ट में छापी जिस हिरोइन की तस्वीर वह भड़कीं,...

‘अरब की औरतें मोटी’ वाली रिपोर्ट में छापी जिस हिरोइन की तस्वीर वह भड़कीं, ‘द इकोनॉमिस्ट’ पर करेंगी केसः कहा- यह निजता का उल्लंघन, तस्वीर से छेड़छाड़ भी की

इस लेख को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूटा था। उन्होंने इसे तथ्यों से परे बताया था। अरब से जुड़े लोगों ने 'द इकोनॉमिस्ट' की जमकर आलोचना की थी।

लंदन के जाने माने समाचार पत्र ‘द इकोनॉमिस्ट’ ने हाल ही में अरब की औरतों को ‘मोटी’ बताते हुए एक लेख छापा था। इस लेख में पुरुषों और महिलाओं के बीच मोटापे का अंतर समझाने के लिए एक इराकी अभिनेत्री की तस्वीर छापी गई थी। लेख का शीर्षक था ‘अरब जगत में पुरुषों की तुलना में महिलाएँ मोटी क्यों हैं?’

इस लेख में जिस इराकी अभिनेत्री की तस्वीर छापी गई थी उन्होंने इसे लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। साथ ही 42 वर्षीय अभिनेत्री ने कहा है कि वो ‘द इकोनॉमिस्ट’ के खिलाफ मानहानि का केस दर्ज करेंगी। तालेब को ‘द इकोनॉमिस्ट’ के लेख का शीर्षक द्वेषपूर्ण लगा। लेख में ये भी लिखा गया कि इराकी लोग एक्ट्रेस एनास तालेब के कर्व को सुंदरता के आदर्श के रूप में देखते हैं।

इस लेख के प्रकाशित होने के बाद बलसम मुस्तफा ने ट्विटर पर आर्टिकल में प्रयोग की गई महिला कलाकार की तस्वीर पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा कि जो महिला तस्वीर में दिख रही है वो बहुत छोटेपन से हर टैबू को तोड़ती आई है। उसे तो सम्मान दिया जाना चाहिए, न कि उसे या किसी और अरब महिला को बॉडी शेम करना चाहिए।

बता दें कि इस लेख की जबरदस्त आलोचना हुई थी। कई लेखकों ने इस लेख को अरब महिलाओं के बारे में अपमानजनक रूढ़िवादिता के रूप में दर्शाया। इस लेख का निष्कर्ष था कि अरब में औरतें ज्यादातर घर में रहती हैं इसलिए वो मोटी होती हैं। लेख के अनुसार वहाँ औरतों को घर से बाहर खेलने कूदने का मौका नहीं मिलता जिसके कारण वो मोटी हो जाती हैं। जबकि मर्द घर से बाहर जाते हैं, काम करते हैं, मजदूरी करते हैं।

इस लेख को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूटा था। उन्होंने इसे तथ्यों से परे बताया था। अरब से जुड़े लोगों ने ‘द इकोनॉमिस्ट’ की जमकर आलोचना की थी। उन्होंने ये भी पूछा कि आखिर इस समाचार पत्र को उनसे क्या दिक्कत है। एक के बाद एक घटिया लेख उनके बारे में क्यों लिखे जाते हैं। इसी तरह अन्य यूजर्स भी ‘द इकोनॉमिस्ट’ पर गुस्सा उतारते हुए दिखे। कुछ ने आरोप लगाया कि ये विदेशी अखबर अरब वालों से चिढ़ता है क्योंकि वहाँ की औरतों के पास ज्यादा अधिकार हैं। अगर वहाँ उन्हें कोई परेशान करता है तो सीधे जेल में होगा।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

विवादों में ‘कॉकरोचों’ का 6 जून का प्रदर्शन, दिपके ने माना- ‘नहीं ली प्रोटेस्ट की परमिशन’: समझें- SC का फैसला, 7 दिन वाला नियम...

CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन के बहाने समझिए जंतर-मंतर पर धरना देने की पूरी प्रक्रिया, दिल्ली पुलिस के नियम और सुप्रीम कोर्ट का रुख।

‘पहले मंदिर में नमाज पढ़ेंगे, फिर कहेंगे मस्जिद थी’: बुलंदशहर से भोजशाला तक, हिंदू पवित्र स्थलों पर दावों का कट्टरपंथियों का पैटर्न और लिबरल...

हिंदुओं के पवित्र स्थानों पर नमाज अदा करना भूल नहीं, सोची-समझी साजिश है। यदि कट्टरपंथियों का मन इतना ही साफ होता तो मंदिरों पर कब्जा नहीं करते।
- विज्ञापन -