अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार (2 दिसंबर 2025) को व्हाइट हाउस की कैबिनेट मीटिंग के दौरान सोमाली प्रवासियों को ‘गारबेज’ (कचरा) करार दिया और कहा कि वे अमेरिका में नहीं रहना चाहिए। उन्होंने सोमालिया को ‘मुश्किल से एक देश’ बताते हुए कहा, “हम उन्हें अपने देश में नहीं चाहते, वे वापस जाएँ और अपना देश ठीक करें।”
ट्रंप का ये बयान मिनेसोटा की बड़ी सोमाली आबादी पर केंद्रित था, जहाँ उन्होंने कांग्रेसवुमन इल्हान उमर को भी निशाना बनाया। ट्रंप ने कहा कि इल्हान उमर को देश से बाहर फेंक देना चाहिए। 2019 की रैली में भी ट्रंप के भाषण के दौरान भीड़ ने ‘Send her back’ के नारे लगाए थे।
ट्रंप ने सोमाली समुदाय पर धोखाधड़ी और अपराध के आरोप लगाए, खासकर कोविड-19 के दौरान बच्चों के भोजन कार्यक्रम से करोड़ों डॉलर की हेराफेरी का हवाला दिया। उन्होंने टेम्परेरी प्रोटेक्टेड स्टेटस (टीपीएस) समाप्त करने की घोषणा की, जो सोमाली प्रवासियों को निर्वासन से बचाता है।
डेमोक्रेटिक सांसदों ने ट्रंप की टिप्पणियों को ‘नफरतपूर्ण और अस्वीकार्य’ कहा और सोमाली समुदाय के योगदान पर जोर दिया। ट्रंप प्रशासन में कैबिनेट सदस्यों ने तालियाँ बजाईं, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने मुक्का लहराया। बयान पर रिपब्लिकन नेताओं ने चुप्पी साधे रखी, आलोचकों ने इसे नस्लीय टिप्पणियों का नॉर्मलाइजेशन कहा।
सोमालिया के लोगों पर भड़कने का कारण
ट्रंप का गुस्सा मुख्य रूप से मिनेसोटा के सोमाली समुदाय पर हो रही फेडरल जाँच से आया है, जिसमें कई सोमाली-अमेरिकियों पर सरकारी फंडिंग में धोखाधड़ी के आरोप लगे हैं। उन्होंने दावा किया कि सोमाली मिनेसोटा पर कब्जा कर रहे हैं और गैंग्स सड़कों पर घूम रहे हैं। इसके अलावा, इल्हान उमर की आलोचना और राज्यपाल टिम वाल्ज पर सोमाली प्रवासियों को स्वीकार करने का आरोप भी कारण बना।
कांग्रेसवुमन इल्हान उमर ने ट्रंप के बयानों को ‘नस्लवादी, इस्लामोफोबिक और भेदभावपूर्ण’ कहा। उन्होंने कहा कि सोमाली-अमेरिकी स्थायी रूप से अमेरिका में बस चुके हैं। ट्रंप अपनी असफलताओं से ध्यान भटकाने के लिए ये बयान दे रहे हैं। उमर ने ट्रंप पर सोमाली समुदाय को खतरे में डालने का भी आरोप लगाया।
ट्रंप प्रशासन ने सोमालिया समेत 19 गैर-यूरोपीय देशों से ग्रीन कार्ड और नागरिकता आवेदनों पर रोक लगा दी है। असल में ट्रंप का ये कदम नेशनल गार्ड सदस्यों की हत्या जैसी घटनाओं के बाद इमिग्रेशन सुधारों का हिस्सा था। व्हाइट हाउस के पास एक अफगान नागरिक रहमानुल्लाह लाकनवाल ने दो नेशनल गार्ड सैनिकों पर गोली चलाई थी।
बताया जाता है कि वह बाइडेन प्रशासन के एक रीसेटलमेंट प्रोग्राम के तहत अमेरिका आया था। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर भी मिनेसोटा को धोखाधड़ी का केंद्र बताते हुए सोमालियों को ‘वापस भेजने’ की बात कही।

ट्रंप के अनुसार, गैर-नागरिकों को अब कोई सरकारी लाभ या सुविधा नहीं मिलेगी, और अगर कोई प्रवासी अमेरिका की शांति को बिगाड़ता है या देश के मूल्यों के खिलाफ जाता है, तो उसकी नागरिकता भी छीनकर उसे डिपोर्ट किया जा सकता है।
ट्रंप बयान के बाद प्रदर्शन
ट्रंप के बयान के तुरंत बाद मिनेसोटा के मिनियापोलिस–सेंट पॉल क्षेत्र में सोमाली-अमेरिकी समुदाय ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए। मोगादिशू से लेकर मिनियापोलिस तक लोग ट्रंप की टिप्पणियों की निंदा कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने ICE (इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट) की कार्रवाइयों के खिलाफ भी रैलियाँ कीं।
समुदाय के नेताओं ने डर और गुस्सा व्यक्त किया। कुछ रिपब्लिकन समर्थक सोमाली-अमेरिकी भी विरोध में शामिल हुए, जो 2024 में ट्रंप का समर्थन करने के बावजूद निराश हैं। सोमालिया के प्रधानमंत्री ने आधिकारिक प्रतिक्रिया न देने की सलाह दी, लेकिन स्थानीय स्तर पर प्रतिक्रियाएँ तेज हैं।
प्रदर्शनकारी क्या कह रहे हैं
ट्रंप के बयान पर प्रदर्शनकारियों का कहना है, “हम कचरा नहीं, बल्कि व्यवसाय, स्वास्थ्य, शिक्षा और परिवहन में योगदान दे रहे हैं।” समुदाय टीपीएस समाप्ति और निर्वासन के खिलाफ अब एकजुट हो गया है।
आइस की ओर से हो रही पासपोर्ट जाँच जैसी घटनाओं का हवाला देते हुए कई सोमाली-अमेरिकी डर और असुरक्षा के साए में जी रहे हैं। वे शांति की अपील कर रहे हैं। हालाँकि स्थानीय सरकार से सुरक्षा की माँग कर रहे हैं। कुछ ने ट्रंप की कुछ बातों को सही माना, लेकिन अधिकांश निंदा कर रहे हैं।
सोमालिया से अमेरिका प्रवास का इतिहास
सोमालिया से अमेरिका प्रवास 1991 के गृहयुद्ध के बाद तेज हुआ, जब लाखों लोग शरणार्थी बने। मिनेसोटा पहला बड़ा केंद्र बना क्योंकि वहाँ नौकरियाँ मिल रही थीं और मौसम सोमाली संस्कृति से काफी मेल खाता था। वर्तमान में लगभग 80,000 सोमाली मिनेसोटा में रहते हैं, जो अमेरिका का सबसे बड़ा सोमाली समुदाय है।
परिवार नेटवर्क, मस्जिदों, हलाल दुकानों और सामुदायिक समर्थन ने बसावट को आसान बनाया। अधिकांश लोग TPS या शरणार्थी स्टेटस के तहत आए। मिनेसोटा की प्रगतिशील संस्कृति और ‘मार्टिसूर’ (अतिथि सत्कार) ने भी उन्हें आकर्षित किया।
सोमाली प्रवासियों की संख्या अधिक क्यों
मिनेसोटा में सोमाली आबादी इसलिए बढ़ी क्योंकि शुरुआती शरणार्थी मांस पैकिंग प्लांट्स में नौकरियाँ पा गए। इसके अलावा सामाजिक नेटवर्क ने आने वाले लोगों के लिए रास्ते आसान किए गए। राज्य की कल्याणकारी नीतियाँ और सांस्कृतिक समानता ने भी उनके रहने के लिए इसे पसंदीदा जगह बनाया।
संयुक्त राष्ट्र और यूएस प्रोग्राम्स ने केन्या के शरणार्थी कैंपों से रिसेटलमेंट किया। अब सोमाली-अमेरिकी टैक्सी, ट्रकिंग, स्वास्थ्य और शिक्षा में सक्रिय हैं। कुल 2.6 लाख सोमाली मूल के लोग अमेरिका में हैं।
सोमालिया दशकों से अस्थिर रहा। यहाँ गृहयुद्ध, अल-शबाब आतंकवाद और सूखा ने लाखों को विस्थापित किया। बहुत से लोग 1990 के दशक में सोमालिया के गृहयुद्ध और अल-शबाब आतंकवाद के कारण शरणार्थी के तौर पर अमेरिका आए थे। ट्रंप ने इसी अराजकता का हवाला देकर प्रवासियों को ‘समस्या’ बताया।
ओबामा प्रशासन (2008–2016) के दौरान P-3 ‘परिवार पुनर्मिलन’ कार्यक्रम के तहत बड़ी संख्या में सोमालियों को प्रवेश मिला। बाद में यह रिपोर्ट भी सामने आई कि कई मामलों में DNA टेस्ट में धोखाधड़ी हुई थी, लेकिन फिर भी उस दौरान लगभग 12,000 सोमाली प्रति वर्ष अमेरिका में आ रहे थे और उनमें से ज्यादातर वहीं रह गए।
मिनेसोटा के सोमाली समुदाय ने रेमिटेंस भेजकर सोमालिया को सहायता दी, लेकिन धोखाधड़ी आरोपों ने विवाद को बढ़ाया। ट्रंप की नीतियों के खिलाफ इसी के चलते प्रदर्शन किए जा रहे हैं।
नए घोषणापत्र 2017 के ‘मुस्लिम प्रतिबंध’ से किस प्रकार भिन्न है?
यह घोषणा अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले वाले रुख का ही विस्तार है, जहाँ उन्होंने ‘उच्च-जोखिम वाले देशों’ से बड़े पैमाने पर यात्रा प्रतिबंध लगाया था। उस समय इस कदम को लेफ्ट मीडिया ने ‘मुस्लिम बैन’ कहा था, हालाँकि इसमें वेनेजुएला जैसे गैर-मुस्लिम देश भी शामिल थे।
जिन देशों को ‘चिंताजनक देश’ की सूची में रखा गया है, वे हैं- अफगानिस्तान, बुरुंडी, चाड, कांगो गणराज्य, क्यूबा, म्यांमार, इक्वेटोरियल गिनी, इरीट्रिया, हैती, ईरान, लाओस, लीबिया, सिएरा लियोन, सोमालिया, सूडान, टोगो, तुर्कमेनिस्तान, वेनेज़ुएला और यमन।
हालाँकि इस बार ट्रंप सिर्फ ट्रैवल बैन की बात नहीं कर रहे। अब उनका लक्ष्य थर्ड वर्ल्ड देशों से आने वाले हर तरह के इमिग्रेशन को पूरी तरह रोकने का है। इसका मतलब है कि अब वीजा, असाइलम, रिफ्यूजी रीसेटलमेंट, परिवार वाले को बुलाना हर तरह की इमिग्रेशन प्रोसेस अनिश्चित समय के लिए बंद हो सकती है।
ट्रंप ने अपनी Truth पोस्ट में ‘Reverse Migration’ का जिक्र भी किया है। इसका मतलब है कि गैर-नागरिकों की बड़े स्तर पर वापसी (deportation) और जो लोग नागरिकता पाने की प्रक्रिया में हैं, उस प्रक्रिया को रोक देना। हाल ही में ट्रंप ने सोमाली समुदाय को निशाना बनाते हुए कहा, “सोमालियों ने हमें बहुत परेशानी दी है और वे हमें बहुत महँगे पड़ते हैं। हम सोमालिया को आखिर क्यों पैसा दे रहे हैं?”
ट्रंप के फैसले कैसे बने चिंता का विषय
डोनाल्ड ट्रंप ने कई बार कहा है कि कुछ प्रवासी समुदाय अमेरिका में अपराध बढ़ा रहे हैं, संसाधनों पर बोझ हैं और कानून व्यवस्था बिगाड़ रहे हैं। उनके समर्थकों में यह चिंता काफी लोकप्रिय है।
पहले वह H-1B वीजा रोकने की बात भी करते थे, जिससे भारत के पेशेवर प्रभावित हो सकते थे, लेकिन उस पर अब वह नरम हो चुके हैं। अब उनका ध्यान उन देशों से आने वाले अकुशल और उच्च-जोखिम प्रवासियों को रोकने पर है, और इस फैसले को अमेरिका में काफी समर्थन मिल सकता है।
सोमालिया एक ऐसा देश है जहाँ राजनीतिक अस्थिरता, आतंकवाद, गरीबी और अकाल ने एक पूरी पीढ़ी को तबाह कर दिया है। वहीं अमेरिका में बसे सोमालियों के बढ़ते प्रभाव और संख्या ने अब अमेरिकी राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है, खासतौर पर ट्रंप की इमिग्रेशन नीतियों के संदर्भ में।


