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यह रूस के साथ गद्दारी, हथियार उठाने वालों को देंगे कठोर सजा: वैगनर आर्मी को पुतिन की सख्त चेतावनी, बगावत को बताया ‘पीठ में छुरा घोंपना’

रूस में भाड़े की सेना अवैध है। इसके बावजूद वैगनर समूह एक छद्म सैन्य संगठन के रूप में काम करता है और रूसी शहरों में खुलेआम भर्ती करता रहा है। वैगनर की गतिविधियाँ यूक्रेन से परे फैली हुई हैं। इसके भाड़े के सैनिक सीरिया, लीबिया, मध्य अफ़्रीकी गणराज्य और माली में संघर्षों में शामिल हैं। जहाँ पर इस समूह के सैनिक हैं, वहाँ उन पर हत्या, यातना और युद्ध अपराध के आरोप लगे हैं।

वैगनर ग्रुप के प्रमुख येेवगेनी प्रिगोझिन द्वारा विद्रोह का ऐलान करने के बाद रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इसे गद्दारी बताया है और कहा है कि आरोपितों पर कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। सशस्त्र विद्रोह को कुचलने के लिए रूसी सेना के कमांडर-इन-चीफ यानी राष्ट्रपति पुतिन ने कहा, “मैं आंतरिक विश्वासघात से अपने देश की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास करूँगा।”

रूसी समाचार एजेंसी TASS के अनुसार, शनिवार (24 जून 2023) को टेलीविजन संबोधन में पुतिन ने कहा, “हम आंतरिक विश्वासघात सहित किसी भी खतरे से अपने लोगों और अपने राज्य की रक्षा करेंगे। हमें जिस चीज का सामना करना पड़ा है, उसे निश्चित रूप से विश्वासघात कहा जा सकता है। असीमित महत्वाकांक्षाओं और व्यक्तिगत हितों ने देश और उसके लोगों के साथ देशद्रोह और विश्वासघात को जन्म दिया है।”

पुतिन ने जोर देकर कहा कि देश में गृहयुद्ध दोबारा नहीं होने दिया जाएगा। पुतिन ने वैगनर समूह की कार्रवाई को ‘पीठ में छुरा घोंपना’, ‘देशद्रोह कृत्य’ और ‘सशस्त्र विद्रोह’ बताया है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने देश के खिलाफ हथियार उठाए हैं, उन्हें दंडित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि दक्षिणी शहर रोस्तोव-ऑन-डॉन में स्थिरता बहाल करने के लिए निर्णायक कार्रवाई की जाएगी।

निजी सैन्य कंपनी वैगनर के संस्थापक येवगेनी प्रिगोझिन के टेलीग्राम चैनल ने पहले देश के सैन्य नेताओं पर आरोप लगाते हुए कई ऑडियो पोस्ट किए थे। इसके बाद रूस की संघीय सुरक्षा सेवा (एफएसबी) ने सशस्त्र विद्रोह के आह्वान पर एक आपराधिक मामला खोला है। एफएसबी ने वैगनर के सेनानियों से आग्रह किया कि वे प्रिगोझिन के आदेशों का पालन न करें।

दरअसल, 24 जून 2023 को सुबह-सुबह वैगनर ग्रुप के सैनिकों ने यूक्रेन से कई एंट्री पॉइंट के जरिए रूस में प्रवेश किया। उन्होंने दक्षिणी कमान के मुख्यालय वाले शहर रोस्तोव पर कब्जा करने की भी बात कही। समूह के नेता येवगेनी प्रिगोझिन ने इस ऑपरेशन को ‘स्वतंत्रता का मार्च’ बताया है।

प्रिगोझिन की सेनाएँ राजधानी मास्को की तरफ भी मार्च कर रही हैं। इसको देखते हुए शहर में टैंक और बख्तरबंद गाड़ियाँ उतार दी गई हैं। यूके रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट में कहा गया है कि वैगनर समूह की अन्य इकाइयाँ संभवतः मॉस्को पहुँचने के इरादे से वोरोनिश ओब्लास्ट के माध्यम से उत्तर की ओर आगे बढ़ रही हैं। वैगनर ग्रुप और रूसी सुरक्षा बलों के बीच सीधी झड़प के सीमित सबूत सामने आए हैं।

उधर, वेरोनिश शहर के गवर्नर अलेक्जेंडर गुसेव ने क्षेत्र की सड़कों पर सैन्य वाहनों के काफिले को अफवाह बताते हुए खारिज कर दिया। उन्होंने अपने टेलीग्राम चैनल पर लिखा, “सोशल मीडिया में अब वोरोनिश क्षेत्र के क्षेत्र में सैन्य उपकरणों के काफिले की कथित गतिविधियों के बारे में बहुत सारी गलत जानकारी है।”

उन्होंने आगे कहा, “ऐसे संदेशों का प्रसार रूसी कानून के तहत दंडनीय है। संचार निगरानी संस्था रोसकोम्नाडज़ोर और क्षेत्रीय अभियोजक का कार्यालय ऐसे सभी मामलों पर प्रतिक्रिया देगा। मुझे यकीन है कि वोरोनिश क्षेत्र के निवासी उन लोगों द्वारा फैलाए गए सूचना के उकसावे में नहीं आएँगे, जो देश को अस्थिर करने में रुचि रखते हैं।”

कौन है वैगनर ग्रुप

वैगनर ग्रुप एक निजी सैन्य कंपनी है, जिसकी स्थापना रूस में की गई थी। इसे साल 2014 में तब प्रमुखता मिली, जब इसने पूर्वी यूक्रेन में रूस समर्थक अलगाववादी ताकतों का समर्थन किया। शुरुआत में यह लगभग 5,000 लड़ाकों के साथ अफ्रीका और मध्य पूर्व में काम कर रहा था, तब से इसका काफी विस्तार हुआ है।

यूके के रक्षा मंत्रालय का अनुमान है कि यूक्रेन में उसके लगभग 50,000 लड़ाके हैं, जो इसे रूस-यूक्रेन संघर्ष में एक महत्वपूर्ण निभाते हैं। वैगनर भारी संख्या में भर्तियाँ करता है। यह भी कहा जा रहा है कि यूक्रेन की जेलों में बंद उसके लगभग 80% सैनिक बाहर निकल आए हैं।

रूस में भाड़े की सेना अवैध है। इसके बावजूद वैगनर समूह एक छद्म सैन्य संगठन के रूप में काम करता है और रूसी शहरों में खुलेआम भर्ती करता रहा है। वैगनर की गतिविधियाँ यूक्रेन से परे फैली हुई हैं। इसके भाड़े के सैनिक सीरिया, लीबिया, मध्य अफ़्रीकी गणराज्य और माली में संघर्षों में शामिल हैं। जहाँ पर इस समूह के सैनिक हैं, वहाँ उन पर हत्या, यातना और युद्ध अपराध के आरोप लगे हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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