Monday, April 22, 2024
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‘95% आतंकी संगठन इस्लाम से’: डेटा सुन कर नाराज़ हुआ NDTV का एंकर, कहा – दुनिया में अरबों मुस्लिम, सभी शांतिपूर्ण

"आप पूरे इस्लाम को टाइपकास्ट कर रहे हैं। दुनिया में अरबों मुस्लिम हैं। वे लगभग सभी शांतिपूर्ण लोग हैं … अगर आपका इरादा पूरे आस्था को टाइपकास्ट करने का नहीं है, तो ऐसा बयान क्यों दें?

पैगंबर मुहम्मद पर नूपुर शर्मा के कथित बयान को लेकर NDTV (नई दिल्ली टेलीविज़न लिमिटेड) पर एक डिबेट के दौरान चैनल के पत्रकार विष्णु सोम ने विवाद खड़ा कर दिया है। सोम ने दावा किया कि इस्लामी आतंकवाद पर बात करने से आम मुस्लिमों की भावनाओं को ठेस पहुँच सकती है।

दरअसल, वामपंथी चैनल पर डिबेट के दौरान वकील और पैनलिस्ट के तौर पर उपस्थित देश रतन निगम ने संयुक्त राष्ट्र के डाटा का हवाला देते हुए तथ्यों को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा, “घोषित आतंकवादियों में से 95% इस्लाम से हैं। और 95% आतंकवादी संगठन इस्लामिक हैं।” इस पर इस्लामिक आतंकवाद का बचाव करते हुए विष्णु सोम ने कहा, “तो क्या हम हर उस व्यक्ति को टाइपकास्ट करते हैं जो मुस्लिम हैं (उनमें से अरबों दुनिया भर में मौजूद हैं)?” इसका जबाव देते हुए निगम तंज कसते हुए कहा, “बीजेपी ये तथ्य पैदा नहीं कर रही है।”

देश रतन निगम ने नूपुर शर्मा मामले का जिक्र करते हुए जोर देकर कहा, ”मामला कोर्ट में जा चुका है। एफआईआर दर्ज कर ली गई है।” अब अदालतें तथ्यों के साथ न्याय करेंगी और ये तय करेंगी कि उनका बयान उकसावे के जवाब में था या नहीं।

नूपुर शर्मा के बयान की अलग से जाँच की जा सकती है

निगम के तीखे जबाव से असहज विष्णु सोम डिफेंसिव मोड में आते हुए कहा, “आप मुझे उकसा सकते हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मैं जो चाहूँ कह सकता हूँ।” न्यूज एंकर ने कहा कि लोगों को अपने भाषण में संयम बरतना चाहिए। उन्होंने ये भी माना कि दूसरों को भी उकसाना नहीं चाहिए। खास बात ये है कि इन लोगों को इस्लामिक पैनलिस्ट द्वारा नूपुर शर्मा और हिन्दुओं को उकसाना स्वीकार्य है, लेकिन जब शर्मा ने इस पर रिएक्ट कर दिया तो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिमिट का उल्लंघन माना जाता है।

डिबेट के दौरान एनडीटीवी के पत्रकार ने उन परिस्थितियों को अनदेखा कर दिया, जिस कारण से टाइम्स नऊ पर डिबेट के दौरान नूपुर शर्मा को इस्लामिक धर्म की पेचीदगियों पर चर्चा करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

इस मामले में ऑपइंडिया ने इसके लेकर रिपोर्टिंग की थी कि किस तरह से वाराणसी स्थित ज्ञानवापी विवादित ढाँचे के अंदर मिले शिवलिंग को इस्लामवादी फव्वारा बता रहे हैं। वो शिवलिंग वाली जगह को वर्षों से ‘वुजुखाना’ के तौर पर इस्तेमाल करते रहे हैं। डिबेट के दौरान हिन्दू प्रतीकों को लेकर अपमानजनक टिप्पणियाँ की गईं। इसी कारण से मजबूरन नूपुर शर्मा ने पैगंबर मुहम्मद पर टिप्पणी की।

विष्णु सोम आतंकवाद से ज्यादा ‘टाइपकास्टिंग’ की चिंता

डिबेट के दौरान अधिकतर समय विष्णु सोम मुस्लिमों का बचाव करते रहे। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों के कार्यों के कारण पूरे समुदाय को बदनाम नहीं करना चाहिए। हालाँकि, देश रतन निगम ने जोर देकर कहा कि 95% आतंकी संगठन इस्लामिक हैं।

इस पर सोम ने माफी माँगने के अंदाज में कहा, “जिस वक्त आप कहते हैं कि दुनिया भर के 95% आतंकवादी मुस्लिम हैं या इस्लामी आस्था से हैं – मैं आँकड़े नहीं जानता, लेकिन भले ही वे सही हों। लेकिन, क्या वो नहीं कर रहे हैं, जिसके लिए हम आपको मना कर रहे हैं?” न्यूज एंकर ने आगे कहा, “आप पूरे इस्लाम को टाइपकास्ट कर रहे हैं। दुनिया में अरबों मुस्लिम हैं। वे लगभग सभी शांतिपूर्ण लोग हैं … अगर आपका इरादा पूरे आस्था को टाइपकास्ट करने का नहीं है, तो ऐसा बयान क्यों दें? यह इतना गलत नंबर है सर।” हालाँकि, निगम ने संयुक्त राष्ट्र का हावाला देते हुए बार-बार ये दावा किया कि उनका तथ्य सही है।

एनडीटीवी पत्रकार ने मजबूरन स्पष्ट करते हुए कहा, “मुझे यकीन है कि आँकड़े सही हैं, ऐसा क्यों कहते हैं? क्योंकि जिस वक्त हम ये कहते हैं ये ट्विटर पर वायरल हो जाता है”। विष्णु सोम के कुतर्कों पर फटकार लगाते हुए निगम ने कहा, “तो आप तथ्यों से भाग रहे हैं।”

बचाव की मुद्रा में एनडीटीवी पत्रकार ने कहा, “मैं डिबेट के संदर्भ में केवल इतना कह रहा हूँ कि इंटरनेट पर बहुत नफरत फैली हुई है। एक सम्मानित व्यक्ति के तौर पर जैसे ही आप ये बातें कहते हैं तो यह एक पूरे समुदाय को टाइपकास्ट करता है। क्या ऐसा नहीं है, जिससे हम भारतीय बचना चाहते हैं?”

निगम ने कहा, “तथ्यों को सामने रखना हमारा कर्तव्य है और वकील हर रोज अदालतों में ईशनिंदा करते हैं।”

इतना सुनने के बाद निगम को अनसुना कर सोम दूसरे पैनलिस्ट की तरफ सरक लिए। हालाँकि, उन्होंने स्वीकार किया कि 95% आतंकवादी (या कम से कम अधिकांश आतंकवादी) इस्लामी आस्था से संबंधित हैं। लेकिन वो उदारवादी छवि दिखाने के चक्कर में सच को स्वीकार करने से बच रहे थे।

नोट: ऑपइंडिया ‘आतंकवाद पर संयुक्त राष्ट्र डेटा’ को सत्यापित नहीं कर सका, जिसका उल्लेख देश रतन निगम ने NDTV पर बहस के दौरान किया था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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