Sunday, October 17, 2021
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‘भारत के सैनिक मार डाले गए, चीन के सैनिक शहीद हुए’ – गलवान मामले पर the quint की पत्रकारिता

भारत के बलिदान हुए जवान को 'मरे (Killed)' लिखता है। चीनी सैनिकों के लिए 'शहीद (Martyred)' शब्द का प्रयोग करता है। - यह कोई चायनीज नहीं बल्कि एक इंडियन मीडिया हाउस करता है - नाम है the quint

15 जून 2020 की रात चीन ने भारतीय सैनिकों पर कायरता पूर्वक हमला किया था और गलवान घाटी में घुसपैठ करके पूर्वी लद्दाख वाले क्षेत्र में यथास्थिति (status quo) बदलने का प्रयास किया था। इसके बाद वहाँ हिंसक झड़प हुई थी और भारतीय सेना के जवान चीनी सेना के जवानों को पीछे धकेलने में कामयाब रहे थे। इस दौरान 20 भारतीय जवान वीरगति को प्राप्त हुए थे, वहीं चीन के 43 सैनिकों की मृत्यु हुई थी। 

तमाम मीडिया चैनलों और पोर्टलों ने इसकी रिपोर्टिंग की। इस घटना के बाद से ही चीन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘डैमेज कंट्रोल’ करना शुरू कर दिया था। हालाँकि वामपंथी मीडिया गिरोह की ही एक टुकड़ी- ‘द क्विंट’ (The Quint) की रिपोर्टिंग ने एक बार फिर से भारतीय सैनिकों के प्रति उनके ‘प्रेम’ को उजागर किया।

बता दें कि वामपंथी मीडिया हाउस ने अपनी रिपोर्टिंग में भारत के बलिदान हुए जवान को ‘मरे (Killed)’ लिखा। जबकि चीनी सैनिकों के लिए ‘शहीद’ शब्द का इस्तेमाल किया। उसने लिखा कि झड़प के दौरान भारत के 20 सैनिक मार डाले गए। लेकिन इसी मीडिया हाउस ने जब चीन से आधिकारिक तौर पर PLA के 4 सैनिकों के हताहत होने की खबर आई, तो उनके लिए “शहीद (Martyred)” शब्द का प्रयोग किया।

Galwan Valley
द क्विंट ऑरिजिनल रिपोर्ट की हेडलाइन

हालाँकि मीडिया हाउस ने अब अपनी रिपोर्ट में बदलाव कर लिया है, लेकिन आर्काइव में यह अभी भी मौजूद है। इससे मीडिया पोर्टल की दुश्मन देश के प्रति प्रेम और सहानुभूति की भावना साफ तौर पर झलकती है।

Galwan Valley
द क्विंट के रिपोर्ट की हेडलाइन में किया गया बदलाव

वैसे इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है। ये वही मीडिया हाउस है, जिसके लिए ओसामा बिन लादेन किसी का ‘पिता-पति’ था। उसी मीडिया संस्थान के लिए स्वामी विवेकानंद ‘सिगार पीने वाला सन्यासी’ है। द क्विंट की हिंदू धर्म के प्रकाश को विदेशों तक पहुँचाने वाले स्वामी विवेकानंद एक ‘सिगार पीने वाले सन्यासी’ लगते हैं।

पाकिस्तान पोषित आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के सरगना रियाज नायकू का परिचय गणित शिक्षक के रुप में कराने वाले ‘द क्विंट’ को स्वामी विवेकानंद के जन्मदिन पर यह बताने की सबसे ज्यादा जरूरत महसूस हुई कि वह एक ‘सिगार पीने वाले सन्यासी’ थे।

पिछले दिनों अमेरिका में अश्वेत नागरिक जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हुआ। लोग सड़कों पर उतारकर अमेरिकी सरकार का विरोध कर रहे थे। लेकिन भारत का वामपंथी प्रोपेगेंडा मीडिया तंत्र इन दंगों का फायदा अपनी विचारधारा के पोषण के लिए करता नजर आया।

भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने प्रोपेगेंडा वेबसाइट ‘द क्विंट’ की एक ऐसी ही अपील के स्क्रीनशॉट ट्विटर पर पोस्ट करते हुए लिखा था कि किस प्रकार ‘द क्विंट’ भारत के लोगों को उकसा कर उन्हें सड़कों पर उतर आने की अपील कर रहा है।

कपिल मिश्रा द्वारा जो स्क्रीनशॉट शेयर किए गए थे, उनमें द क्विंट की पॉडकास्ट प्रोड्यूसर शोरबोरी पुरकायस्था ने अपने पाठकों से अपील की थी कि भारतीयों ने भी अमेरिका में जॉर्ज फ्लोएड की मौत की तर्ज पर ही भारी मात्रा में देशव्यापी विरोध प्रदर्शन क्यों नहीं किए? साथ ही उकसाने वाली भाषा में लिखा गया था कि आखिर हमें घर-घर न्याय पहुँचाने के लिए किस चीज का इन्तजार है?

 

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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