Wednesday, August 4, 2021
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NDTV ने भीम आर्मी के गुंडों को बचाया, दलित दूल्हे और मंदिर के भक्तों के बीच हाथापाई की एकतरफा रिपोर्टिंग की?

भीम आर्मी के सदस्यों ने मंदिर के बाहर जुलूस को रोक दिया और बहुत तेज़ आवाज़ में संगीत बजाते रहे। उन्होंने गाने बजाए और मंदिर के बाहर 'जय भीम' के नारे लगाए, जबकि मंदिर में कथा चल रही थी। इससे मंदिर में भक्तों और ‘भीम सेना’ के गुंडों के बीच हाथापाई हुई।

NDTV ने रविवार (फरवरी 7, 2021) को एक रिपोर्ट पब्लिश किया। इस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले के गुराडिया माता गाँव में गुंडों द्वारा एक दलित विवाह जुलूस को रोक दिया गया था।

रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना शनिवार (फरवरी 6, 2021) को हुई। NDTV ने दावा किया कि ‘गुंडों’ ने न केवल शादी के जुलूस को रोका, दलित दूल्हे दीपक और उसके परिजनों के साथ गाली-गलौज, अभद्र व्यवहार और मारपीट भी की। रिपोर्ट में कहा गया कि पीड़ित परिवार द्वारा 8 लोगों के खिलाफ शामगढ़ पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज की गई थी। पुलिस द्वारा भारतीय दंड संहिता (IPC) धारा 323, 294, 506, 147, 149 और अन्य के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी।

NDTV रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट

NDTV ने इस बात पर भी जोर दिया कि मंदसौर राज्य के कैबिनेट मंत्री और भाजपा विधायक हरदीप सिंह डांग का विधानसभा क्षेत्र है। मामले में एफआईआर का हवाला देते हुए, समाचार पोर्टल ने बताया कि दीपक की शादी के जुलूस को ग्रामीणों द्वारा रोका गया। इसमें आगे दावा किया गया कि आरोपित ने दूल्हे और उसके परिवार के सदस्यों की पिटाई की और जुलूस को आगे बढ़ने से रोक दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स में ‘भीम आर्मी’ एंगल की तरफ इशारा

हालाँकि, फलाना दिखाना की एक रिपोर्ट ने इस स्टोरी को विस्तार से कवर किया और मामले के तथ्यों पर प्रकाश डाला। उनकी रिपोर्ट के अनुसार, रविवार रात लगभग 8 बजे, दलित दूल्हे दीपक मेघवाल की शादी का जुलूस देवनारायण मंदिर से सटे रास्ते से गुजर रहा था। रास्ते में देवनारायण मंदिर पर ग्रामीणों द्वारा कथा का अनुष्ठान चल रहा था।

रिपोर्ट के अनुसार, दीपक की बारात में तेज संगीत और डीजे थे, जिसकी वजह से मंदिर में चल रहे धार्मिक अनुष्ठान में बाधा पहुँच रही थी। भक्तों ने दीपक और उनके परिवार के सदस्यों से संगीत को कम करने का अनुरोध किया। हालाँकि, इससे ‘भीम आर्मी’ के नशे में धुत्त गुंडे नाराज हो गए। संगीत को कम करने के बजाय बारात में शामिल भीम आर्मी के गुंडों ने गाली गलौज शुरू कर दी और शराब के नशे में तलवार भी लहराने लगे। जिससे दोनों पक्षों में टकराव बढ़ गया।

कथित तौर पर, भीम आर्मी के सदस्यों ने मंदिर के बाहर जुलूस को रोक दिया और बहुत तेज़ आवाज़ में संगीत बजाते रहे। उन्होंने गाने बजाए और मंदिर के बाहर ‘जय भीम’ के नारे लगाए, जबकि मंदिर में कथा चल रही थी। इससे मंदिर में भक्तों और ‘भीम सेना’ के गुंडों के बीच हाथापाई हुई। पुलिस को सूचना देने पर पुलिस मौके पर पहुँची और बारात फिर से शुरू किया गया। हालाँकि, दलित वर्ग द्वारा राजपूत समाज पर बारात रोकने और दूल्हे को घोड़ी पर चढ़ने से मना करने का आरोप लगाते हुए एससी एसटी एक्ट के तहत 8 लोगों के खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज करा दिया गया।

इससे पहले ऐसी कोई घटना नहीं हुई थी

समाचार आउटलेट फलाना दिखाना ने बताया कि दलित विवाह की बारातें नियमित रूप से गुजरती हैं और इससे पहले ऐसी कोई घटना नहीं हुई थी। घटना के 8 दिन पहले, द्वारकालाल नाम के एक अन्य दलित दूल्हे ने स्थानीय लोगों या मंदिर के भक्तों के साथ कोई हाथापाई किए बिना, शांतिपूर्ण तरीके से बारात निकाली थी।

जब दीपक की बहन की शादी पिछले साल मार्च में हुई थी, तब भी राजपूत समुदाय के सदस्य शादी में शामिल हुए थे और समारोह शांतिपूर्वक संपन्न हुआ था। समाचार पोर्टल ने जोर देकर कहा कि यह पहली बार था जब भीम आर्मी के गुंडों ने क्षेत्र में शांति और सद्भाव को बाधित करने के लिए एक बारात में घुसपैठ करने की कोशिश की।

ऑपइंडिया ने शामगढ़ पुलिस से बात की

ऑपइंडिया से बात करते हुए, हेड कांस्टेबल (शामगढ़ पुलिस स्टेशन) ने बताया कि एफआईआर में नामजद 8 आरोपितों को जेल भेज दिया गया है। उन्होंने कहा कि राजपूत समुदाय और दलितों के बीच हाथापाई की सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुँची। हेड कांस्टेबल ने हमें बताया कि पुलिस ने जल्द ही स्थिति को शांत करा दिया और बारात फिर से आगे बढ़ा दिया गया।

उन्होंने बताया कि जहाँ दलित समुदाय ने राजपूतों पर जुलूस को बाधित करने का आरोप लगाया है, वहीं राजपूतों ने जोर-शोर से संगीत बजाने और महिलाओं पर जानबूझकर भद्दे इशारे करने का आरोप लगाया। यह कहते हुए कि हाल ही में इस तरह का कोई मामला दर्ज नहीं किया गया था, उन्होंने बताया कि एक अन्य दलित दूल्हे की बारात को शांतिपूर्वक हाल ही में गुजरने की अनुमति दी गई थी। हालाँकि उन्होंने इस बात की पुष्टि नहीं की कि भीम सेना के सदस्य जुलूस का हिस्सा थे या नहीं।

NDTV ने दलित लड़के को घोड़े की सवारी करने के लिए मारे जाने के बारे में फर्जी खबर फैलाई

यह पहली बार नहीं है कि NDTV ने एकतरफा रिपोर्टिंग का हो। मार्च 2018 में, NDTV ने बताया कि एक 21 वर्षीय दलित व्यक्ति, प्रदीप राठौड़ को गुजरात के भावनगर में घुड़सवारी के लिए ‘उच्च जाति के लोगों’ ने मार डाला। व्यक्ति के पिता ने आरोप लगाया था कि कुछ राजपूत पुरुषों ने उसके बेटे के खिलाफ दुश्मनी निकाली, क्योंकि उसने लगभग दो महीने पहले एक घोड़ा खरीदा था और राजपूतों ने उसे घोड़े को न बेचने पर मारने की धमकी दी थी।

यह स्टोरी तेज़ी से ट्विटर पर वायरल हुई। हालाँकि, पुलिस द्वारा की गई जाँच से पता चला कि कि ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जिससे यह साबित हो सके कि उसे घोड़ा रखने के लिए मारा गया था। पुलिस ने दावा किया कि वह लड़कियों को परेशान करता था और ग्रामीण उसकी गतिविधियों से नाराज थे और पुलिस को संदेह था कि इसी वजह से उसे मारा गया हो। पुलिस का दावा है कि ग्रामीणों ने शिकायत की थी कि जब भी राठौड़ लड़कियों के सामने आता था तो वह घोड़े और मोटरसाइकिल पर स्टंट करता था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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