बांग्लादेश के मैमनसिंह में कपड़ा फैक्ट्री में काम करने वाले हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की मुस्लिम भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी। इतना ही नहीं, उनके शरीर को पेड़ पर लटकाकर आग लगा दी गई। निर्मम घटना का वीडियो भी 18 दिसंबर 2025 को सामने आया। लेकिन मुस्लिम पीड़ित खबरों को हवा देने वाली विदेशी मीडिया चुप्पी साधे रही। अब कई दिनों बाद अमेरिकी मीडिया संस्थान न्यूयॉर्क टाइम्स (New York Times/NYT) जागा और दीपू चंद्र दास की हत्या पर लेख प्रकाशित किया है।
विदेशी मीडिया में NYT पहला संस्थान बना, जिसने बांग्लादेश में हिंदू युवक की बेरहमी से हत्या को कवरेज दी है। लेकिन यह कवरेज अपने नैरेटिव को ध्यान में रखते हुए की गई है, जिसमें मुस्लिम को अत्याचारी नहीं दिखाना है। NYT में सैफ हसनत और मुजिब मशाल द्वारा लिखे इस लेख में बड़ी चालाकी से भारत को भी निशाना बनाया है। एक हिंदू पर हुए अत्याचार को दिखाते-दिखाते वह भारत में हिंदू को अत्याचारी दिखाना बिल्कुल नहीं भूलता है।
NYT ने हेडलाइन में पूरे दक्षिण एशिया को घेरा
दीपू चंद्र दास की पीट-पीटकर हत्या बांग्लादेश में हुई और NYT ने यहाँ पूरे दक्षिण एशिया को घेरने शुरू कर दिया। NYT की हेडलाइन- Lynching of a Hindu in Bangladesh Fans Fears of Rising Intolerance से ही उसका एजेंडा साफ झलकता है। हिंदू युवक की बेरहमी से हत्या को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया और फिर उलटा दक्षिण एशिया को धार्मिक असहिष्णुता के एक बड़े पैटर्न का हिस्सा बताया गया।

यहाँ शब्दों का खेल करते हुए धार्मिक असहिष्णुता से पूरे दक्षिण एशिया में फैले डर की बात की गई। यानी अर्थ साफ है कि केवल मुस्लिम ही धार्मिक असहिष्णुता तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरा दक्षिण एशिया इससे जूझ रहा है। यहाँ तक कि मुस्लिम खुद इसका शिकार हैं। पूरे लेख में मुस्लिम सहकर्मी द्वारा हिंदू युवक की हत्या को कम आँका गया और इसके बावजूद पूरे दक्षिण एशिया पर ऐसी घटनाओं का इल्जाम डाला गया।
हत्यारों को ‘मुस्लिम’ कहने से परहेज
मुस्लिम-पीड़ित एजेंडा को हवा देने वाले NYT ने बांग्लादेश में हिंदू युवक की क्रूरता से की गई हत्या के हत्यारों को ‘मुस्लिम’ बताने से परहेज किया है। NYT ने लिखा है कि दीपू दास की हत्या को उसके ‘को-वर्कर्स’ ने अंजाम दिया है। कथित तौर पर दीपू दास की पैगंबर मोहम्मद का अपमान करने के कारण हत्या कर दी गई। NYT ने इसे फैक्ट के तौर पर इस्तेमाल किया है, क्योंकि यहाँ एक हिंदू ने उनके मजहब पर टिप्पणी की इसीलिए मुस्लिमों ने जवाब देते हुए उसकी हत्या कर दी, जो सही भी है।

NYT लिखता है, “लेकिन दंगों और भीड़ हिंसा की लहर के बीच हुई इस क्रूर हत्या ने बांग्लादेश में पिछले साल छात्रों के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शनों में सत्तावादी प्रधानमंत्री को सत्ता से हटाए जाने के बाद से बने तनावपूर्ण नेतृत्व के शून्य को लेकर चिंताएँ बढ़ा दी हैं।” यहाँ बड़ी आसानी से NYT ने मुस्लिमों के क्राइम को बांग्लादेश में विरोध-प्रदर्शनों के बीच छिपा दिया है। वह मानना ही नहीं चाहता है कि यह इस्लामी कट्टरपंथी विचारधारा का नतीजा है और बांग्लादेश में लगातार हिंदुओं पर अत्याचार हो रहे हैं।
भारत के हिंदुओं को बनाया निशाना
NYT ने भारत को भी अपने एजेंडा वाले लेख में घसीटा और दावा किया, “भारत में हिंदू सतर्कता समूहों ने मुस्लिमों और अन्य अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया है। खासकर गोमांस रखने के आरोपों पर।” NYT ने इस मनगढ़ंत दावे के साथ उदाहरण भी पेश किया- “भारत के दक्षिणी भाग में पिछले सप्ताह एक प्रवासी मजदूर की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी। पुलिस का कहना है कि भीड़ ने उसे बांग्लादेशी समझ लिया था- भारत के सत्ताधारी हिंदू राष्ट्रवादी राजनेता मुस्लिम प्रवासियों को बांग्लादेशी कहकर पुकारते हैं। 31 वर्षीय राम नारायण बघेल भारत की कठोर जाति व्यवस्था में सबसे निचले पायदान से थे।”

यहाँ NYT ने सिर्फ एक उदाहरण देते हुए हिंदुओं को अत्याचारी होने का दावा किया, जबकि इस तथ्य को दरकिनार किया कि बांग्लादेशी घुसपैठिए कैसे भारत में घुसते हैं और नकली पहचान पत्र बना नागरिकता हासिल कर भारतवासियों की वह सारी सुविधा छीनकर अपनी झोली में डालते हैं। NYT जहाँ एकतरफ बांग्लादेश में हिंदू युवक की हत्या पर आरोपितों को मुस्लिम नहीं बता पा रही है, वहीं एक उदाहरण में उसने पूरे हिंदू समाज को बदनाम करने की कोशिश की है।
दीपू दास की हत्या पर देरी से उठी आवाज, लेकिन वही पुराना नैरेटिव
NYT ने बांग्लादेश में हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की निर्मम हत्या पर बहुत देर से खबर लिखी। लेकिन खबर लिखते समय अपने एजेंडा को नहीं भूले, जहाँ हिंदू समुदाय पर केंद्रित होकर बात करने के बजाए अपना तयशुदा नैरेटिव आगे बढ़ाया। रिपोर्ट में इसे पूरे दक्षिण एशिया में ‘असहिष्णुता के पैटर्न’ से जोड़ दिया गया।
विदेशी मीडिया को पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार अब दिखने लगे हैं, लेकिन भारत को लेकर NYT का वही पुराना रुख है, यहाँ उसे केवल मुस्लिम ही एकमात्र पीड़ित नजर आते हैं। बांग्लादेश में दीपू दास की हत्या पर भी NYT ने साफतौर पर ‘मुस्लिम भीड़’ कहने से बचता नजर आता है, जबकि असलियत कुछ और इशारा करती हैं।
यह रवैया कोई नया नहीं है, बल्कि विदेशी मीडिया का एक आम एजेंडा बन चुका है। भारत में मुस्लिमों के अपराधों या हिंदुओं के खिलाफ हिंसा पर अक्सर चुप्पी साध ली जाती है, लेकिन जैसे ही किसी मुस्लिम पर थोड़ी-सी भी आँच आती है तो यही मीडिया तुरंत मुखर हो जाता है।


