Monday, June 14, 2021
Home रिपोर्ट मीडिया हलाल पर सवाल उठाने पर ऑपइंडिया के खिलाफ दुष्प्रचार: रेवेन्यू का गम नहीं, पाठकों...

हलाल पर सवाल उठाने पर ऑपइंडिया के खिलाफ दुष्प्रचार: रेवेन्यू का गम नहीं, पाठकों का समर्थन जरूरी

ऑपइंडिया कभी भी अपने किसी लेख में इसलिए परिवर्तन नहीं करेगा, या फिर अपने मूलभूत सिद्धांतों से समझौता नहीं करेगा, क्योंकि कुछ असहिष्णु लोगों को इससे दिक्कत है और इसे लेकर दुष्प्रचार फैलाया जा रहा है। यूके में बैठ कर कोई ट्विटर हैंडल भाषण झाड़े और हमें झुकाने की कोशिश करे तो ये संभव नहीं है।

पिछले कुछ दिनों से ऑपइंडिया के विरुद्ध एक घटिया दुष्प्रचार अभियान चलाया जा रहा है। दरअसल, हमने ‘हलाल प्रक्रिया’ को लेकर एक ख़बर प्रकाशित की थी। इसमें बताया था कि कैसे इसके तहत भेदभाव वाला रवैया अपनाया जाता है। इसके बाद ‘स्टॉप फंडिंग हेट’ नामक ट्विटर हैंडल ने ये मान लिया कि हम घृणा फैला रहे हैं और उसने हमारे खिलाफ़ दुष्प्रचार फैलाने का ठेका ले लिया। इसके बाद लेफ्ट लिबरल मीडिया पोर्टलों ने इसका जश्न मनाया।

इन प्रोपेगेंडा पोर्टलों ने एक भारतीय मीडिया पोर्टल पर किसी विदेशी संस्था द्वारा किए जा रहे आक्षेप का समर्थन किया और इससे सम्बंधित ख़बरें भी चलाईं। ‘स्क्रॉल’ ने हमसे संपर्क कर इस विषय पर हमारी राय भी जाननी चाही। वामपंथी मीडिया के चाल-चलन के विपरीत ‘स्क्रॉल’ ने कम से कम इस विषय में हमारा पक्ष जानने के लिए हमसे सम्पर्क किया। फिर भी हम अपना बयान यहाँ प्रकाशित कर रहे हैं, क्योंकि वामपंथी मीडिया की आदत है कि वे बयानों को तोड़-मरोड़कर और उनसे छेड़छाड़ कर पेश प्रस्तुत करते हैं।

‘स्क्रॉल’ के 3 सवाल

‘स्क्रॉल’ ने हमसे ये 3 सवाल पूछे:

  • ये जो ‘अभियान’ चल रहा है, इस बारे में विज्ञापन देने वाली कम्पनियों या फिर नेटवर्क्स ने हमसे कुछ कहा है? क्या उन्होंने इसे लेकर चिंताएँ जताई हैं?
  • इस ‘अभियान’ के अंतर्गत ऑपइंडिया के खिलाफ जो आरोप लगाए गए हैं और कई लेखों में घृणा फैलाने का जो आरोप लगा है, उस बारे में आपका क्या कहना है?
  • विज्ञापन देने वाली कम्पनियों ने जो भी चिंताएँ जाहिर की हैं, क्या उसके बाद ऑपइंडिया ने अपने लेखों में बदलाव करने का फ़ैसला लिया है?

हमने ‘स्क्रॉल’ को ये जवाब दिया

एक तरफ जब पूरा वामपंथी मीडिया ऑपइंडिया को नीचा दिखाने में लगा हुआ है, ऐसे में ‘स्क्रॉल’ को धन्यवाद कि उसने कम से कम हमे हमारी राय जानने का तो प्रयास किया। ये पत्रकारिता का एक ऐसा नैतिक सिद्धांत है, जिसे वामपंथी मीडिया ने कब का त्याग दिया है। यह हमारा बयान है, जिसे आशा है कि तोड़-मरोड़कर नहीं पेश किया जाएगा। इसे हम हूबहू जनता के समक्ष रख रहे हैं:

‘गूगल ऐड्स’ या फिर किसी भी विज्ञापन कम्पनी या नेटवर्क ने हमसे इस ‘अभियान’ के सम्बन्ध में कुछ नहीं कहा है और न ही किसी प्रकार की चिंता जाहिर की है। अभी तक कम्पनी ने नहीं कहा है कि वो ऑपइंडिया की वेबसाइट पर से अपनी प्रचार सामग्री हटाना चाहते हैं। एडवरटाइजिंग डैशबोर्ड गूगल के हाथ में रहता है तो कम्पनियों को इस बारे में हमसे संपर्क करने की आवश्यकता भी नहीं है। इसलिए आप उन्हीं लोगों से पूछ लीजिए।

क्या है ‘हेट स्पीच’? आजकल ये एक ऐसा हथियार बन गया है, जिसके द्वारा उन आवाज़ों को दबाने की कोशिश की जाती है जो उनलोगों से सहमत न हों। ये असहिष्णु समूह की पहचान है, जिसका इस्तेमाल कर वे विरोधियों को चुप कराना चाहते हैं। ऑपइंडिया कभी भी किसी अन्य के लिए परेशानी क्रिएट करने के लिए फ्री स्पीच का इस्तेमाल नहीं करता, ये हम भलीभाँति समझते हैं।

लेकिन, जहाँ तक हमारे लेख की बात है (जिस पर सवाल उठ रहे हैं), हमारा मानना है कि ये फ्रीडम ऑफ स्पीच और मीडिया की स्वतंत्रता के अंतर्गत आता है। इस लेख में हमने हलाल की प्रकिया पर सवाल उठाए थे, जो भेदभाव भरा है। इसने हिन्दुओं, ख़ासकर दलितों को मांस इंडस्ट्री में नौकरी पाने से वंचित रखा हुआ है। जहाँ खास समुदाय इसे खाने की च्वाइस बताता है, ये असल में एक मजहबी प्रक्रिया है, जिसके अंतर्गत एक खास समुदाय के व्यक्ति को शहादा का पालन करने को कहा जाता है।

हमारे लेख का मूल भाव ये था कि अगर मजहब की आड़ में एक प्रकार का भेदभाव उचित और वैध है तो फिर किसी अन्य संप्रदाय या धर्म के लिए उसी प्रकार का दूसरा भेदभाव अनुचित और अवैध कैसे ठहराया जा सकता है? अगर हलाल वैध है तो फिर हिन्दुओं द्वारा अपने व्यापर में खास मजहब वालों को नौकरी न देना अवैध कैसे हो सकता है? इसे अपराधिक बता कर एफआईआर क्यों दर्ज कराया जाता है? ‘हेट स्पीच’ का आरोप ही इसलिए लगाया जाता है ताकि दशकों से चली आ रही ऐसी चीजों की सच्चाई कभी बाहर न आने पाए।

ऑपइंडिया कभी भी अपने किसी लेख में इसलिए परिवर्तन नहीं करेगा, या फिर अपने मूलभूत सिद्धांतों से समझौता नहीं करेगा, क्योंकि कुछ असहिष्णु लोगों को इससे दिक्कत है और इसे लेकर दुष्प्रचार फैलाया जा रहा है। यूके में बैठ कर कोई ट्विटर हैंडल भाषण झाड़े और हमें झुकाने की कोशिश करे तो ये संभव नहीं है। ये नहीं हो पाएगा। उन्होंने हलाल के खिलाफ लेख को समुदाय विशेष का आर्थिक बहिष्कार बता कर ऑपइंडिया का आर्थिक बहिष्कार करने का दुष्प्रचार अभियान चला रखा है, लेकिन हम अपने लेख पर शत प्रतिशत कायम हैं।

इसे संक्षिप्त में कहें तो हम अपने लेख पर पूर्णत: कायम हैं। उसमें जो भी कंटेंट है, उससे हम शत-प्रतिशत सहमत हैं। हम उसमें किसी भी प्रकार का रत्ती भर बदलाव भी नहीं करने जा रहे हैं। हमारा अस्तित्व और हमारी वफादारी हमारे पाठकों से है। हम उनके प्रति जवाबदेह हैं। हम कोई हिन्दूफ़ोबिया से ग्रसित कॉर्पोरेट हाउस नहीं हैं जो इन चीजों पर सवाल उठाने से डर जाएगा।

रेवेन्यू को लेकर CEO राहुल रौशन का बयान

वेबसाइट पर प्रचार सामग्री इसलिए होती है ताकि अतिरिक्त रेवेन्यू आए और इससे किसी को कोई परेशानी नहीं होती। हालाँकि, हमारे पास अधिकतर वित्त उन पाठकों से आता है, जो स्वेच्छा से हमें दानस्वरूप धनराशि भेजते हैं, क्योंकि उन्हें हमारा कंटेंट पसंद आता है। ये एक तरह से हमारे लिए अदृश्य ‘पोस्ट सर्विस पेवॉल’ है। ये पाठकों के ऊपर है कि वे कितना डोनेट करने की क्षमता रखते हैं और उन्हें हमारा कंटेंट कितना पसंद है।

हमें छोटे शहरों में रहने वाले छात्रों से 10 रुपए का डोनेशन भी मिलता है और बड़े शहरों में स्थापित कोई व्यक्ति हमें 3 लाख रुपए भी डोनेट कर देता है। हमें यही आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं, कोई एडवरटाइजमेंट्स नहीं। हमें यह बताने में ख़ुशी हो रही है कि इस दुष्प्रचार अभियान के बाद से हमारे रेवेन्यू में 700% की वृद्धि आई है और हमें लोगों का भरपूर समर्थन मिल रहा है।

अगर रेवेन्यू गिर भी जाए तो कोई गम नहीं है, क्योंकि हमें सिर्फ हमारे पाठकों के समर्थन की ज़रूरत है और हम उनके लिए ही लिखते हैं। इसलिए ऐसे दुष्प्रचार अभियान से हमें और ज्यादा प्रेरणा मिलती है। हमारे काम को लेकर हमारा जोश और हाई हो जाता है। दुष्प्रचार फैलाने वाले इन्हीं असहिष्णु लोगों ने तो हमारे रेवेन्यू को बढ़ाने में खासा योगदान दिया है और हम चाहते हैं कि ये अपना नकारात्मक चेहरा हर महीने ऐसे ही दुनिया के सामने लेकर आएँ, ताकि हमारे पाठक हमारा और ज्यादा उत्साहवर्द्धन करें।

और हाँ, हमें हमारे कई पाठक प्रति महीने नियमित रूप से डोनेशन देना चाहते हैं और उनकी माँग है कि हम ऑटोमेटिक पेमेंट का फीचर लेकर आएँ। हम इस पर काम कर रहे हैं और ये जल्द ही सार्थक होगा।

ऑपइंडिया अंग्रेजी की संपादक नुपूर शर्मा का मूल रूप से अंग्रेजी में जवाब यहॉं पढ़े

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

Nupur J Sharma
Editor, OpIndia.com since October 2017

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

राम मंदिर में अड़ंगा डालने में लगी AAP, ट्रस्ट को बदनाम करने की कोशिश: जानिए, ‘जमीन घोटाले’ की हकीकत

राम मंदिर जजमेंट और योगी सरकार द्वारा कई विकास परियोजनाओं की घोषणाओं के कारण 2 साल में अयोध्या में जमीन के दाम बढ़े हैं। जानिए क्यों निराधार हैं संजय सिंह के आरोप।

विराजमान भगवान विष्णु, प्रसिद्धि माता पार्वती और भगवान शिव को लेकर: त्रियुगीनारायण मंदिर की कहानी

मान्यता है कि रुद्रप्रयाग का त्रियुगीनारायण मंदिर वह जगह है जहाँ भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था।

क्या है UP सरकार का ‘प्रोजेक्ट एल्डरलाइन’, जिसके लिए PM मोदी ने की CM योगी आदित्यनाथ की सराहना

जनकल्याण के इसी क्रम में योगी सरकार ने राज्य के बेसहारा बुजुर्गों के लिए ‘एल्डरलाइन प्रोजेक्ट’ लॉन्च किया। इसके तहत बुजुर्गों की सहायता करने के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किया गया है।

क्या कॉन्ग्रेस A-370 फिर से बहाल करना चाहती है? दिग्विजय सिंह के बयान पर रविशंकर प्रसाद ने माँगा जवाब

नाम न छापने की शर्त पर कॉन्ग्रेस के कई नेताओं का मानना है कि दिग्विजय सिंह का यह बयान कॉन्ग्रेस को नुकसान पहुँचाने वाला है।

महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस अध्यक्ष ने जताई थी मुख्यमंत्री बनने की इच्छा, भड़के संजय राउत ने कहा- उद्धव ही रहेंगे CM

महाराष्ट्र प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी के अध्यक्ष नाना पटोले ने कहा था कि उनकी इच्छा मुख्यमंत्री बनने की है। इस पर अपनी राय रखते हुए संजय राउत ने कहा कि....

माता वैष्णो देवी की भूमि पर तिरुपति बालाजी के दर्शन: LG मनोज सिन्हा ने किया 62 एकड़ में बनने वाले मंदिर का भूमिपूजन

जम्मू में टीटीडी तिरुपति बालाजी के मंदिर के अलावा वेद पाठशाला, आध्यात्म केंद्र और आवास जैसी अन्य सुविधाओं का निर्माण करेगा। निकट भविष्य में स्वास्थ्य एवं शिक्षा सुविधाओं के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है।

प्रचलित ख़बरें

इब्राहिम ने पड़ोसी गंगाधर की गाय चुराकर काट डाला, मांस बाजार में बेचा: CCTV फुटेज से हुआ खुलासा

इब्राहिम की गाय को जबरदस्ती घसीटने की घिनौनी हरकत सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। गाय के मालिक ने मालपे पुलिस स्टेशन में आरोपित के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है।

कीचड़ में लोटने वाला सूअर मीका सिंह, हवस का पुजारी… 17 साल की लड़की को भेजा गंदे मैसेज और अश्लील फोटो: KRK

"इसने राखी सावंत को सूअर के जैसे चूसा। सूअर की तरह किस किया। इस तरह किसी लड़की को जबरदस्ती किस करना किसी रेप से कम नहीं है।"

16 साल की लड़की से दिल्ली के NGO वाली 44 साल की महिला करती थी ‘जबरन सेक्स’, अश्लील वीडियो से देती थी धमकी

दिल्ली में 16 साल की नाबालिग लड़की के यौन शोषण के आरोप में 44 वर्षीय एक महिला को गिरफ्तार किया गया। आरोपित महिला एनजीओ चलाती हैं और...

दलित लड़की किडनैप, नमाज पढ़ता वीडियो… और धमकी कि ₹40-50 हजार लेके भूल जाओ: UP पुलिस ने किया केस दर्ज

उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में सिलाई कंपनी में मुस्लिम समुदाय की महिलाओं के साथ काम करने वाली दलित समुदाय की लड़की का नमाज पढ़ता वीडियो...

मात्र 84 टिकट और ₹6,000 का कलेक्शन: महाराष्ट्र के सिनेमाघरों में सलमान की फिल्म ‘राधे’ को नहीं मिल रहे दर्शक

महाराष्ट्र में दो सिनेमाघरों ने खुलने के तुरंत बाद ही सलमान खान की फिल्म ‘राधे’ से अपनी शुरुआत करने का फैसला किया लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ लगी।

आईएस में शामिल केरल की 4 महिलाओं को वापस नहीं लाएगी मोदी सरकार, अफगानिस्तान की जेलों में है कैद

केरल की ये महिलाएँ 2016-18 में अफगानिस्तान के नंगरहार पहुँची थीं। इस दौरान उनके पति अफगानिस्तान में अलग-अलग हमलों में मारे गए थे।
- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

295,307FansLike
103,706FollowersFollow
393,000SubscribersSubscribe