Tuesday, April 13, 2021
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‘UPSC जिहाद’: केंद्र ने सुदर्शन न्यूज को भेजा नोटिस, सुनवाई 26 अक्टूबर तक स्थगित

केंद्र ने बताया कि नोटिस का पालन करते हुए सुदर्शन समाचार ने जवाब दिया। विचार करने एवं सिफारिशों के लिए इसे इंटर मैजिस्ट्रियल कमेटी को भेज दिया गया। इसके बाद इंटर मैजिस्ट्रियल कमेटी ने सुदर्शन न्यूज को लिखित और मौखिक दलीले पेश करने का मौका दिया।

सुदर्शन टीवी के कार्यक्रम UPSC जिहाद के मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि इंटर मैजिस्ट्रियल कमेटी ने ‘UPSC जिहाद’ कार्यक्रम के आगे के एपिसोड के प्रसारण पर सलाह देते हुए अपनी सिफारिशें दी हैं। सुदर्शन न्यूज टीवी को कमेटी की सिफारिशों को संबोधित करने का अवसर दिया जाना चाहिए। 

मामले में सुदर्शन न्यूज टीवी को एक और नोटिस जारी करने की तैयारी की जा रही है। इसके साथ ही केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से सुनवाई को टालने का अनुरोध किया, इसके बाद कोर्ट ने सुनवाई टाल दी। मामले में अब 26 अक्‍टूबर को सुनवाई होगी।

कल (अक्टूबर 4, 2020) केंद्र सरकार द्वारा स्थगन की माँग वाला एक पत्र प्रसारित किया गया था। पत्र में कहा गया है कि, जैसा कि बेंच को सूचित किया गया था, भारत संघ ने केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम, 1995 की धारा 20 (3) के तहत केंद्र सरकार द्वारा प्रदत्त अपनी शक्ति का प्रयोग करते हुए, सुदर्शन न्यूज को 23.09.2020 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था और 28.09.2020 को वापस किया गया।

नोटिस का पालन करते हुए सुदर्शन समाचार ने इसका जवाब दिया और फिर उस पर विचार करने एवं सिफारिशों के लिए इंटर मैजिस्ट्रियल कमेटी को भेज दिया गया। इसके बाद इंटर मैजिस्ट्रियल कमेटी ने अपनी कार्यवाही की, जिसमें सुदर्शन न्यूज को लिखित दलीलें दाखिल करने के साथ-साथ मौखिक दलीलें देकर मामले का प्रतिनिधित्व करने का पूरा मौका दिया गया।

कार्यवाही के बाद, आईएमसी ने कुछ कार्यक्रमों के संबंध में 04.10.2020 को केंद्र सरकार को कुछ अतिरिक्त सिफारिशें दीं जिनका सुदर्शन टीवी समाचार चैनल द्वारा प्रसारण किया जाना बाकी है।

पत्र में कहा गया है, “केंद्र सरकार का सक्षम प्राधिकारी सुदर्शन टीवी समाचार चैनल को एक और अवसर देने के लिए बाध्य है, जो इंटर मैजिस्ट्रियल कमेटी द्वारा दी गई सिफारिश और भविष्य के कार्यक्रम के संबंध में इंटर मैजिस्ट्रियल कमेटी द्वारा की गई अतिरिक्त सिफारिश पर अपना प्रतिनिधित्व सामान्य रूप से और विशेष रूप से सम्मान के साथ प्रस्तुत करे।”

Letter circulated by the central government
Letter circulated by the central government

पत्र में आगे कहा गया है, “सुदर्शन टीवी न्यूज़ चैनल को सुनवाई का अंतिम अवसर देने के बाद ही केंद्र सरकार केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम, 1995 की धारा 20 की उप-धारा 3 के तहत आदेश पारित करने की स्थिति में होगी।”

सुनवाई के दौरान, डी वाई चंद्रचूड़, इंदु मल्होत्रा और इंदिरा बनर्जी की बेंच ने इस स्थगन को स्वीकार कर लिया। केंद्र सरकार के सामने सुदर्शन न्यूज की सुनवाई कल यानी 6 अक्टूबर 2020 को होनी है।

एक याचिकाकर्ता ने सुनवाई के दौरान कहा कि अदालत को केंद्र सरकार द्वारा लिए गए फैसले के बावजूद बड़े मामले पर फैसला करने की जरूरत है। इसके बाद, सॉलिसिटर जनरल, जो केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, ने कहा, “क्या मैं एक अनुरोध कर सकता हूँ? मेरे हिसाब ये यह मामला कोर्ट, याचिकाकर्ता और प्रतिवादी के बीच में ही रहने दें। हर कोई हस्तक्षेप कर रहा है और इस दायरे को बढ़ा रहा है।” हालाँकि, बाद में अधिवक्ता शाहरुख आलम ने हस्तक्षेप किया और अदालत से अनुरोध किया कि वह 23 सितंबर को दिए गए आदेश पर अड़े रहे। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने उन्हें आश्वासन दिया कि अदालत पूरी सुनवाई करेगी।

सुनवाई के दौरान, एक वकील ने संजीव नेवार की ओर से पेश होने और इस मामले में हस्तक्षेप करने की माँग की, क्योंकि वह यूपीएससी-जिहाद के एक शो में एक पैनलिस्ट थे और पिछली सुनवाई के दौरान उनकी टिप्पणियों का उल्लेख किया गया था।

हालाँकि, जस्टिस चंद्रचूड़ ने इस अनुरोध को स्वीकार नहीं किया और कहा कि चूँकि वह टेलीविजन शो में दिखाई देते हैं, इसलिए वह शिकायत नहीं कर सकते। इसके अलावा, न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने यह भी कहा कि भविष्य में संभवत: हस्तक्षेपकर्ता उसी चैनल पर वापस जाएगा। जस्टिस चंद्रचूड़ ने सुनवाई की अगली तारीख 26 अक्टूबर तय की।

गौरतलब है 15 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने प्रथम दृष्टया अवलोकन करने के बाद सुदर्शन न्यूज के ‘बिंदास बोल’ शो के प्रसारण पर रोक लगा दी थी। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, इंदु मल्होत्रा ​​और केएम जोसेफ की एक पीठ याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि सुदर्शन न्यूज के प्रधान संपादक सुरेश चव्हाणके द्वारा होस्ट किया गया शो ‘बिंदास बोल’ सेवाओं में समुदाय विशेष के युवाओं के प्रवेश को सांप्रदायिक रूप दे रहा था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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