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भारतीय सेना में AI टास्क फोर्स, ऑपरेशन सिंदूर के बाद तैयार हुआ रोडमैप: 2027 तक बन जाएगा सिस्टम, जानिए कैसे मिनटों में दुश्मन का काम होगा तमाम

AI सॉफ्टवेयर और तकनीक का इस्तेमाल करके राडार, सेंसर और सैटेलाइट का डाटा एनालाइज करने के लिए किया जाएगा। इससे दुश्मन के विषय में जल्द पता लग सकेगा। इसके अलावा उन रिपोर्ट्स और गड़बड़ी को पहचानने में भी सेना का AI कारगर होगा, जिसने कोई खतरा पैदा होता है।

भारतीय सेना जल्द ही अपने कामकाज में AI का इस्तेमाल करेगी। इसके जरिए दुश्मन की पहचान की जाएगी और उसको निशाना बनाया जाएगा। AI और बिग डाटा को लेकर यह तैयारी सेना युद्धस्तर पर कर रही है। सेना AI को लेकर अपनी खुद की लैब तक स्थापित कर रही है। सेना इस पर पहले से काम कर रही थी लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के बाद और तेजी आ गई है। सेना ने इस काम के लिए एक जनरल स्तर के अधिकारी को जिम्मेदारी दी है।

बन गया रोडमैप

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, सेना न एक बड़ा रोडमैप बनाया है। इसके तहत सेना AI, मशीन लर्निंग और बिग डाटा जैसी तकनीकों को अपनी लड़ाई में शामिल करना चाहती है। इनका इस्तेमाल ड्रोन और हवाई हमलों आदि में किया जाएगा।

AI सॉफ्टवेयर और तकनीक का इस्तेमाल करके राडार, सेंसर और सैटेलाइट का डाटा एनालाइज करने के लिए किया जाएगा। इससे दुश्मन के विषय में जल्द पता लग सकेगा। इसके अलावा उन रिपोर्ट्स और गड़बड़ी को पहचानने में भी सेना का AI कारगर होगा, जिसने कोई खतरा पैदा होता है।

सेना का AI इस सब का इस्तेमाल करके फैसले लेने में सक्षम होगा और यह जानकारी भी उन जवानों या विमानों, जहाजों तक भी पहुँचाई जाएगी, इससे उन्हें दुश्मन की लोकेशन और उसकी क्षमताओं के विषय में भी पता चल सकेगा।

काउंटर इंटेलीजेंस में भी होगा इस्तेमाल

AI का इस्तेमाल सेना काउंटर इंटेलीजेंस में भी करेगी। इसके अलावा ताजा सूचनाओं का विश्लेषण करने, सोशल मीडिया पर नजर रखने और सप्लाई चेन तक की समस्या हल करने के लिए किया जाएगा। AI का इस्तेमाल सेना हथियारों की तैनाती में भी कर सकती है।

AI का इस्तेमाल करके तोपें या टैंक उन जगह लगाए जा सकते हैं जहाँ दुश्मन की एक्टिविटी पहचानी गई हो। इसके अलावा सेना AI तकनीक के जरिए अपने हथियारों का मेंटेनेंस करने तक में कर सकती है। इससे उसकी युद्ध को लेकर तैयारी भी तेज रहेगी।

सेना AI के जरिए उन जगहों तक की जानकारी निकालने के प्रयास में है, जहाँ GPS भी काम नहीं करता। सेना यह मिशन जल्द पूरा करने के मोड में है और इसके लिए उसने तैयारी भी तेज रखी हुई है। सेना अपनी AI तकनीक का एयरफोर्स और नेवी के साथ भी तालमेल बिठाएगी।

2026-27 तक बन जाएँगे सिस्टम

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट ने बताया है कि सेना AI और मशीन लर्निंग के यह सिस्टम्स 2026-27 तक बनाना चाह रही है। सेना ने इस मिशन के लिए डायरेक्टरेट जनरल ऑफ़ इनफार्मेशन सिस्टम्स (DGIS) के तहत एक AI लैब बनाई है। DGIS को देखने वाला अधिकारी तीन स्टार और लेफ्टिनेंट जनरल रैंक का अधिकारी होता है।

इसमें तेजी ऑपरेशन सिंदूर के बाद आई है। सेना ऐसे ऑपरेशन में ली गई सीख का इस्तेमाल AI को सिखाने में करना चाहती है, जिससे आगे अगर कभी ऐसी स्थिति बने तो वह तकनीकी तौर पर और सक्षम हो। अब AI के लिए एक टास्क फ़ोर्स भी बनाई जा रही है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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