Homeरिपोर्टराष्ट्रीय सुरक्षाDRDO की 'स्टील्थ' क्रूज मिसाइल के आगे S-400 भी माँगेगा पानी, AMCA फाइटर जेट...

DRDO की ‘स्टील्थ’ क्रूज मिसाइल के आगे S-400 भी माँगेगा पानी, AMCA फाइटर जेट के साथ मिलकर मचाएगी तबाही: जानें- 5वीं पीढ़ी के हथियार की खासियत

भारत की नई स्टील्थ क्रूज मिसाइल 'पावर गैप' को भरने का काम करेगी। यह तकनीक भारत को 'फर्स्ट स्ट्राइक' की क्षमता देगी, यानी दुश्मन के हमला करने से पहले ही उसके महत्वपूर्ण ठिकानों को खत्म कर देना।

भारत रक्षा के क्षेत्र में एक ऐसी ‘सुपर वेपन’ जोड़ी तैयार कर रहा है, जो आधुनिक युद्ध के मैदान को पूरी तरह बदल देगी। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) अब पाँचवीं पीढ़ी (5th Generation) के स्वदेशी लड़ाकू विमान AMCA (एडवांस मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) के लिए एक विशेष लॉन्ग रेंज लैंड अटैक क्रूज मिसाइल (LR-LACM) विकसित कर रहा है।

यह मिसाइल ‘स्टील्थ’ तकनीक से लैस होगी, यानी यह रडार की पकड़ में नहीं आएगी। 600 से 700 किलोमीटर तक मार करने वाली यह मिसाइल दुनिया के सबसे ताकतवर एयर डिफेंस सिस्टम जैसे S-400, THAAD और आयरन डोम को भी चकमा देने में सक्षम होगी। यह प्रोजेक्ट भारत को दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल कर देगा जिनके पास अदृश्य रहकर हमला करने की क्षमता है।

21वीं सदी का युद्ध: अब जमीन पर पैर रखे बिना मचेगी तबाही

21वीं सदी में युद्ध लड़ने के तरीके 20वीं सदी के मुकाबले पूरी तरह बदल चुके हैं। पहले जीत के लिए सेनाओं को दुश्मन की सीमा पार करनी पड़ती थी, लेकिन आज का दौर ‘टेक्नोलॉजी बेस्ड वेपन सिस्टम’ का है। अब युद्ध केवल वीरता से नहीं, बल्कि बेहतर रडार और मिसाइल सिस्टम से जीते जाते हैं। आज के समय में लंबी दूरी की मिसाइलें किसी भी देश में बिना घुसे वहाँ भारी तबाही लाने में सक्षम हैं। भारत इसी तकनीक को अपनाकर अपनी सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बना रहा है।

स्टील्थ यानी पाँचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान और मिसाइलें रडार सिस्टम को धोखा देने की कला में माहिर होती हैं। अमेरिकी स्टील्थ बॉम्बर्स ने अतीत में ईरान जैसे देशों में भारी तबाही मचाई थी, लेकिन वहाँ के रडार उन्हें देख तक नहीं पाए थे। इसी तरह की ताकत अब भारत अपने बेड़े में शामिल करना चाहता है। पाकिस्तान और चीन जैसे पड़ोसी देश लगातार अपने रडार और एयर डिफेंस को चीन की मदद से एडवांस कर रहे हैं, ऐसे में भारत की यह नई मिसाइल और फाइटर जेट की जोड़ी उनकी हर तैयारी को नाकाम कर देगी।

AMCA प्रोजेक्ट: भारत का अपना ‘अदृश्य’ लड़ाकू विमान

भारत ने पाँचवीं पीढ़ी का फाइटर जेट बनाने के लिए AMCA प्रोजेक्ट लॉन्च किया है। यह विमान शुरू से ही स्टील्थ टेक्नोलॉजी पर आधारित है, जिसका मतलब है कि इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि रडार की किरणें इससे टकराकर वापस नहीं जातीं, जिससे रडार इसे पकड़ नहीं पाता। इसकी सबसे बड़ी खूबी इसका ‘इंटरनल वेपन बे’ (आंतरिक हथियार कक्ष) है। सामान्य विमानों में मिसाइलें बाहर की ओर लटकी होती हैं, जो रडार पर सिग्नल भेजती हैं, लेकिन AMCA में हथियार विमान के पेट के अंदर छिपे होंगे।

एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) द्वारा विकसित किया जा रहा यह विमान 2030 के बाद भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल होने की संभावना है। यह विमान दुश्मन के विवादित एयरस्पेस में बिना शोर मचाए घुसने और बाहर आने की क्षमता रखेगा। इसका रडार क्रॉस-सेक्शन इतना छोटा होगा कि आधुनिक रडार के लिए भी इसे पहचानना लगभग असंभव होगा। जब यह विमान अपनी गुप्त मिसाइलों के साथ आसमान में उड़ेगा, तो यह दुश्मन के लिए एक ऐसा अदृश्य काल होगा जिसे वह अपनी स्क्रीन पर देख भी नहीं पाएगा।

स्टील्थ क्रूज मिसाइल: वजन में कम, पर वार में सबसे घातक

DRDO जिस नई क्रूज मिसाइल पर काम कर रहा है, वह सामान्य मिसाइलों से बिल्कुल अलग है। लंबी दूरी की पारंपरिक मिसाइलें (जैसे निर्भय) वजन में 1500 किलोग्राम से ज्यादा होती हैं, जिन्हें विमान के अंदरूनी हिस्से में फिट करना नामुमकिन होता है। इसी चुनौती को देखते हुए वैज्ञानिक इसे 1000 किलोग्राम के दायरे में ला रहे हैं। यह छोटा आकार और कम वजन ही इस मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत है, क्योंकि इससे AMCA अपने आंतरिक बे में एक साथ दो मिसाइलें ले जा सकेगा।

यह मिसाइल केवल आकार में छोटी नहीं होगी, बल्कि इसका पूरा ढाँचा ही स्टील्थ-केंद्रित होगा। इसमें ऐसी विशेष सामग्री (Composites) और बनावट का इस्तेमाल किया जा रहा है जो रडार रिफ्लेक्शन को कम से कम कर देती है। जब यह मिसाइल लॉन्च की जाएगी, तो विमान के दरवाजे बहुत कम समय के लिए खुलेंगे, ताकि जेट की अपनी स्टील्थ क्षमता पर कोई असर न पड़े। यह इंजीनियरिंग का एक ऐसा चमत्कार है जो भारत की मारक क्षमता को दोगुना कर देगा।

रडार की आँखों में धूल: S-400 और आयरन डोम का काल

आज की दुनिया में रूस का S-400 और इजरायल का आयरन डोम जैसे एयर डिफेंस सिस्टम सबसे बेहतरीन माने जाते हैं। ये सिस्टम हवा में आने वाली किसी भी चीज को ट्रैक करके नष्ट कर देते हैं। लेकिन भारत की नई मिसाइल इन सुरक्षा चक्रों को भेदने के लिए ही बनाई जा रही है। इसकी रडार को चकमा देने वाली संरचना और कम ऊँचाई पर उड़ने की क्षमता इसे दुश्मन की नजरों से बचाए रखेगी। यह मिसाइल जमीन के करीब उड़ते हुए दुश्मन के बेस तक पहुंच जाएगी और उन्हें पता भी नहीं चलेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि 600 से 700 किलोमीटर की मारक क्षमता सामरिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है। यह रेंज दुश्मन के कमांड सेंटर, रडार स्टेशनों, वायु रक्षा प्रणालियों और लॉजिस्टिक केंद्रों को तबाह करने के लिए काफी है। चूँकि AMCA विमान का अपना हमला करने का दायरा 1500 किलोमीटर है, इसलिए यह मिसाइल उसे और भी खतरनाक बना देती है। विमान सीमा के बाहर से ही मिसाइल छोड़ देगा और मिसाइल अपनी अदृश्य शक्ति से लक्ष्य को भेद देगी।

स्वदेशी तकनीक का दम: इंजन से लेकर गाइडेंस तक ‘मेड इन इंडिया’

इस मिसाइल परियोजना की एक और बड़ी ताकत इसकी स्वदेशी तकनीक है। इसमें भारत के अपने छोटे टर्बोफैन इंजन (जैसे मानिक/STFE) का इस्तेमाल किए जाने की संभावना है। यह इंजन मिसाइल को लंबी दूरी तक उड़ने के लिए जरूरी ताकत प्रदान करेगा। इसके अलावा, मिसाइल में अत्याधुनिक गाइडेंस सिस्टम लगा होगा, जो इसे सटीक निशाना लगाने में मदद करेगा। भारत का लक्ष्य अब विदेशी हथियारों पर निर्भरता कम करके अपनी सुरक्षा खुद सुनिश्चित करना है।

यह प्रोजेक्ट फिलहाल डिजाइन और कॉन्सेप्ट के चरण में है, लेकिन इसका उद्देश्य बहुत स्पष्ट है। 2030 के दशक के मध्य तक भारत चाहता है कि उसके पास पूरी तरह से स्वदेशी और दुनिया के सबसे आधुनिक हथियारों का सेट हो। रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि जब AMCA और यह नई स्टील्थ मिसाइल एक साथ काम करेंगे, तो भारत की वायु शक्ति वैश्विक स्तर पर एक नई प्रतिष्ठा हासिल करेगी। यह न केवल देश की रक्षा करेगा, बल्कि दुनिया को भारत की तकनीकी प्रगति का लोहा भी मनवाएगा।

रणनीतिक बढ़त: भविष्य के युद्धों के लिए भारत की तैयारी

चीन की बढ़ती सैन्य शक्ति और पाकिस्तान की रडार तैनाती को देखते हुए भारत का यह कदम बहुत जरूरी है। चीन अपने एयर डिफेंस सिस्टम को लगातार मजबूत कर रहा है, जिसे भेदने के लिए सामान्य मिसाइलें काफी नहीं होंगी। भारत की नई स्टील्थ क्रूज मिसाइल इसी ‘पावर गैप’ को भरने का काम करेगी। यह तकनीक भारत को ‘फर्स्ट स्ट्राइक’ की क्षमता देगी, यानी दुश्मन के हमला करने से पहले ही उसके महत्वपूर्ण ठिकानों को खत्म कर देना।

यह मिसाइल भविष्य के युद्धक्षेत्र में घातक मारक क्षमता और ‘इनविजिबिलिटी’ (अदृश्यता) का एक शानदार संतुलन है। वैज्ञानिकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती विमान की स्टील्थ क्षमता को बनाए रखते हुए मिसाइल को लॉन्च करना है। DRDO के वैज्ञानिक इसी बारीक तकनीक पर दिन-रात काम कर रहे हैं। जब यह प्रोजेक्ट पूरा होगा, तो भारतीय वायुसेना के पास वह ताकत होगी जो आज केवल अमेरिका या रूस जैसे देशों के पास है।

बदलती दुनिया में भारत का नया ‘शक्ति कवच’

आज के दौर में शांति तभी बनी रह सकती है जब आप युद्ध के लिए सबसे ज्यादा तैयार हों। भारत की ‘स्टील्थ’ क्रूज मिसाइल और AMCA प्रोजेक्ट इसी विचारधारा का हिस्सा हैं। यह केवल हथियारों की होड़ नहीं है, बल्कि देश की संप्रभुता को सुरक्षित रखने का एक आधुनिक तरीका है।

जिस तरह से युद्ध के मैदान अब रडार की स्क्रीन और डिजिटल सिग्नल्स पर लड़े जा रहे हैं, भारत का यह ‘अदृश्य काल’ आने वाले समय में हमारी सीमाओं की रक्षा का सबसे बड़ा हथियार बनेगा। यह आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता एक ऐसा कदम है, जो दुश्मन के मन में खौफ पैदा करेगा और भारत को एक महाशक्ति के रूप में स्थापित करेगा।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

विशेषता
विशेषता
सुर्खियों के पीछे छिपी कहानियों की तलाश में...

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

गुजरात के अमरेली में युवक को मारने वाले चार शेरों को उम्रकैद: जानिए कैसे किसी शेर को घोषित किया जाता है ‘आदमखोर’ और क्या...

गुजरात के अमरेली की घटना से समझें कैसे किसी शेर को 'आदमखोर' घोषित किया जाता है और क्यों कई बार उसे हमेशा के लिए जंगल से हटाया जाता है।

पहलगाम आतंकी हमले पर UN रैपोर्टियर बेन सॉल ने दिए थे भारत विरोधी बयान, ऑपइंडिया ने उसी समय उठाए थे सवाल: जाँच में चीन...

UN वॉच की रिपोर्ट में बेन सॉल पर चीन से फंडिंग लेने और भारत के आतंकवाद-रोधी अभियानों के खिलाफ पक्षपातपूर्ण रुख अपनाने के आरोप लगे।
- विज्ञापन -