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मनमोहन सिंह थे PM तो टॉप पर थी नक्सलियों की हिंसा, मोदी राज में 77% की कमी: संसद में बताया प्रभावित इलाकों में विकास को कैसे दी रफ्तार

"एलडब्ल्यूई हिंसा की रिपोर्ट करने वाले जिले भी 96 (2010) से घटकर 46 (2021) हो गए हैं।"

वर्ष 2021 में देश में नक्सली हिंसा की 509 घटना सामने आई। इन हिंसाओं में 147 नागरिकों और सुरक्षा बलों के जवानों की मृत्यु हुई। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में मंगलवार (15 मार्च 2022) को एक सवाल के जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 2009 में नक्सलियों की हिंसा अपने शीर्ष स्तर पर थी। उस साल ऐसी 2,258 घटनाएँ हुई थीं। इसके मुकाबले 2021 में इन घटनाओं में 77 फीसदी की कमी दर्ज की गई है।

उल्लेखनीय है कि जिस समय नक्सली हिंसा अपने शीर्ष पर थी उस समय केंद्र में मनमोहन सिंह के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए सरकार चल रही थी। 2010 के 1005 नागरिकों और जवानों की मौत ऐसी घटनाओं में हुई थी। मंत्री ने बताया इन आँकडों में कमी राष्ट्रीय नीतियों और राज्यों के प्रयासों से आया है। नीतियों के सफल कार्यान्वयन के कारण इस तरह की हिंसा में लगातार गिरावट आई है।

गृह राज्य मंत्री ने बताया कि जिन जिलों को वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित माना जाता है वहाँ सुरक्षा संबंधी व्यय जिले की पिछले चार वर्षों में दो बार समीक्षा की गई है। राय ने लिखित जवाब में बताया है, “एलडब्ल्यूई हिंसा की रिपोर्ट करने वाले जिले भी 96 (2010) से घटकर 46 (2021) हो गए हैं।”

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नक्सल हिंसा से प्रभावित राज्यों में विकास को लेकर जानकारी देते हुए बताया कि ऐसे इलाकों के लिए केंद्र सरकार की तरफ से कई फ्लैगशिप स्कीम चलाई जा रही हैं। इन क्षेत्रों सड़कों के विस्तार, कम्युनिकेशन में सुधर, कौशल विकास और वित्तीय समावेशन पर विशेष जोर दिया जा रहा है। केंद्र की विशेष सहायता योजना के तहत बीते 3 साल में राज्यों को 2423.24 करोड़ रुपए जारी किए गए हैं। इसी दौरान 7815 कार्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया गया है। मौजूदा वित्त वर्ष में 480 करोड़ रुपए जारी किए गए हैं। पुनर्वास पैकेज में अन्य बातों के साथ-साथ हाई रैंक वाले उग्रवादी कैडरों के सरेंडर करने पर 5 लाख रुपए और अन्य के लिए 2.5 लाख रुपए का तत्काल अनुदान शामिल है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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