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‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने तोड़ी पाकिस्तानी फौज की कमर, करोड़ों के नुकसान में आतंकी मुल्क: IAF ने तबाह किए 6 लड़ाकू जेट, 2 निगरानी विमान, 1 C-130, 30+ मिसाइलें और कई ड्रोन

ऑपरेशन में भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के 6 लड़ाकू विमान, 2 महत्वपूर्ण निगरानी एयरक्राफ्ट, एक C-130 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, 30 से अधिक मिसाइलें और कई मानवरहित हवाई वाहन (ड्रोन) नष्ट कर दिए। यह कार्रवाई मुख्य रूप से हवा से दागी जाने वाली क्रूज मिसाइलों के जरिए की गई, जो भारत की सटीक मारक क्षमता को दर्शाती है।

मंगलवार (6 मई 2025) की रात को शुरू हुआ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ भारतीय वायुसेना की अब तक की सबसे सटीक और प्रभावशाली सैन्य कार्रवाई बनकर उभरा है। इस चार दिवसीय संघर्ष में भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान की हवाई ताकत को जबरदस्त झटका दिया।

जानकारी के अनुसार, इस ऑपरेशन में भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के 6 लड़ाकू विमान, 2 महत्वपूर्ण निगरानी एयरक्राफ्ट, एक C-130 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, 30 से अधिक मिसाइलें और कई मानवरहित हवाई वाहन (ड्रोन) नष्ट कर दिए। यह कार्रवाई मुख्य रूप से हवा से दागी जाने वाली क्रूज मिसाइलों के जरिए की गई, जो भारत की सटीक मारक क्षमता को दर्शाती है।

ऑपरेशन की सबसे बड़ी सफलता तब मिली जब भारतीय वायुसेना ने अपनी अत्याधुनिक सुदर्शन मिसाइल प्रणाली का इस्तेमाल करते हुए लगभग 300 किलोमीटर की दूरी से एक पाकिस्तानी निगरानी एयरक्राफ्ट को सटीक निशाना बनाया और उसे मार गिराया।

इसके अलावा, भोलारी एयरबेस पर हुए हमले के दौरान स्वीडिश मूल का एक और एयरबोर्न अर्ली वार्निंग सिस्टम भी नष्ट हो गया।

जानकारी के मुताबिक, भारतीय वायुसेना के अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों, जैसे राफेल और सुखोई-30, ने मिलकर पाकिस्तान के एक हैंगर को निशाना बनाया, जिसमें कई चीनी मूल के विंग लूंग ड्रोन ढेर हो गए। इंडियन एयर डिफेंस सिस्टम ने भी इस संघर्ष के दौरान 10 से अधिक पाकिस्तानी ड्रोन मार गिराए। साथ ही, पाकिस्तान द्वारा भारतीय एयरबेसों पर दागी गई कई क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइलों को भी हवा में ही नष्ट कर दिया गया, जिससे भारत की रक्षात्मक क्षमता साबित हुई।

भारतीय ड्रोन हमलों के दौरान पंजाब क्षेत्र में पाकिस्तान का एक C-130 सैन्य परिवहन विमान भी तबाह हो गया। पाकिस्तान ने शुरुआत में जवाबी कार्रवाई की कोशिश की, लेकिन जब उसे भारी नुकसान उठाना पड़ा तो उसने 10 मई, 2025 को युद्धविराम का अनुरोध किया, जिसके बाद चार दिनों का यह संघर्ष समाप्त हो गया।

खास बात यह है कि इस पूरे अभियान के दौरान ब्रह्मोस मिसाइलों का प्रयोग नहीं किया गया, जिससे यह संकेत मिलता है कि भारत ने लक्षित और नियंत्रित शक्ति का उपयोग किया। भारतीय वायुसेना इस पूरे ऑपरेशन के दौरान जुटाए गए डेटा का गहन तकनीकी विश्लेषण कर रही है।

यह ऑपरेशन भारत की रणनीतिक क्षमता और सटीक सैन्य कार्रवाई का एक सशक्त उदाहरण बन गया है, जो भविष्य के किसी भी खतरे से निपटने की भारत की तैयारी को दर्शाता है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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