Saturday, July 27, 2024
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‘गोली का सामना करना जानते हैं?’ – जिस IAF ऑफिसर ने शुरू किया लद्दाख एयरस्ट्रिप, कॉन्ग्रेसी नेता को यूँ कराया था चुप

"अगर हम पाकिस्तान पर स्ट्राइक करते तो यह 100 प्रतिशत सफल होता, बिना किसी दुर्घटना के साथ। मगर बिना सरकार की अनुमति के हम इसको अंजाम नहीं दे सकते थे। हमने यूपीए सरकार के सामने कई प्रस्ताव रखे और उनसे हार्ड इंटेलीजेंस के लोगों के साथ की डिमांड रखी। लेकिन..."

भारत-चीन के बीच लद्दाख में चल रहे तनाव के दौरान दौलत बेग ओल्डी हवाई पट्टी का इस्तेमाल हुआ है। चीन के साथ हालिया तनाव के बीच इसी स्ट्रिप का इस्तेमाल कर इलाके में सैनिकों की तैनाती की गई। सेना को लॉजिस्टिक्स सपोर्ट समय से पहुॅंचाने के लिहाज से यह बेहद महत्वपूर्ण एयरस्ट्रिप है।

लद्दाख का दौलत बाग ओल्डी (DBO) दुनिया की सबसे ऊँची एयरस्ट्रिप है। यह 16,614 फीट की ऊँचाई पर स्थित है। इसे एडवांस लैंडिंग ग्राउंड भी कहा जाता है। मगर यह एयरस्ट्रिप 1965 से 2008 के बीच नॉन-ऑपरेशनल रहा था।

इसकी दोबारा से शुरुआत मई 2008 में वायु सेना के तत्कालीन वाइस चीफ एयर मार्शल (सेवानिवृत) प्रणब कुमार बारबोरा ने किया था। वो भी बिना तत्कालीन सरकार को बताए।

कौन है प्रणब कुमार बारबोरा

एयर मार्शल प्रणब कुमार बारबोरा ने 01 जून 09 को एयर हेडक्वार्टर में एयर मार्शल के तौर पर 26वें उप-प्रमुख के रूप में पदभार संभाला था। एयर मार्शल प्रणव को एक फाइटर पायलट के रूप में जून 1970 में कमीशन दिया गया था। बतौर पायलट उन्होंने 3500 घंटे फाइटर प्लेन उड़ाया है। उन्होंने 1971 में बांग्लादेश के विभाजन के वक्त हुए युद्ध में भी हिस्सा लिया था। प्रणब एक क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर और फाइटर कॉम्बैट लीडर हैं।

अपने करियर में उन्होंने कई चुनौतीपूर्ण दायित्वों का निर्वहन किया। जैसे – मिग-21 स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर, एयर कॉम्बैट सिम्युलेटर यूनिट और फाइटर विंग के मुख्य संचालन अधिकारी। वह टैक्टिक्स और एयर कॉम्बैट डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट में डायरेक्टिंग स्टाफ के रूप में तैनात थे।

उन्हें कई प्रतिष्ठित पदों के लिए भी चुना गया। जैसे – फाइटर बेस के एयर ऑफिसर कमांडिंग, भारत के दूतावास में एयर अतैशे (air attache), मॉस्को, इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ के सहायक प्रमुख और वायु सेना के सहायक प्रमुख।

वह उत्तर-पूर्व के पहले ऐसे अधिकारी थे, जिन्हें एयर मार्शल के पद पर प्रोमोट किया गया था। एयर मार्शल के पद पर प्रोमोट होने के बाद, उन्हें वरिष्ठ एयर स्टाफ अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया और बाद में उन्होंने पूर्वी एयर कमान संभाली। वह पश्चिमी एयर कमान और एयर अफसर कमांडिंग इन चीफ अधिकारी भी थे। देश सेवा में किए गए कार्यों के लिए परम विशिष्ट सेवा पदक और वायु सेना पदक भी उन्हें मिला है।

प्रणब कुमार बारबोरा की खासियत रही है – बिना लाग-लपेट के अपनी बात रखना। 26/11 में हुए आतंकी हमले को लेकर प्रणब कुमार बारबोरा ने पाकिस्तान पर एयर स्ट्राइक नहीं करने के फैसले को लेकर पूर्व पीएम मनमोहन सिंह पर नाराजगी जताई थी। 26/11 के हमले को लेकर बौखलाई भारतीय वायु सेना ने कॉन्ग्रेस की मनमोहन सरकार को पाकिस्तान पर एयर स्ट्राइक करने का विकल्प दिया था।

टाइम्स नाउ को दिए एक इंटरव्यू में बारबोरा ने कहा था, “अगर हम पाकिस्तान पर स्ट्राइक करते तो यह 100 प्रतिशत सफल होता, बिना किसी दुर्घटना के साथ। मगर बिना सरकार की अनुमति के हम इसको अंजाम नहीं दे सकते थे। हमने यूपीए सरकार के सामने कई प्रस्ताव रखे और उनसे हार्ड इंटेलीजेंस के लोगों के साथ की डिमांड रखी। क्योंकि ये इंटेलिजेंस एजेंसी की जिम्मेदारी है। क्योंकि अगर हम बिना तैयारी के स्ट्राइक करते और हम उसमें सफल नहीं होते तो हम लोगों के सामने हँसी का पात्र होते।”

अक्टूबर 2016 में एक TV डिबेट के दौरान प्रणब कुमार बारबोरा ने कॉन्ग्रेस प्रवक्ता को यह कह कर चुप करा दिया था कि क्या वो गोली का सामना करना जानते हैं? या क्या वो यह जानते हैं कि सर्जिकल स्ट्राइक किसे कहते हैं और आइसोलेटेड स्ट्राइक किसे कहते हैं?

पाकिस्तान पर एयर स्ट्राइक को लेकर एक इंटरव्यू में पूर्व वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल फली होमी मेजर ने भी कहा था कि भारतीय वायुसेना युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार थी लेकिन सरकार ने इस विषय में अपना मन नहीं बनाया। वायुसेना प्रमुख होमी ने कहा था:

“किसी ने युद्ध को लेकर अपना मन नहीं बदला (26/11 के बाद) बल्कि सरकार ही अपना मन नहीं बना सकी। मैं जनता के क्रोध और नाराज़गी की भावना को समझता हूँ। भारतीय वायु सेना पाकिस्तान पर हमला करने के लिए तैयार थी। हालाँकि, सरकार क्या चाहती थी? हम तो किसी भी तरह की कार्रवाई के लिए तैयार थे।”

एयर चीफ मार्शल ने यह भी कहा कि सीमा पार जिहादी कैम्पों को तबाह करने के लिए एयर स्ट्राइक की भी योजना थी लेकिन भारत सरकार इसके पक्ष में नहीं थी क्योंकि उसे डर था कि सीमा पार आतंकियों पर की गई कोई भी कार्रवाई ‘पूर्ण युद्ध’ का रूप धारण कर सकती है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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