Homeरिपोर्टराष्ट्रीय सुरक्षाबांग्लादेशी-रोहिंग्या छोड़िए, भारत में अवैध रूप से रह रहे ईरान के भी नागरिक: फर्जी...

बांग्लादेशी-रोहिंग्या छोड़िए, भारत में अवैध रूप से रह रहे ईरान के भी नागरिक: फर्जी आधार कार्ड भी मिले

पुलिस ने मामले में जिन 9 आरोपितों को गिरफ्तार किया है, उनमें 3 महिलाएँ भी शामिल हैं। ये सभी समंदर के किनारे बसे शहर कोवलम के एक रिसॉर्ट में अवैध रूप से ठहरे थे।

तमिलनाडु में चेन्नई पुलिस ने भारत में अवैध रूप से रहकर लूट-पाट करने वाले 9 ईरानी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से फर्जी आधार कार्ड भी बरामद किया गया है। इसका खुलासा उस वक्त हुआ, जब चेन्नई पुलिस एक सोमालियाई नागरिक से हुई लूट के मामले की जाँच कर रही थी।

दरअसल, इन विदेशी ठगोें ने चेन्नई में अपनी आँखों का इलाज कराने आए सोमालिया के एक नागरिक को रोक लिया और खुद को सेंट्रल पुलिस बताकर उससे 3,800 अमेरिकी डॉलर (करीब 2,84,866 रुपए) ऐंठ लिए थे।

पुलिस ने मामले में जिन 9 आरोपितों को गिरफ्तार किया है, उनमें 3 महिलाएँ भी शामिल हैं। ये सभी समंदर के किनारे बसे शहर कोवलम के एक रिसॉर्ट में अवैध रूप से ठहरे थे। इसके साथ ही पुलिस टीम ने लूट के लिए इस्तेमाल की गई कार का भी पता लगा लिया है।

इस मामले में केंद्रीय पुलिस ने कहा है कि तीन ईरानी नागरिकों ने सोमालियाई नागरिक से नार्कोटिक्स की जाँच के बहाने रोका और लूट की वारदात को अंजाम दिया। इस मामले में चेन्नई की सिटी पुलिस ने बताया कि ये आरोपित कोवलम के रिसॉर्ट्स में अवैध रूप से रह रहे थे।

सोमालिया का 61 वर्षीय पीड़ित व्यक्ति यहाँ अपनी आँख का इलाज कराने के लिए आया था। लूट के मामले में उसने थाउजेंड लाइट्स पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। इस केस की जाँच के लिए चेन्नई सिटी पुलिस ने एक स्पेशल टीम गठित की है।

न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसा लगता है कि ईरानी ठगों का यह गिरोह काफी लंबे समय से शहर और उसके आसपास के इलाकों में इसी तरह की वारदातों को अंजाम देने में लिप्त थे।

चेन्नई सिटी पुलिस ने प्रेस विज्ञप्ति में स्पष्ट किया है कि आरोपितों के पास से फर्जी आधार कार्ड निकले हैं। इतना ही नहीं इन सभी लोगों के पास भारत की यात्रा करने का भी कोई वैध दस्तावेज नहीं मिला है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

कुएँ में कूदने की जगह नहीं बची तो रोने लगीं हिंदू महिलाएँ: जानिए- 1947 में रावलपिंडी के तोहा खालसा में 90 हिंदू-सिख महिलाओं ने...

जानिए 1947 के रावलपिंडी दंगों में तोहा खालसा की 93 हिंदू महिलाओं के कुएँ में एक साथ कूदकर जान देने की दर्दनाक कहानी।

क्या आंतरिक मतभेद को चुनावी हेरफेर का सबूत मानना सही है?

चुनाव आयोग की 14 आपत्तियों, SIR और वोटर डेटा विवाद के बीच जानिए, क्या आंतरिक मतभेद चुनावी हेरफेर का प्रमाण हैं?
- विज्ञापन -