Tuesday, August 3, 2021
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JEE और NEET परीक्षा के विरोध में हाथ पर ब्लेड लगाने की पुरानी तस्वीरों के जरिए कॉन्ग्रेस आईटी सेल फैला रहा झूठ

कुछ लोग साजिश के तहत युवाओं में भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं कि छात्र JEE-NEET परीक्षा के खिलाफ हैं। सोशल मीडिया यूजर्स ने बताया कि कॉन्ग्रेस आईटी सेल 4 साल पुरानी यानी 2016 की ब्लेड से हाथ काटने की तस्वीर को छात्र का बताते हुए शेयर की जा रही है।

लाखों छात्रों के भविष्य और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मद्देनजर केंद्र सरकार ने JEE और NEET परीक्षा कराने का फैसला किया है, लेकिन कॉन्ग्रेस और कुछ गैरजिम्मेदार राजनीतिक पार्टियाँ इसके खिलाफ देश भर के युवाओं को उकसाने का प्रयास कर रही हैं। 

इसके अलावा सोशल मीडिया के जरिए भी युवाओं को भ्रमित करने की साजिश रची जा रही है। कई फर्जी ट्वीट अकाउंट से पुरानी तस्वीरें पोस्ट कर JEE और NEET परीक्षा के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है।

Debjani नाम के सोशल मीडिया हैंडल से इस बात का खुलासा किया गया है कि किस तरह कुछ लोग फेक अकाउंट से परीक्षा के खिलाफ अभियान चला रहे हैं। उन्होंने बताया कि कैसे हाथ पर ब्लेड लगाने की पुरानी तस्वीरों को बच्चों का बता कर कॉन्ग्रेस आईटी सेल झूठ फैला रहा है। 

उन्होंने बताया कि कुछ लोग साजिश के तहत युवाओं में भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं कि छात्र JEE-NEET परीक्षा के खिलाफ हैं। सोशल मीडिया यूजर्स ने बताया कि कॉन्ग्रेस आईटी सेल 4 साल पुरानी यानी 2016 की ब्लेड से हाथ काटने की तस्वीर को छात्र का बताते हुए शेयर की जा रही है।

उन्होंने यह भी बताया कि जिस ट्विटर हैंडल से यह शेयर किया जा रहा है वह फेक आईडी है। इसे 2020 में ही बनाया गया है और इसके टाइमलाइन पर प्रो कॉन्ग्रेसी ट्वीट्स भरे हुए हैं।

बता दें कि AnanyaS06358832 हैंडल से एक ट्विटर यूजर ने हाथ पर ब्लेड लगाने की एक तस्वीर को शेयर किया। इसके साथ दावा किया गया कि वह शेड्यूल के अनुसार परीक्षा को जारी रखने के सरकार के फैसले के खिलाफ आत्महत्या कर रही है।

हालाँकि, रिवर्स इमेज सर्च करने पर पता चलता है कि यह इंटरनेट पर काफी समय से उपलब्ध है और इसे ट्विटर पर कई बार शेयर किया जा चुका है। जब काफी सोशल मीडिया यूजर्स ने बताया कि यह तस्वीर गूगल से ली गई है, तो ट्विटर यूजर ने ट्वीट डिलीट कर दिया।

एक अन्य ट्विटर यूजर ने हाथ से खून टपकने की एक और तस्वीर शेयरकी, जिसमें आरोप लगाया गया कि सरकार द्वारा परीक्षाओं को स्थगित करने के फैसले के बाद कई छात्रों ने आत्महत्या करने का प्रयास किया है। ट्विटर यूजर ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र के फैसले के कारण छात्र डिप्रेशन और मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं।

पॉलिटिकल साइंस के एक छात्र ने एक ट्वीट के जरिए आरोप लगाया गया है कि वह कोरोना वायरस महामारी और बाढ़ के कारण जेईई और एनईईटी की परीक्षा नहीं दे सकता।

कई अन्य यूजर्स ने भी कॉन्ग्रेस आईटी सेल की पोल खोलने के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से इसके खिलाफ कार्रवाई करने की माँग की है।

गौरतलब है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने दूरदर्शन के साथ बातचीत में बताया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले और छात्रों-अभिभावकों के दवाब के मद्देजनर NEET-JEE परीक्षा कराने का फैसला किया है ताकि स्टूडेट्स का साल बर्बाद न हो। 

उन्होंने बताया कि JEE परीक्षा के लिए अब तक 85 फीसदी स्टूडेंट्स एडमिट कार्ड डाउनलोड कर चुके हैं। निशंक ने कहा कि छात्रों की सुविधा को देखते हुए परीक्षा केंद्र आवंटित किए गए हैं। बता दें कि JEE की परीक्षा 1 से 6 सितंबर के बीच होनी हैं जबकि NEET परीक्षा 13 सितंबर को होगी। 

उधर, कॉन्ग्रेस और दूसरी राजनीतिक पार्टियाँ JEE-NEET परीक्षा को लेकर राजनीति करने पर उतर गई है। कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने बुधवार (अगस्त 26, 2020) को NEET और JEE परीक्षा को लेकर 7 गैर बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की। 

इस बैठक में राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत, छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश सिंह बघेल, पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह, पुडुचेरी के सीएम नारायणसामी, महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे, झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हिस्सा लिया। 

ये सभी राज्य कोरोना काल में NEET और JEE की परीक्षा टालने की माँग कर रहे हैं। हालाँकि हकीकत यह है कि ये सभी मुख्यमंत्री अपने राज्यों में सारी गतिविधियों की अनुमति दे रखी हैं। कॉन्ग्रेस और विपक्षी पार्टियाँ अब युवाओं के कंधे पर बंदूक रखकर मोदी सरकार पर निशाना साधने की कोशिश कर रही हैं। एक तरफ ये नेता लॉकडाउन को लेकर लगातर ढील देने की वकालत कर रहे हैं तो दूसरी तरफ परीक्षा रद्द करने की माँग कर रहे हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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