Homeसोशल ट्रेंडफराह खान ने खुलेआम की मोदी समर्थकों की मौत की कामना- माँगी दुआ, पहले...

फराह खान ने खुलेआम की मोदी समर्थकों की मौत की कामना- माँगी दुआ, पहले भी कर चुकी हैं RSS की ISIS से तुलना

"कोरोना वायरस महामारी से निपटने में पीएम की विफलता के मद्देनजर हर भक्त के लिए, मैं दुआ करती हूँ कि तुम्हारा कोई परिजन मरे ताकि तुम्हें वो गुस्सा महसूस हो जो कुप्रबंधन और सत्ता की भूखे एजेंडे के कारण अपनों को न बचा पाने की वजह से पैदा होता है।"

कोरोना महामारी के प्रकोप के बीच रविवार (मई 9, 2021) को ज्वेलरी डिजाइनर फराह खान अली ने ट्विटर पर मोदी समर्थकों और उनके परिजनों के लिए मृत्यु की कामना की। मोदी सरकार की बुराई न करने वालों पर अपना गुस्सा निकालते हुए फराह खान ने कहा कि वह दुआ करती हैं कि भक्तों का कोई परिजन मरे ताकि उनका भी खून सरकार के विरुद्ध खौल सके।

अपने ट्वीट में फराह खान ने लिखा, “कोरोना वायरस महामारी से निपटने में पीएम की विफलता के मद्देनजर हर भक्त के लिए, मैं दुआ करती हूँ कि तुम्हारा कोई परिजन मरे ताकि तुम्हें वो गुस्सा महसूस हो जो कुप्रबंधन और सत्ता की भूखे एजेंडे के कारण अपनों को न बचा पाने की वजह से पैदा होता है।”

बता दें कि ट्विटर पर 7 लाख से ज्यादा फॉलोवर्स वाली फराह अली खान उन्हीं संजय खान की बेटी हैं, जिन्होंने एक टीवी सीरिज में टीपू सुल्तान की भूमिका निभाई। वह फिरोज खान की भतीजी और ऋतिक रौशन की पूर्व पत्नी सुजैन खान की बहन हैं।

लोगों का इस ट्वीट को देखकर कहना है कि जब मोदी सरकार से भरोसा उठने लगता है वैसे ही ऐसे लोग आकर ऐसी बातें कर देते हैं कि दोबारा उनपर विश्वास बन जाता है। एक यूजर ने फराह खान के साथ ट्वीट पर हुई बातचीत के स्क्रीनशॉट शेयर किए हैं।

वघीशा नाम की ट्विटर यूजर का कहना है कि इस बातचीत के बाद ही फराह ने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया। इस ट्वीट में वघीशा ने पूछा था कि आखिर वो ऐसी दुआ कैसे कर सकती हैं जो कोई दुश्मनों के लिए भी न करें।

फराह ने वघीशा के ट्वीट के जवाब में लिखा, “जब मैंने ट्वीट किया मैं बहुत ज्यादा परेशान थी क्योंकि कई लोग हैं जिन्हें मैं जानती थी और खो दिया। मुझे अफसोस है कि मैंने क्या ट्वीट किया और ये स्पष्ट भी किया है कि किसी की मौत की कामना नहीं करनी चाहिए। मैंने जो भी कहा वो गुस्से और पीड़ा में कहा।”

उल्लेखनीय है कि कोरोना के कारण मोदी समर्थकों या फिर संघियों की मौत की कामना पहली बार नहीं की गई। इससे पहले बंगाल में हिंसा के वक्त कई लोगों ने भाजपा कार्यकर्ताओं की मौत या फिर संघियों पर हो रही बर्बरता पर अपनी खुशी खुलकर मनाई थी। अब भी कई लिबरल आज अपनी कुंठा संवेदनाओं की आड़ में निकाल रहे हैं और खुलेआम उन लोगों की मृत्यु की कामना कर रहे हैं जिन्हें वह जानते तक नहीं।

जाहिर है कि कोई इस बात से इंकार नहीं कर सकता कि हमारा प्रशासन कोविड की दूसरी लहर को संभालने में असमर्थ रहा और स्वास्थ्य असुविधाओं के कारण असमय लोगों की जानें गईं। लेकिन, इस दौरान ऐसे संदेश जिनमें संघियों और उनके प्रियजनों की मौत की कामना की गई हो, वह भी कहीं से कहीं तक इंसानियत की मिसाल पेश नहीं कर रहे। किसी की जान जाने पर खुशी मनाना या फिर किसी की मरने की ही कामना कर लेना, इस बात को बताता है कि महामारी के समय भी एक निश्चित विचाराधारा के प्रति लिबरलों, वामपंथियों और कट्टरपंथियों में गुस्सा उतना भरा हुआ है जितना की इस महामारी से पहले था।

फराह खान अली के बारे में मालूम हो कि वह पहले भी आरएसएस की ISIS आतंकी संगठन के साथ तुलना कर चुकी हैं। इसके अलावा वह महाराष्ट्र की बदहाली के बावजूद उद्धव सरकार की तारीफ करती रही हैं।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

Uber, ओला, Rapido… एक ही जगह का किराया बार-बार क्यों बदलता रहता है?, कैसे बचाएँ अपनी जेब के पैसे

ओला, Uber या Rapido जैसी ऐप्स का सिस्टम एक ऐसे एल्गोरिदम से चलता है जिसे सिर्फ मुनाफा और संतुलन समझ आता है। जानें कैसे स्मार्ट यूजर बनें।

सिनेमाई परदे पर यूरोप की सुलगती हकीकत है Citizen Vigilante Movie: समझें- क्यों परेशान हैं दुनिया भर के इस्लामी कट्टरपंथी और लेफ्ट लिबरल?

लिबरल और वामपंथी समीक्षक 'सिटीजन विजिलांते' फिल्म को चाहे कितनी भी कम रेटिंग क्यों न दें, इस फिल्म ने अपना काम कर दिया है।
- विज्ञापन -