शशि थरूर जी ब्रो, आपके व्हाट्सएप में पहुँची हर शायरी ग़ालिब की नहीं होती!

शायरी के प्रेमियों को अब डर सता रहा है कि वो कहीं अगले दिन मोमिन के नाम पर ऐसे अशआर न ट्वीट करने लगें: "एक चाँद को देख कर चांदनी भी शरमा गई/ किस्मत थी इस गरीब की सवारी गाड़ी में आ गई"

‘सावधानी हटी, दुर्घटना घटी’ इस तरह की शायरियाँ और चेतावनियाँ अक्सर गाड़ी और टेम्पो के पीछे लिखी नजर आती हैं, लेकिन इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले शशि थरूर जैसे बुद्धिजीवियों के लिए भी यह काफी हद तक सही साबित होती है।

वेबकूफ जैसे शब्द ईजाद करने वाले कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर आज ट्विटर पर खुद ही व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी का हिस्सा बनते नजर आए हैं। दरअसल, शशि थरूर ने आज ‘मिर्जा ग़ालिब के जन्मदिन’ पर ‘ग़ालिब’ की ही एक एक बहुत ही सुन्दर और मनोहर शायरी शेयर की है। लेकिन ट्विटर यूज़र्स को इसमें कुछ झोल नजर आ गया।

शशि थरूर ने आज ट्वीट करते हुए लिखा –

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“ख़ुदा की मोहब्बत को फ़ना कौन करेगा?
सभी बन्दे नेक हों तो गुनाह कौन करेगा?
ऐ ख़ुदा मेरे दोस्तों को सलामत रखना

वरना मेरी सलामती की दुआ कौन करेगा
और रखना मेरे दुश्मनों को भी महफूज़ वरना

मेरी तेरे पास आने की दुआ कौन करेगा…!!!
Mirza Ghalib’s 220th birthday. So many great lines…. “

लेकिन इस ‘दर्दभरी शायरी’ को ट्वीट करते ही ट्वीटर यूज़र्स ने शशि थरूर को याद दिला दिया कि ना ही आज मिर्जा ग़ालिब का जन्मदिन है और ना ही ये शायरी ग़ालिब ने लिखी हुई है। जब तक ‘वेबकूफ’ शब्द गढ़ने वाले शशि थरूर समझ पाते कि वो ‘फूट इन माउथ’ मोमेंट का शिकार हुए हैं, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। उन्होंने एक ट्वीट के जरिए स्पष्ट किया कि उन्हें जन्मदिन की तारीख को लेकर कुछ ग़लतफ़हमी हो गई थी। इसके बाद शशि थरूर को बेहद रोचक रिप्लाई आने लगे।

कुछ ट्विटर यूज़र इस बात से भी नाराज थे कि आज ही कॉन्ग्रेस नेता शीला दीक्षित का निधन हुआ और शशि थरूर को शायरी सूझ रही थी।

अधिक शायरी के लिए ऑटो वालों से संपर्क करें शशि थरूर

हालाँकि, शशि थरूर बहुत ज्ञानी आदमी हैं लेकिन उन्हें इस तरह की ‘फैन’ होने की बातों से वास्तविक साहित्य प्रेमियों को निराश नहीं करना चाहिए। यह सिर्फ इस बात का सबूत है कि इस मामले में आपका ज्ञान बेहद सतही और सिर्फ ज्ञान के प्रदर्शन के तक ही समर्पित है।

जिस शायरी को शशि थरूर मिर्जा ग़ालिब की बताकर अन्य लोगों में भी इस भ्रम को फैलाते हैं, उस तरह की शायरी के स्टिकर अपने काले छाते की कमानियों में छोटे शहरों के बस स्टैंड में बेच रहे होते हैं। ये शायरियाँ ऑटो-रिक्शा चालक और बस या ट्रक ड्राइवर्स अपने मनोरंजन के उद्देश्य से शीशे या फिर बोनट आदि पर चिपकाकर चलते हैं।

शायरी का वो संकलन, जिसे हमने थरूर की मोबाइल से निकाला

ऑपइंडिया तीखी मिर्ची सेल ने शशि थरूर का मोबाइल हैक कर के शायरी का वो संकलन निकला है जिसे शशि थरूर आने वाले मशहूर शायरों के जन्मदिन पर पोस्ट करने वाले थे। सड़कछाप पंक्तियों को ग़ालिब का बताते हुए श्री थरूर जी ब्रो ने यह जानकारी भी दी कि मिर्ज़ा ग़ालिब उनके ‘ऑल टाइम फेवरेट’ हैं। कल वो ग़ालिब के नाम से नीचे की पंक्तियाँ न ट्वीट कर दें, इस कारण लोगों में डर का माहौल है। एक नजर –

मालिक की गाड़ी, ड्राइवर का पसीना
चलती है सड़क पर बन कर हसीना

ड्राईवर की ज़िन्दगी में लाखों इलज़ाम होते हैं,
निगाहें साफ़ होती हैं फिर भी बदनाम होते हैं!

चलती है गाड़ी उड़ती है धूल
जलते हैं दुश्मन खिलते हैं फूल

बागों में मोरनी पूछे, चौराहे पर पूछे सिपाही
बोम्बे में एसवरिया पूछे ७९११ क्यों नहीं आई

मेरी चलती है
तो तेरी क्यों जलती है

एक चाँद को देख कर चांदनी भी शरमा गई
किस्मत थी इस गरीब की सवारी गाड़ी में आ गई

गुल गया, गुलबदन गया, गई होंठों की लाली,
अब तो पीछा छोड़ दे मैं हो गई बच्चों वाली

टेबल पर ‘उल्टा तिरंगा’ रखते हैं ‘वेबकूफ’ शशि थरूर

कल ही कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर ने एक तस्वीर शेयर की थी, जिसमें उन्होंने अपने टेबल पर उल्टा तिरंगा रखा हुआ था। इसके बाद ट्विटर यूज़र्स ने उन्हें इस बात पर जमकर लताड़ लगाई थी।

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