3.5 बिलियन डॉलर की सपत्ति के मालिक पॉल सिंगर डोनाल्ड ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी के बड़े डोनरों में से एक हैं। वो 'एलियट मैनेजमेंट' नामक इन्वेस्टमेंट कम्पनी के संस्थापक हैं। ये कम्पनी जहाँ भी स्टेक ख़रीदती है, वहाँ के मैनेजमेंट में बड़ा बदलाव करती है।
ट्रंप और मोदी की बैठक में तकनीक और रक्षा जैसे अहम मसलों पर चर्चा हुई। रक्षा डील के अंतर्गत भारत को अपाचे और एमएच-60 रोमियो हेलीकॉप्टर मिलेंगे, जो दुनिया में सबसे उत्तम तकनीक वाले हेलीकॉप्टर हैं। दोनों देशों के बीच कुल तीन करार पर हस्ताक्षर हुए हैं।
"मैं वादा करता हूँ कि लिबर्टी और इंडिगो अब जीवन में कभी क्रूरता का सामना नहीं करेंगे, यहाँ तक कि किसी कसाई का हाथ तक उन्हें नहीं छू पाएगा। दोनों की देखरेख एक फार्म में की जाएगी। वो जैसे-जैसे बड़े होंगे, हमें याद आता रहेगा कि कुछ दोस्तियाँ अचानक से कहीं भी हो जाती हैं।"
ट्रंप प्रशासन ने अमेरिकी संसद से स्पष्ट कहा कि उसका भारत को इंटीग्रेटेड एयर डिफेन्स वेपन सिस्टम (IADWS) बेचने का पक्का इरादा है। 1.9 बिलियन डॉलर की इस डील को अमेरिका ने मंजूरी दे दी है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कासिम अल-रिमी को ढेर किए जाने का दावा किया है। कासिम अल-रिमी को अलकायदा ने अरब देशों में आतंक की कमान संभालने की जिम्मेदारी दे रखी थी। उसे आतंकी सरगना अयमान-अल जवाहिरी के बाद अलकायदा में दूसरे नंबर पर माना जाता था।
मीडिया गिरोह की मानें तो अब अगर चीन की कोई नगर पालिका या ग्राम पंचायत भी भारत में फासिस्ट मोदी सरकार के दौरान चाउमीन में डाली जा रही शिमला मिर्च के खिलाफ प्रस्ताव जारी कर दे, तो मोदी सरकार की जड़ें हिलते देर नहीं लगेगी।
इन लोगों ने हाथों में तख्तियाँ और तिरंगा झंडा लिया हुआ था। इन तख्तियों में लिखा था कि भारत के संविधान और 'वन्दे मातरम' का सम्मान करो। इसी रैली में अनुच्छेद-370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने वाले फ़ैसले की भी तारीफ की गई। स्कॉटलैंड में खालिस्तानियों के ख़िलाफ़ नारेबाजी हुई।
रावलपिंडी स्थित कंपनी 'बिजनस वर्ल्ड' से जुड़े पाँच पाकिस्तानियों पर अमेरिका में आरोप लगा है कि उन्होंने पाकिस्तान के न्यूक्लियर और मिसाइल प्रोग्राम के लिए अमेरिकी तकनीक की स्मगलिंग की है।
हमने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से भी अपील की है, जिससे कि आतंक प्रयोजित और उनके लिए फंडिंग करने वाले देशों को कूटनीतिक तरीके से विश्व स्तर पर अलग-थलग किया जा सके। हम आतंक को खत्म करना चाहते हैं तो हमें अमेरिका द्वारा 9/11 के बाद आंतकियों के ख़िलाफ अपनाई गई नीति को अपनाना होगा
पहले तो ईरान इस बात से साफ़ इनकार करता रहा कि इस घटना में उसका हाथ है। लेकिन, कुछ ही समय में हकीक़त सभी के सामने आ गई। इसके बाद ख़ुद ईरान के राष्ट्रपति रुहानी ने स्वीकार किया कि एक मानवीय भूल से मिसाइल ग़लत दिशा में चली गई, जिससे विमान हादसे का शिकार हो गया।