हर यूनिवर्सिटी या सार्वजनिक मंच पर ये विशुद्ध झूठ बोलते हैं, फिर इनका गिरोह सक्रिय हो जाता है और ऐसे दिखाता है कि ब्रो, अरुंधति रॉय ने बोला है ब्रो… ब्रो… समझ रहे हो ब्रो? अरुंधति फ्रीकिंग रॉय ब्रो! ये ब्रो-ब्रो इतना ज्यादा होने लगता है कि वो ब्रोहाहा कॉलेज के 22-25 साल के युवा विद्यार्थियों के लिए तथ्य का रूप ले लेता है।
आतंकी तो मारा गया लेकिन उसकी पत्नी (जो कि उसकी कजन बहन भी है) और 4 बच्चे भारत वापस लौटने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इंजीनियर से आतंकी बने उक्त व्यक्ति की मौत 2018 में एक एयर स्ट्राइक में हो गई थी।
गृह मंत्रालय के आँकड़ों के मुताबिक 2009-13 के मुकाबले 2014-18 में नक्सली हिंसा में हुई मौतों का आँकड़ा 60.4% गिरकर 3,326 से 1,321 पर आ चुका है। गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी के लोकसभा में दिए गए जवाब के मुताबिक सरकार के सतत प्रयास से नक्सली हिंसा का दायरा अब सिकुड़ने लगा है और यह केवल 60 जिलों में ही बचा है।
इस साल मई में मलेशिया पुलिस ने दावा किया था कि उन्होंने इस्लामिक स्टेट के विघटन के बाद अलग हुए तीन 'लोन वुल्फ़' जिहादियों को गिरफ़्तार कर लिया है। मलेशिया पुलिस के अनुसार इस गुट के बाकी जिहादियों को उन्होंने पहले ही धर-दबोचा था
लश्कर के 6 आतंकवादियों के तमिलनाडु में घुसने की खुफिया रिपोर्ट के बाद पूरे राज्य में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया था। सभी आतंकवादी मुस्लिम हैं, लेकिन हिंदुओं की वेशभूषा में वे भारत में घुसे हैं। उन्होंने तिलक और भभूत लगा रखा है।
FATF ने पाकिस्तान से अक्टूबर 2019 तक अपने एक्शन प्लान को पूरा करने के लिए कहा था, इसके लिए पाकिस्तान के प्रति FATF का रुख़ बेहद सख़्त था। एक्शन प्लान में जमात-उद-दावा, फलाही-इंसानियत, लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, हक्कानी नेटवर्क और अफ़गान तालिबान जैसे आतंकी संगठनों की फंडिंग पर रोक लगाने जैसे कई क़दम शामिल थे।
दहशतगर्दी के शुरुआती दिनों में आतंकियों को हीरो समझा जाता था। उन्हें मुजाहिद कहकर सम्मान भी दिया जाता था। लोग अपनी बेटियों की शादी इनसे करवाते थे लेकिन जल्दी ही कश्मीरियों को यह एहसास हुआ कि आज़ादी की बंदूक थामे ये लड़ाके असल में जिस्म को नोचने वाले भेड़िये हैं।
हर्षपाल और उनकी टीम ने जम्मू में झज्जर-कोटली में पिछले सितंबर में तीन आतंकवादियों का ख़ात्मा किया था। मुठभेड़ में गोली और छर्रे लगने से वो गंभीर रूप से घायल हो गए थे, पर वो आतंकियों के सामने मज़बूती से डटे रहे और उन्हें मार गिराने तक पीछे नहीं हटे।
सेना के सूत्रों के हवाले से ANI ने दावा यह भी किया है कि घुसपैठ में पाकिस्तानी सेना ने भी अपनी सैन्य चौकियों से भारी कवर फायरिंग देते हुए सहयोग किया था।