NCP के एक नेता का कहना है कि जब तक तीनों पार्टियाँ- कॉन्ग्रेस, NCP और शिवसेना, सरकार में शामिल नहीं हो जातीं, तब तक कोई स्थिरता नहीं आएगी। उन्होंने कहा, "हम चाहते हैं कि कॉन्ग्रेस सरकार का हिस्सा हो।"
कॉन्ग्रेस और एनसीपी के सहयोग से सरकार बनाने को लेकर उत्साहित शिवसेना को तगड़ा झटका लगा है। सोनिया गॉंधी ने उसे समर्थन देने को लेकर आखिरी पलों में पत्ते खोलने से इनकार कर दिया। इसके बाद गवर्नर ने एनसीपी को बुलावा भेजा।
निरुपम ने कहा है कि अल्पकालिक अवधि के लिए हम सरकार तो बना सकते हैं। जनता से कह भी सकते हैं कि राज्य के विकास के लिए इस तरह का कदम जरूरी था। लेकिन वैचारिक स्तर पर जिस पार्टी से हमारा दशकों विरोध रहा है उन सवालों का जवाब चुनावों में कैसे दे सकते हैं।
"शिवसेना के फ़ैसला लेते ही सब कुछ तय हो जाएगा क्योंकि ठाकरे को समर्थन देने को लेकर कॉन्ग्रेस में कोई अंदरूनी विवाद नहीं है। शिवसेना जब से भाजपा के साथ गई, तभी से उसने धर्म की राजनीति शुरू की है। भाजपा का साथ छोड़ते ही उसकी विचाधारा बदल जाएगी।"
संजय राउत ने दावा किया था कि महाराष्ट्र के हित में कॉन्ग्रेस और एनसीपी का समर्थन शिवसेना को मिल सकता है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि सोनिया और पवार की मुलाकात में क्या खिचड़ी पकती है।
कॉन्ग्रेस की सहयोगी पार्टी एनसीपी के नेता ने कहा कि उनका व्हाट्सएप्प हैक किए जाने की सारी ख़बरें आधारहीन हैं। इस तरह उन्होंने कॉन्ग्रेस के आरोपों की पोल खोल दी। इसके बाद कॉन्ग्रेस समर्थक तीन महिला पत्रकारों ने प्रफुल्ल पटेल के इस बयान पर चर्चा की।
शिवसेना के नहीं मानने की सूरत में निर्दलीय और अन्य छोटे दलों के साथ भाजपा अल्पमत सरकार का गठन कर सकती है। वहीं, एनसीपी ने फिर से साफ कर दिया है कि वह विपक्ष में ही बैठेगी।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने भाजपा विधायकों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि पार्टी ने उन पर दोबारा भरोसा जताया है। साथ ही सीएम फडणवीस ने शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे को भी धन्यवाद दिया। महाराष्ट्र के राजनीतिक घटनाक्रम पर...