Tuesday, October 19, 2021
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दिल्ली पहुँचा महाराष्ट्र का सियासी घमासान, शिवसेना ने कहा- सबसे बड़े दल को मौका दें गवर्नर

288 सदस्यीय महाराष्ट्र विधानसभा के चुनाव में 105 सीटें जीतकर भाजपा सबसे बड़े दल के तौर पर उभरी है। उसकी सहयोगी शिवसेना को 56 सीटें मिली हैं। लेकिन, शिवसेना ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद की मॉंग कर रही है। यही कारण है कि अब तक राज्य में नई सरकार का गठन नहीं हो पाया है।

महाराष्ट्र में नई सरकार के गठन पर तस्वीर अब तक साफ नहीं हुई है। सोमवार को दिल्ली में होने वाली दो मुलाकातों पर सबकी नजर टिकी है। भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मुलाकात की है। वहीं, कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गॉंधी और एनसीपी के मुखिया शरद पवार के बीच भी बैठक होनी है। इस बीच, शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा है कि गवर्नर सबसे बड़े दल को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करें।

288 सदस्यीय महाराष्ट्र विधानसभा के चुनाव में 105 सीटें जीतकर भाजपा सबसे बड़े दल के तौर पर उभरी है। उसकी सहयोगी शिवसेना को 56 सीटें मिली हैं। लेकिन, शिवसेना ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद की मॉंग कर रही है। यही कारण है कि अब तक राज्य में नई सरकार का गठन नहीं हो पाया है। चुनाव में कॉन्ग्रेस को 44 और उसकी सहयोगी एनसीपी को 54 सीटों पर सफलता मिली है।

चुनाव नतीजों के बाद फडणवीस पहली बार दिल्ली में हैं। बताया गया है कि महाराष्ट्र में बारिश से किसानों को हुए फसल नुकसान के मसले पर चर्चा के लिए वे दिल्ली आए हैं। सूत्रों के अनुसार शाह के साथ बैठक में राष्ट्रीय आपदा राहत कोष के तहत मिलने वाली सहायता पर चर्चा हुई।

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वहीं, शिवसेना सांसद संजय राउत पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ सोमवार को राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मुलाक़ात करेंगे। राज्यपाल से इस मुलाक़ात के सन्दर्भ में राउत ने कहा, “मैं उनसे सबसे बड़ी पार्टी को आमंत्रित करने और फिर अन्य पार्टियों को मौक़ा देने के लिए कहूँगा।” साथ ही उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री शिवसेना का होगा और शपथ ग्रहण समारोह मुंबई के शिवाजी पार्क में होगा।

इससे पहले राउत ने कहा था कि ‘महाराष्ट्र के हित में’ में कॉन्ग्रेस और एनसीपी का समर्थन शिवसेना को मिल सकता है। हालॉंकि एनसीपी ने अब तक विपक्ष में बैठने के अपने स्टैंड से पीछे हटने के संकेत नहीं दिए हैं। वहीं, शिवसेना को समर्थन पर कॉन्ग्रेस में भी मतभेद साफ दिख रहा है। पूर्व केंद्रीय मंत्री सुशील शिंदे और संजय निरुपम जैसे नेता इसके विरोध में हैं।

रविवार को औरंगाबाद में मीडियाकर्मियों द्वारा पूछे जाने पर कि क्या शिवसेना अकेले सरकार बनाएगी या अन्य दल भी शामिल होंगे, शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा था, “आपको आने वाले दिनों में पता चलेगा।”

वहीं, शिवसेना के मुखपत्र सामना में रविवार को प्रकाशित अपने कॉलम रोक ठोक में राउत ने सरकार गठन के कई परिदृश्य सामने रखे थे। इसमें उन्होंने लिखा,

“बीजेपी सदन में बहुमत साबित करने में नाकाम रहने के बाद शिवसेना सरकार बनाने का दावा पेश कर सकती है। NCP, कॉन्ग्रेस और निर्दलीय उम्मीदवारों की मदद से बहुमत का आँकड़ा 170 तक जाएगा। शिवसेना का अपना मुख्यमंत्री हो सकता है। उसे सरकार चलाने के लिए साहस दिखाना होगा।” 

सासंद राउत ने पार्टी के पास 170 से ज्यादा विधायकों का समर्थन होने का दावा किया। उनके मुताबिक ‘महाराष्ट्र के हित में’ शिवसेना के साथ कॉन्ग्रेस और एनसीपी आ सकते हैं। बकौल राउत शिवसेना को समर्थन का आँकड़ा 175 तक पहुँच सकता है। मुखपत्र सामना में रविवार को एक फ्रंट पेज स्टोरी भी की गई, जिसमें ‘किसी भी कीमत पर, राज्य में भाजपा की सरकार नहीं होनी चाहिए’ शीर्षक से लिखा गया था कि कॉन्ग्रेस और NCP ने भाजपा को सत्ता से बाहर रखने का फ़ैसला लिया है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि सोनिया और पवार की मुलाकात में क्या खिचड़ी पकती है।

 

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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