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7 दिन में गोरी, 15 दिनों में छरहरी: क्रीम बेचने वालों पर लगाम जरूरी और खुद की मानसिकता पर भी!

कॉलेज-ट्यूशन से लेकर शादी-ब्याह तक के बीच एक लड़की के मन में ब्यूटी प्रोडक्ट्स को लेकर चुनाव चलता ही रहता है कि आखिर वो किस तरह समाज के बनाए पैमानों पर निखर पाएगी और कैसे अन्य लड़कियों की तरह खुद को सुंदर बना पाएगी... और कंपनियाँ इसी का फायदा उठाती हैं।

मिलिए शादाब से: जामिया का कश्मीरी छात्र जिसे गोली लगी, पढ़िए इसके जहरीले फेसबुक पोस्ट

इसमें लिखा था - कार्टून प्रोग्राम छोटा भीम के क्रिएटर अब गाय की जर्नी पर एक एनिमिटेड फिल्म बनाएँगे। इसको शेयर करते हुए शादाब ने लिखा, “डिसक्लेमर: इसका थीम सॉन्ग ये होगा- गौ-मूत्र धूम मचाए, सामने कोई टिक न पाए, गौ माँ, गौ माँ, लिंचिंग वाली गौ माँ।”

फर्जी हिंदू नाम रख ग्रैजुएशन कर रही लड़की से FB पर दोस्ती, रेप, अश्लील वीडियो… धर्म परिवर्तन का दबाव

लड़के ने अपना नाम हिंदू जैसा रखा। फेसबुक पर उसी फर्जी नाम से दोस्ती की। लड़की हिंदू है, ग्रैजुएशन की छात्रा है। फिर शादी का झाँसा देकर एक दिन मुरादाबाद बुलाया। एक होटल में ले गया और बलात्कार किया, अश्लील वीडियो भी बनाया।

जब दंगाई पत्थर बरसा रहे थे, एक शख्स ने पुलिस वालों के खाने का भरा बिल… वो भी बिना बताए!

"आप लोग अपना घर-परिवार छोड़कर दिन-रात हमारे लिए खड़े रहते हैं, तो आपके प्रति भी हमारा कुछ कर्तव्य बनता है।" - जब सुशील सिंह और उनके साथियों ने यह भावनात्मक संदेश सुना तो सब दौड़ कर गेट तक गए लेकिन वो शख्स "Thank You" सुनने के बजाय चुपचाप वहाँ से जा चुका था।

‘सूअर’ लिखने पर फेसबुक करेगा ब्लॉक और ‘जय श्री राम’ कहने पर भी! यही है कम्युनिटी गाइडलाइन्स

एक ही तरह के पोस्ट पर दो नीति अपनाने का अर्थ यह हुआ कि किसी खास संस्था पर इनका काँटा ज्यादा संवेदनशील हो जाता है, और वो भी शायद तब जब किसी खास पहचान वाले लोग एक साथ ऐसी खबरों को रिपोर्ट करते हैं।

आखिर फेसबुक मजहबी बलात्कारियों को बचाना क्यों चाहता है? क्यों डिलीट कर रहा है खबरें?

सवाल यह कि खास मजहब वालों के अपराधी होने पर फेसबुक की इतनी क्यों जलती है कि बदबू हर तरफ फैल जाती है?

लेफ़्ट-लिबरल इकोसिस्टम की नई चाल को काटने के लिए कितने तैयार हैं आप?

लेफ़्ट-लिबरलों का एक नया खेल शुरू हो गया है। "फेक न्यूज़" चिल्लाने से काम बनता नहीं देख उन्होंने उसी शराब को नई बोतल में डालकर "मिसइंफॉर्मेशन" का लेबल लगा दिया है। अब 'स्थानीय' गिरोह को वैश्विक लेफ़्ट-लिबरलों के नेटवर्क के सरगनाओं का साथ मिल रहा है।

चंद्रयान-2 पर ‘हाहा’ रिएक्शन देने वालों का भी कोई मजहब नहीं?

सिर्फ एक मीडिया हाउस के वीडियो पर हाहा रिएक्शन देने वाले लोगों के नाम देखिए। इनकी संख्या क़रीब हज़ार में है लेकिन 90% से भी ज्यादा लोगों की ख़ासियत यह है कि 'इनका कोई मज़हब नहीं है'।

प्रीतिश नंदी का ट्वीट बहुतों की हिंसक मानसिकता को उजागर करता है

प्रीतिश नंदी ने राज ठाकरे की प्रशंसा करते हुए वीडियो को यह कहते हुए संदर्भित किया कि कोई तो है, जो यह जानता है कि कैसे भक्तों को उसी की भाषा में सूद सहित वापस दिया जाए। मतलब नेता राज ठाकरे के साथ कोई पंगा नहीं ले सकता। हद तो यह कि ऐसे लोग खुद को बड़े पत्रकार मानते हैं।

फेसबुक का न्यूज़ टैब: क्वालिटी कंटेंट या न्यूज़ के नाम पर वामपंथी ज़हर को फीड में घुसाने की कोशिश?

हाल ही में भारत में फ़ेसबुक ने अकारण ही भाजपा समर्थक एक बड़े पेज The Third Eye और कॉन्ग्रेस समर्थक 600+ छोटे-मोटे पेजों को बैन कर दिया था। क्या फ़ेसबुक इस टैब में भी वामपंथी और अपने bias पर आधारित ख़बरें ही चलाएगा?

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