आरोपित ने अपनी रूममेट एवं अपने कंपनी में काम करने वाली लड़की को कमरे में अकेला देखकर उसके साथ रेप करने की पहले कोशिश की। लेकिन, जब लड़की ने ऐसा करने से मना किया तो आरोपित ने उसके मुँह में कपड़ा ठूँस दिया, जिसके बाद वो बेहोश हो गई।
सोनिया ने पार्टी नेताओं को स्पष्ट कह दिया था कि जब भी ऐसा लगे कि सरकार कॉन्ग्रेस के बनाए दिशानिर्देशों के अनुरूप काम नहीं कर रही है, पार्टी शिवसेना से अपना समर्थन वापस ले लेगी। सोनिया के आदेश के बाद उद्धव से लिखित आश्वासन लिया गया, तभी महाराष्ट्र में गठबंधन सरकार बन पाई।
"ईसाई परिवार हमारे पानी का कनेक्शन काट देते हैं। धमकी देते हैं। उन्हें (ईसाई परिवारों को) सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि हिन्दू परिवार पूजा करते हैं। उन्हें पसंद नहीं है कि हम अपने देवी- देवता को पूजें।"
सूत्रों के अनुसार महाराष्ट्र में शिवसेना-एनसीपी-कॉन्ग्रेस सरकार बनने के बाद जॉंच में हस्तक्षेप से पुलिस असहज महसूस कर रही है। एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने पिछले दिनों कहा था कि इसकी जॉंच के लिए सीएम से एसआईटी बनाने की मॉंग करेंगे।
सामना के संपादक और शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा कि हम चाहते हैं कि
अयोध्या दौरे के लिए हमारे गठबंधन के नेताओं को भी साथ आना चाहिए। इतना ही नहीं राउत ने आगे ये भी कहा कि राहुल गाँधी पहले से ही मंदिरों में जाते भी हैं।
शिवसेना भी पाथरी में बंद बुला रही है क्योंकि सांसद संजय जाधव ने कहा है कि साईं बाबा का जन्मस्थान पाथरी ही है। शिवसेना सांसद ने कहा कि अगर शिरडी ने सरकार पर दबाव बनाया है तो वो भी दबाव बनाने के लिए तैयार हैं।
एनसीपी नेता जितेंद्र के इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद एनसीपी नेता के इस बयान की जमकर आलोचना की जा रही है।
सोहेल ने बताया कि हत्या के बाद शव ठिकाने लगाने का उसे कोई रास्ता नहीं दिख रहा था। फिर क्राइम आधारित टीवी शो देख उसे शव को टुकड़े-टुकड़े कर फेंकने का विचार आया। अम्मी की लाश के उसने टुकड़े किए और उन्हें अलग-अलग स्थानों पर फेंक दिया।
राज्य में शिवसेना, कॉन्ग्रेस और एनसीपी के गठजोड़ में नवाब मलिक ने अहम भूमिका निभाई थी। एनसीपी उन्हें राज्य के सबसे बड़े मुस्लिम चेहरे के रूप में पेश करती रही है। उनके भाई का वीडियो वायरल होने पर उनका कोई बयान नहीं आया है।
ऑपइंडिया ने एक ख़बर में बताया था कि कॉन्ग्रेस के अधिकतर विधायक ग्रामीण इलाक़ों से जीत कर आए हैं। ऐसे में, पार्टी को सहकारिता, कृषि और ग्रामीण सम्बन्धी एक भी विभाग न मिलना पार्टी नेताओं के बीच नाराज़गी की वजह बन रही है।